लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच टाटा ग्रुप में चल रहे विवाद को लेकर बहस हो हुई. राहुल गांधी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बड़ी कंपनियों को अपना खिलौना समझती है. वहीं, वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए पूछा कि क्या वह कारोबारियों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं?
‘हर जगह भूत... ’, टाटा विवाद पर राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण में बड़ी बहस हो गई
नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं. राहुल गांधी ने सरकार पर टाटा समूह को ‘आपराधिक तरीके से बर्बाद’ करने का आरोप लगाया, जबकि निर्मला सीतारमण ने इसे कारोबारी और कानूनी मामले का राजनीतिकरण बताया.

टाटा ग्रुप का विवाद टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को लेकर है. उन्हें वापस टाटा संस के चेयरमैन के रूप में दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने को लेकर सब एकमत नहीं हैं. टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इसे कंपनी के नियमों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी है. हालांकि, टाटा संस का कहना है कि यह नियुक्ति कानूनी रूप से वैध है. नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी और ग्रुप कॉर्पोरेट सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय को 26 अक्टूबर को एक लेटर लिखा है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस लेटर में नोएल टाटा ने कहा कि 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में यह प्रस्ताव पेश किया गया था. जबकि डायरेक्टर्स को भेजे गए एजेंडे में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का कोई जिक्र नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, कंपनी ने उन्हें मीटिंग की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, मीटिंग के फाइनल मिनट्स या प्रस्ताव की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई. नोएल टाटा का तर्क है कि यह प्रस्ताव अमान्य है. क्योंकि इसमें टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के संबंधित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया.
राहुल गांधी ने दावा किया कि टाटा समूह को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि इस विवाद पर कारोबारी लीडर चुप क्यों हैं. इसके जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री ने उन पर व्यावसायिक और कानूनी मामलों का राजनीतिकरण करने और भारतीय उद्योग के प्रति अविश्वास फैलाने का आरोप लगाया. लेकिन ये बहस रुकी नहीं. इसके बाद राहुल गांधी ने निर्मला सीतारमण से दो सवाल पूछे. उन्होंने यह भी पूछा कि क्रोनी नंबर 1 माने सरकार का पसंदीदा उद्योगपति कब इस खेल में शामिल होगा और उसे टाटा समूह के कौन-कौन से हिस्से मिलेंगे.

गांधी के बयान पर रिएक्शन देते हुए वित्त मंत्री ने उन पर एक व्यावसायिक और कानूनी विवाद का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि क्या वह कारोबारी नेताओं को अपने साथ मिलाकर भारतीय उद्योग के प्रति अविश्वास फैलाने की कोशिश कर रहे हैं? सीतारमण ने एक पोस्ट में कहा,
‘विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मेरी सलाह है कि आप हर मुद्दे का राजनीतिकरण करने से बचें. साथ ही, व्यावसायिक और कानूनी मामलों को यूं ही आपराधिक करार देना स्वीकार्य नहीं है.’
वित्त मंत्री ने कांग्रेस के आर्थिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए पार्टी पर लाइसेंस-कोटा राज फैलाने का आरोप लगाया. वित्त मंत्री ने कहा,
'दशकों तक, आपकी पार्टी ने दमघोंटू लाइसेंस-कोटा राज के तहत भारतीय उद्यमियों की भावना को कुचल दिया और करोड़ों भारतीयों को गरीबी में धकेल दिया. इसलिए राहुल जी, हर जगह भूत देखना बंद करें.
(यह भी पढ़ें: टाटा ग्रुप में तगड़ा घमासान, चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाने पर नोएल टाटा भड़के, मांगे सारे रिकॉर्ड)
इसके बाद गांधी ने सवाल किया कि आखिर किस कानूनी और व्यावसायिक मामले के लिए टाटा ट्रस्ट और टाटा संस को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर बुलाया गया था. उन्होंने यह भी पूछा कि क्रोनी नंबर 1 (खास दोस्त नंबर 1) कब सामने आएगा और उसे टाटा समूह का कौन-सा हिस्सा मिलेगा.
वीडियो: खर्चा-पानी: 'टाटा को बर्बाद किया जा रहा', राहुल गांधी के बयान पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?













