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पूरा वंदे मातरम गाने से क्यों कतरा रही कांग्रेस? सिर्फ 2 ही छंद गाने के स्टैंड पर अडिग

‘Vande Mataram’ को लेकर बढ़े विवाद के बीच Congress ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है. CWC ने 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए तय किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सिर्फ शुरुआती दो छंद गाए जाएंगे.

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सोनिया गांधी के खिलाफ राष्ट्रगीत का अपमान करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है (PHOTO- India Today/PTI)

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  • कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 28 अक्टूबर 1937 के प्रस्ताव के अनुसार पार्टी के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो पद गाने का फैसला पुनः दोहराया है।
  • यह निर्णय उस समय लिया गया जब केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत के गाने के नए प्रोटोकॉल की घोषणा की और उसके बाद कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत गाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
  • इस फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है और विवाद के चलते राजनीतिक आलोचना तेज हुई, जिससे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत पर चर्चा बढ़ी है।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने 'वंदे मातरम' पर पार्टी के 1937 वाले रुख को फिर से दोहराया है. पार्टी ने तय किया है कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सिर्फ दो शुरुआती छंद (Stanza) ही गाए जाएंगे. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रगीत को गाने के तरीके और सरकारी कार्यक्रमों में इसे गाने के लिए केंद्र सरकार नया प्रोटोकॉल लेकर आई है. कांग्रेस के इस स्टैंड पर बीजेपी ने निशाना साधा है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि यह कांग्रेस की देशविरोधी मानसिकता है. कांग्रेस पार्टी आज मुस्लिम लीग बन गई है.

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इंडिया टुडे के सूत्रों के मुताबिक 19 अगस्त को CWC की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई. चर्चा के दौरान कई नेताओं ने 1937 में कांग्रेस के अपनाए गए रुख को फिर से दोहराया है. चार घंटे से भी अधिक चली बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. इसे संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा,

इस पर कोई कन्फ्यूजन नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कल गोवा में साफ तौर पर यह बात कही थी. आज हमने CWC की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की. हमारा रुख बिल्कुल साफ है. वही रुख जो 1937 के प्रस्ताव में तय किया गया था, जिसमें उस समय पार्टी के शीर्ष नेता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल मौजूद थे. 

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उन्होंने आगे कहा, 

उन्होंने जो फैसला लिया था, वही हमने भी तय किया है. हम बिल्कुल साफ हैं कि हमारी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता वही करेंगे. यही हमारा फैसला है.

जब वेणुगोपाल से पूछा गया कि क्या पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सिर्फ दो पद गाए जाएंगे, तो उन्होंने हां में जवाब दिया.

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वंदे मातरम पर घमासान जारी

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है. दरअसल नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत गाए जाने के दौरान एक कथित घटना हुई. इस घटना को लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है.

इस मामले में दिल्ली पुलिस को एक शिकायत दी गई है. शिकायत में कार्यक्रम के दौरान उनके कथित व्यवहार की जांच के आधार पर FIR दर्ज करने की मांग की गई है. इसके अलावा, कर्नाटक के उरवा पुलिस स्टेशन में बीजेपी नेताओं ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. सोनिया गांधी पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत का अपमान किया है.

वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम और राष्ट्रगान गाना कांग्रेस के लिए एक भावनात्मक मुद्दा है. लेकिन बीजेपी के लिए यह एक राजनीतिक मामला है. उन्होंने यह भी कहा कि पूरा राष्ट्रगीत गाने पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आपत्ति को बीजेपी ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया. यह आलोचना जरूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक चाल भर है. पेपर लीक और चंदा चोरी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी की चाल है. यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के वीडियो में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को वंदे मातरम गाए जाने के दौरान आपस में बात करते हुए देखा गया था. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रगीत के पूरा होने से पहले ही उसे रोकने का इशारा किया था.

(यह भी पढ़ें: वंदे मातरम् की जगह लता मंगेशकर के एल्बम सॉन्ग पर खड़े रहे एकनाथ शिंदे, फिर मांगी माफी)

कांग्रेस दो छंद ही क्यों गाती है?

कांग्रेस का कहना है कि उसका यह फैसला अक्टूबर 1937 में CWC  द्वारा पास किए गए एक प्रस्ताव पर आधारित है. इसमें पार्टी ने तय किया था कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ शुरुआती दो पद ही गाए जाने चाहिए. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 28 अक्टूबर 1937 को CWC की बैठक में रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर वंदे मातरम को लेकर एक प्रस्ताव पास किया गया. यह बैठक महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद की मौजूदगी में हुई थी. उन्होंने कहा,

आज CWC की बैठक में उस प्रस्ताव पर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष ने पुराने प्रस्ताव का एक हिस्सा भी पढ़कर सुनाया. इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है. इसे जानबूझकर मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि आज के असली मुद्दे युवा, परीक्षाओं के पेपर लीक, चंदा चोरी और विदेश नीति की विफलता है. हमारा रुख पहले दिन से ही साफ रहा है कि 28 अक्टूबर 1937 के प्रस्ताव के अनुसार, और हमारे पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के कहे अनुसार, 'जन गण मन...' हमारा राष्ट्रगान होगा और वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगीत होगा.

यह फैसला गाने के फुल वर्जन पर हुई चर्चा के बाद लिया गया है. इसमें चर्चा हुई कि अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की मौजूदगी वाले राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए इसकी उपयुक्तता क्या है.

वीडियो: क्या सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ गीत रोकने की कोशिश की?

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