कर्नाटक में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को पब्लिश कर दी गई है. चुनाव आयोग ने यह रिपोर्ट पब्लिश की है. रिपोर्ट में पता चला कि लगभग एक करोड़ वोटर्स के नाम काटे गए हैं. अब तक कुल 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के बाद की फाइनल लिस्ट पब्लिश हो चुकी है. 17.92 प्रतिशत के साथ ये दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है. अरुणाचल प्रदेश पहले पायदान पर है.
कर्नाटक SIR: 99.32 लाख वोटर्स के नाम कटे, बेंगलुरु शहर में ही 40% वोटर्स की कटौती
SIR के बाद कर्नाटक का फाइनल वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने पब्लिश किया. इस रिपोर्ट में पता चला कि लगभग एक करोड़ वोटर्स के नाम काटे गए हैं. 17.92 प्रतिशत के साथ ये दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है. पहले नंबर पर अरुणाचल प्रदेश है.

SIR से पहले, कर्नाटक में 5,54,32,314 मतदाता थे. 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाताओं की संख्या 99.32 लाख से ज़्यादा घटकर 4,55,00,011 रह गई. बेंगलुरु अर्बन में 40 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी देखी गई. यहां पहले 1.03 करोड़ मतदाता थे, जो अब घटकर 59.6 लाख रह गए हैं. अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने वोटर्स के नाम क्यों कटे? इसपर कर्नाटक के चीफ इलेक्टोरल अफसर (CEO) वी. अंबुकुमार ने जवाब दिया है.
राज्य CEO ने नाम कटने पर दी सफाईइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, CEO वी. अंबुकुमार ने कहा कि SIR की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और कानून के अनुसार पूरी की गई है. वहीं कुछ सिविल सोसाइटी ग्रुप ने आरोप लगाया है कि बड़ी संख्या में वोटर्स का नाम काटा गया है. इसमें कुछ ‘योग्य’ वोटर्स के नाम भी कटे हैं. आरोप ये भी लगा कि कई वोटर्स के नाम इसलिए काट दिए गए क्योंकि ज्यादा नंबर में फॉर्म-7 जमा किए गए थे.
CEO अंबुकुमार ने इन आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने बताया कि वोटर्स का नाम या तो ‘ASDD’ लिस्ट या फिर ‘अयोग्य’ होने की वजह से ही कटा है. फॉर्म-7 वाले आरोप पर उन्होंने कहा,
‘सिर्फ बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन आने के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया. पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी. मैं सभी पात्र मतदाताओं से अपील करता हूं. अगर आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो कृपया फॉर्म-6 के ज़रिए आवेदन करें. तय प्रक्रिया के अनुसार आपका नाम जोड़ दिया जाएगा.’
फाइनल लिस्ट में वोटर्स को उम्र के हिसाब से बांटा गया है. इससे पता चलता है कि 30-39 वर्ष की आयु वर्ग के लोग 1.02 करोड़ की संख्या के साथ सबसे बड़ा समूह हैं. इसके बाद 40-49 वर्ष का आयु वर्ग आता है, जिसमें 94.17 लाख मतदाता हैं. 18-19 वर्ष की आयु वाले मतदाताओं की संख्या 6.83 लाख है.
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चुनाव आयोग ने बताया क्यों काटे गए नामचुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 16 जून तक मतदाता सूची में शामिल कुल 5,54,32,314 मतदाताओं के लिए गणना फॉर्म तैयार किए गए थे. 24 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 4,46,80,151 मतदाता थे. डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट बताती है कि बाकी लोगों को 'ASDD' श्रेणी में रखा गया था. यानी अनुपस्थित (19,00,926), स्थानांतरित (65,45,679), मृत (16,39,864), और डुप्लीकेट एंट्री (7,09,870) लिस्ट.
ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल लोगों में से 43,82,824 मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया था. अंतिम मतदाता सूची में 43,20,957 मतदाताओं को शामिल किया गया, जबकि 61,867 मतदाता "अयोग्य" पाए गए. इसके अलावा, “क्लेम और ऑब्जेक्शन” पीरियड के दौरान कुल 10.08 लाख नए मतदाताओं को शामिल किया गया.
बताया गया कि इन वोटर्स के नाम या तो ‘लॉजिकल डिस्क्रिपन्सी’ या ‘नो मैपिंग’ की वजह से हटाए गए हैं. जिन वोटर्स को ‘अयोग्य’ पाया गया उनके नाम डिलीट करने के लिए ERO और AERO अफसरों ने फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया.
रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनल लिस्ट में विदेशी नागरिकों के नाम भी काटे गए हैं. जब आंकड़ों की बात हुई तो अंबुकुमार ने कहा कि ‘1000 से ज्यादा तो नहीं हैं.’ सूत्रों के अनुसार, पूरे राज्य में 771 विदेशी नागरिक मिले हैं. इनमें से 688 लोग नेपाल के ही हैं. कुछ अमेरिका, कनाडा और नॉर्वे के हैं. बताया गया कि इनमें से ज्यादातर लोगों ने भारतीय नागरिकता अपनी मर्जी से त्याग दी है.
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