अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के सबसे ताकतवर कट्टरपंथियों में से एक के साथ बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कूटनीतिक बातचीत के रास्ते फिर से खोलने के लिए ईरान के सिक्योरिटी चीफ मोहसिन रेज़ाई को एक चिट्ठी लिखी है. सबसे ज़रूरी है इसकी टाइमलाइन. क्योंकि उधर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अगले हफ्ते होने वाले मिडटर्म इलेक्शन के बाद युद्ध फिर से शुरू करने की धमकी दी है.
जेडी वेंस ने ईरान को पत्र भेजा, उधर ट्रंप जंग की तैयारी में, अमेरिका में क्या चल रहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के सबसे ताकतवर कट्टरपंथियों में से एक को बातचीत के लिए पत्र लिखा है. दूसरी तरफ डॉनल्ड ट्रंप मिडटर्म चुनावों के बाद हमले की तैयारी कर रहे हैं. तो क्या वेंस ने ट्रंप के खिलाफ जाकर फैसला लिया है?

तो क्या जेडी वेंस ने ट्रंप के खिलाफ जाकर ये कदम उठाया है? क्या लिखा है लेटर में? एक-एक कर समझते हैं.
क्या वेंस ट्रंप के खिलाफ जा रहे?ये खबर छापी है द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने. रिपोर्ट के मुताबिक, जेडी वेंस चाहते हैं कि दोनों देश एक फ्रेमवर्क पर आ जाएं जहां से बातचीत शुरु की जा सके. वो इस ख़त के ज़रिए ये टेस्ट करना चाहते हैं कि क्या वॉशिंगटन और तेहरान एक फ्रेमवर्क पर आ सकते हैं जिससे डॉनल्ड ट्रंप का मन बदल जाए.
इस ख़त के बारे में जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि ‘क्या वेंस को आपने आदेश दिया है कि ईरान के साथ पीस टॉक शुरु किया जाए?’ डॉनल्ड ट्रंप ने इस बात से साफ़ इनकार कर दिया. उन्होंने वेंस के एक्शन को एक अलग ही एंगल दे दिया. डॉनल्ड ट्रंप ने तर्क दिया कि ईरान को मेडिकल सप्लाई की ज़रूरत है इसलिए उसकी मदद की जा रही है. हालांकि अखबार का दावा है कि ख़त ट्रंप के आदेश पर ही भेजा गया है.
अब आते हैं ट्रंप की धमकी पर. अख़बार ने रिपोर्ट किया कि वॉशिंगटन ने कई खाड़ी देशों को ‘एक छोटे मगर जोरदार हमले’ की तैयारी करने को कहा है. अनुमान है कि 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के बाद ट्रंप ईरान के खिलाफ अभियान चलाएंगे.
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जेडी वेंस ने खत में क्या लिखा?रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले के जानकारों ने बताया कि जेडी वेंस ने ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' के सचिव मोहसिन रेज़ाई को एक पत्र भेजा है. मोहसिन रेज़ाई इससे पहले ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' के सबसे लंबे समय तक कमांडर रह चुके हैं. इस ख़त में फोकस इस बात पर रखा गया है कि दोनों देश बातचीत के लिए तैयार हो जाएं. अभी इसमें पीस डील को लेकर कोई शर्त नहीं रखी गई है.
वहीं ईरान भी बातचीत के लिए तैयार है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ‘ईरान अपने दुश्मनों से लड़ता रहेगा. मगर कूटनीति के रास्ते हमेशा खुले रहेंगे.’ पिछले महीने ईरान ने भी सात दिन का प्लान बनाकर अमेरिका भिजवाया था. मगर ट्रंप ने रिजेक्ट कर दिया था.
ईरान का स्टैंड साफ है कि जब तक अमेरिका ब्लॉकेड नहीं हटाता, सैंक्शन नहीं ख़त्म करता और हर मोर्चे पर लड़ाई नहीं रुकवाता तब तक बातचीत नहीं होगी.
मोहसिन रेज़ाई ज़रूरी क्यों?अमेरिका और इजरायल के जॉइंट हमलों में बहुत से ईरानी लीडर्स मारे गए. इनमें ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई भी शामिल हैं. इसके बाद ईरान में कई लोगों के हाथ में पावर आई. मोहसिन रेज़ाई उनमें से एक हैं. रेज़ाई ने 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड का नेतृत्व किया था. वे अमेरिका की ओर से खतरों के बीच एक प्रभावशाली लेकिन आक्रामक आवाज़ बनकर उभरे हैं.
उन्होंने साफ़ किया है कि अमेरिका के साथ तब तक बातचीत नहीं होगी जब तक उसकी मांगे पूरी नहीं हो जातीं. तेहरान में रेज़ाई ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के सुरक्षा प्रमुखों से मुलाकात करने का एक दुर्लभ कदम उठाया. इससे पहले की ज्यादातर मुलाकातों में राजनयिक शामिल होते थे. अख़बार के मुताबिक, कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कट्टरपंथियों से बातचीत करने पर कोई रास्ता निकल सकता है. इसलिए वेंस ने तेहरान को चिट्ठी लिखी है.
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