महाराष्ट्र में सरकार चलाने के लिए नए नियम जारी किए गए हैं. इससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हो गए हैं. नए नियमों के मुताबिक, अब मुख्यमंत्री के पास राज्य के किसी भी मंत्री या विभाग के फैसले को बदलने की पूरी ताकत होगी. यानी अगर कोई मंत्री कोई फैसला लेता है और मुख्यमंत्री को वह ठीक नहीं लगता, तो वे उसे पलट सकते हैं.
देवेंद्र फडणवीस ने 51 साल पुराना कानून बदला, अब होंगे 'सुपर CM', मंत्रियों की नहीं चलेगी मनमानी!
Maharashtra में सरकार चलाने के नए नियम जारी हुए हैं. इनसे मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis पहले से ज्यादा ताकतवर बन गए हैं. वे अब किसी भी मंत्री का फैसला बदल सकते हैं. क्या कहते हैं नियम?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने 14 अगस्त को 'महाराष्ट्र सरकार के कामकाज के नियम, 2026' को नोटिफाई किया. इन नए नियमों ने साल 1975 से चले आ रहे 51 साल पुराने नियमों की जगह ली है. मुख्यमंत्री अब जनहित का हवाला देकर किसी भी कैबिनेट मंत्री के फैसले को बदल या रद्द कर सकते हैं.
लिखित में देना जरूरीमुख्यमंत्री किसी भी विभाग के दस्तावेज या रिकॉर्ड सीधे अपने पास समीक्षा के लिए मंगा सकते हैं. विभागीय मंत्री और सचिव मांगी गई फाइलों को रोकने से इनकार नहीं कर सकते. हालांकि, मंत्री का फैसला बदलने के लिए मुख्यमंत्री को लिखित में ठोस वजह दर्ज करनी होगी. नियमों के मुताबिक, इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और मनमाने ढंग से फैसलों को बदलने से रोका जा सकेगा.
कोर्ट के फैसले के बाद बदले नियम
साल 2022 में महाराष्ट्र के तत्कालीन सहकारिता मंत्री (जो बीजेपी से थे) ने चंद्रपुर जिला सहकारी बैंक में कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी दे दी थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हस्तक्षेप किया और सहकारिता मंत्री के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी. इस कदम को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में चुनौती दी गई. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब विभागीय मंत्री ने कानूनी रूप से फैसला ले लिया है, तो मुख्यमंत्री उसे इस तरह नहीं रोक सकते.
मामले की सुनवाई के बाद 3 मार्च 2023 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिंदे के रोक लगाने वाले आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि 1975 के सरकारी कामकाज के नियमों के तहत मुख्यमंत्री के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है, जिससे वे अपने ही कैबिनेट मंत्री के फैसले को बदल सकें.
हाईकोर्ट के इसी फैसले की वजह से तत्कालीन सरकार को कानूनी झटका लगा था. इसी कानूनी कमी को दूर करने के लिए अब अगस्त 2026 में 51 साल पुराने नियमों को बदल दिया गया है, ताकि वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (या भविष्य के किसी भी सीएम) के पास मंत्रियों के फैसलों को पलटने का कानूनी अधिकार सुरक्षित रहे.
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गठबंधन में पड़ेगी दरार?इन नए नियमों से गठबंधन के सहयोगियों के बीच मतभेद होने का खतरा बढ़ गया है. महाराष्ट्र में बीजेपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (अजीत पवार) का गठबंधन है. विपक्षी दलों और कुछ विश्लेषकों का आरोप है कि यह नियम दूसरे सहयोगी दलों के मंत्रियों पर लगाम कसने और प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह बीजेपी सीएम (फडणवीस) के हाथों में लाने लिए लाया गया है.
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