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राहुल गांधी को बड़ी राहत, SC ने सावरकर पर विवादित कमेंट वाला केस खारिज कर दिया

Supreme Court ने Rahul Gandhi के खिलाफ चल रहे एक Criminal Case को रद्द कर दिया है. SC ने कहा कि केस के लिए UP सरकार से ‘मंजूरी’ न मिलने पर केस को रद्द किया जा रहा है.

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SC ने राहुल गांधी पर चल रहे क्रिमिनल केस को रद्द किया. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े क्रिमिनल केस को उत्तर प्रदेश सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण रद्द कर दिया है।
  • राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से कार्रवाई रद्द न होने पर सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को चुनौती दी थी, क्योंकि केस के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक थी।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केस रद्द हो गया है और अब इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया समाप्त हो गई है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में उन पर चल रहे क्रिमिनल केस को कोर्ट ने रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केस को चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की जरूरी मंजूरी (सैंक्शन) नहीं मिली थी. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत की ओर से जारी समन को भी रद्द कर दिया.   

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ट्रायल कोर्ट के समन को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज 

राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के उस समन आदेश को चैलेंज किया था, जिसके तहत उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-A और 505 के तहत केस के लिए बुलाया गया था. Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले राहुल इस केस को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे लेकिन कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई रद्द करने से मना कर दिया. इसके बाद राहुल गांधी ने इस केस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इसकी सुनवाई 14 अगस्त को हुई. 

केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर ने पूछा कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने मंजूरी (Sanction) दी है? इस सवाल का जवाब देते हुए सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल KM नटराज ने कहा कि ‘कोई मंजूरी नहीं दी गई थी.’

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Rahul Gandhi
राहुल गांधी.
राज्य सरकार की 'मंजूरी' जरूरी

दरअसल, Code of Criminal Procedure (CrPC) के तहत, IPC की धारा 153A के तहत मुकदमे के लिए राज्य सरकार की मंजूरी होनी चाहिए. 

राहुल गांधी के खिलाफ दलील दे रहे वकील ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि अगर मंजूरी नहीं है तो समन आदेश रद्द कर दिया जाए. साथ ही केस को मजिस्ट्रेट के पास फिर से विचार करने के लिए फॉरवर्ड कर दिया जाए. वकील ने आगे कहा कि अगर मंजूरी जरूरी है तो वो इस पर काम करेंगे. इस पर जस्टिस दीपांकर ने कहा,

अगर मंजूरी नहीं है तो मामला वहीं खत्म हो जाता है.

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सुप्रीम कोर्ट की दोहरी बेंच ने क्रिमिनल केस को रद्द करने का आदेश दिया और कहा,

UP सरकार की ओर से दायर किए गए हलफनामे में अपीलकर्ता-आरोपी पर केस चलाने के लिए मंजूरी दिए जाने का जिक्र नहीं है. इसलिए शिकायत और मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेश रद्द किए जाते हैं.

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ये मामला दिसंबर 2024 का है. राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सावरकर पर टिप्पणी की थी. राहुल ने कथित तौर पर सावरकर को ‘अंग्रेजों का नौकर और अंग्रेजों से पेंशन लेने वाला’ बताया था. इसी टिप्पणी के बाद वकील नृपेंद्र पाण्डेय ने राहुल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप लगाया गया कि राहुल ने समाज में नफरत फैलाने के इरादे से ‘सावरकर को अंग्रेजों का नौकर और पेंशन लेने वाली बात कही.’ 

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