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'अरुणाचल में चीन का कोई नया कब्जा नहीं', विवाद पर और क्या बोले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में चीन के नए कब्जे की खबरों को खारिज कर दिया है. साथ ही उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के लोगों की चिंताओं पर भी बात की है.

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कंद्रीय मंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के लोगों की चिंताओं और नए कब्जे के दावों के बीच अंतर स्पष्ट किया. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में चीन के नए कब्जे के दावों को खारिज करते हुए कहा कि कोई नया कब्जा नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय लोगों की चरागाहों तक पहुंच संबंधी चिंताएं जायज हैं।
  • अरुणाचल प्रदेश में चीन द्वारा सड़कें और सैन्य चौकियां बनाने की पृष्ठभूमि में स्थानीय लोगों को पारंपरिक चरागाहों तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न हुई है, जबकि भारत ने इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकास में देरी की।
  • रिजिजू ने बताया कि 2014 के बाद इस इलाके के बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया गया है, और उन्होंने कहा कि भारत ने चीन के क्षेत्रीय दावों को स्वीकार नहीं किया है तथा स्थिति नियंत्रण में है।

अरुणाचल प्रदेश में कुछ समय से चीन के नए कब्जे की कोशिशों की खबर आ रही है. लेकिन केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन खबरों को खारिज किया है. हालांकि, उन्होंने स्थानीय लोगों की उन चिंताओं को जायज बताया है, जो सीमा से लगे इलाकों में मवेशियों के चारागाहों तक पहुंच से जुड़ी है.

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किरेन रिजिजू ने उन दावों को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया कि चीनी सैनिक भारतीय सेना को कुछ जगहों पर गश्त करने से रोक रहे हैं. दावा किया गया था कि चीन से सटी अरुणाचल प्रदेश की कुछ जरूरी जगहों पर भारतीय सैनिकों को पेट्रोलिंग करने से रोका जा रहा है. इंडिया टुडे से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने इन सभी दावों को गलत बताया. 

रिजिजू ने कहा कि चीनी सैनिकों की जिस गैर-कानूनी मौजूदगी की अभी चर्चा हो रही है, उसका सिरा 1959 तक जाता है. उन्होंने कहा,

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ये चिंता इसलिए है क्योंकि चीन ने बुनियादी ढांचे के विकास के प्रोजेक्ट पहले शुरू कर दिए. ये उन इलाकों में हुआ था, जहां भारत ने पहले सड़कें नहीं बनाई थीं. 

रिजिजू ने कहा कि जो नई बात सामने आ रही है, वह ये है कि कुछ स्थानीय लोग उन इलाकों में नहीं जा पा रहे हैं, जहां वे पहले अपने याक, गाय और दूसरे पशुओं को चराने के लिए ले जाते थे. उनका कहना है कि उन जगहों पर चीन ने अपनी चौकियां और दूसरे ढांचे बना लिए हैं. यह चिंता सही है. लेकिन इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत ने लंबे समय तक इन इलाकों में सड़क और दूसरे बुनियादी ढांचे का निर्माण नहीं किया. दूसरी तरफ चीन ने वहां पहले सड़कें बनाईं और फिर अपनी चौकियां भी बना लीं.

रिजिजू ने कहा कि इसीलिए अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय लोगों की चिंता को गलत नहीं कहा जा सकता जिसमें वो कह रहे हैं कि जिन इलाकों में वे पहले मवेशी चराने के लिए जाते थे, अब वहां चीन की मौजूदगी के कारण वो नहीं जा पा रहे हैं.

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2014 के बाद से प्रदेश में बढ़ा विकास

रिजिजू ने स्थानीय लोगों की चराई से जुड़ी समस्या पर आगे कहा कि 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस इलाके में बुनियादी ढांचे के विकास को तेज करने पर जोर दिया है. मंत्री की ये बातें अरुणाचल प्रदेश को लेकर बनी संवेदनशीलता के बीच आई हैं. चीन इस राज्य को अपना इलाका बताता है और इसे 'जांगनान' कहता है. भारत ने हमेशा ही राज्य पर चीन के क्षेत्रीय दावों को खारिज किया है. 

उन्होंने कहा, “राज्य में चरागाहों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताएं सही हैं, लेकिन अरुणाचल प्रदेश में चीन का कोई नया कब्जा नहीं हुआ है.”

राहुल गांधी के भारतीय सेना के पेट्रोलिंग को रोके जाने के आरोपों पर रिजिजू ने कहा कि उनको इतिहास की पूरी जानकारी नहीं है. अरुणाचल से आने वाले रिजिजू ने इसके बाद प्रदेश का पूरा इतिहास बताया. उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश का पुराना नाम NEFA यानी नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी था. इसका तवांग सेक्टर 1951 में भारत के प्रशासनिक नियंत्रण में आया. 1951 से पहले वहां के लोग तिब्बत को टैक्स देते थे. 1959 में दलाई लामा तिब्बत छोड़कर भारत आए. उसी दौर में जब चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन-लाई भारत आए तो उन्होंने कई बार कहा कि NEFA यानी मैकमोहन लाइन के नीचे का इलाका भारत का हिस्सा है और भारत को इसे अपने पास रखना चाहिए. उस समय चीन ने अरुणाचल प्रदेश पर कोई दावा नहीं किया था.

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रिजिजू ने आगे कहा कि उस समय एक तरह से यह समझ बनी थी कि भारत अक्साई चिन पर अपना दावा न करे और चीन NEFA यानी अरुणाचल प्रदेश पर कोई दावा नहीं करेगा. 1914 में शिमला समझौते के दौरान मैकमोहन लाइन को सीमा के तौर पर तय किया गया था. हालांकि चीन ने उस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, लेकिन बाद में उसने NEFA को भारत का क्षेत्र मानने की बात कही. लेकिन जब भारत ने अक्साई चिन पर अपना दावा छोड़ने से इनकार किया तो धीरे-धीरे चीन ने पहले तवांग और फिर पूरे अरुणाचल प्रदेश पर दावा करना शुरू कर दिया.

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