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CBSE ने टेंडर देने से पहले ब्लैक लिस्ट का नियम बदला, इस कंपनी को पहुंचाया फायदा?

CBSE OSM Controversy: दावा है कि बोर्ड ने ब्लैकलिस्टिंग के क्लॉज को टेंडर से गायब कर दिया. यानी अगर कंपनी कोई गलती करती है तो उसे ब्लैकलिस्ट करने के लिए अब कोई नियम ही नहीं बचा. जबकि ये कंपनी पर कंट्रोल बनाए रखने के लिए ज़रूरी नियम था.

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CBSE ने टेंडर से पहले एक और नियम में बदलाव किया था. (फोटो-इंडिया टुडे)

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि CBSE में ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) का टेंडर देने के लिए कुछ नियमों में बदलाव कर दिया गया था. और ये बदलाव गुपचुप तरीके से किया गया था. लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं है. टेंडर देने से पहले एक और नियम बदला गया था. ये वो नियम था, जिसके तहत गलती करने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाता है. CBSE ने इसपर सफाई भी पेश की है. लेकिन सवाल वही है कि आखिर किसके इशारे पर इतना बड़ा बदलाव किया गया?  

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NDTV की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि बोर्ड ने ब्लैकलिस्टिंग के क्लॉज को टेंडर से गायब कर दिया है. यानी अगर कंपनी कोई गलती करती है तो उसे ब्लैकलिस्ट करने के लिए अब कोई नियम ही नहीं बचा. ब्लैकलिस्टिंग को एक सख्त नियम माना जाता है. जो कंपनी पर कंट्रोल रखने के लिए ज़रूरी है. लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने ब्लैकलिस्टिंग के नियम को दूसरे नियमों से बदल दिया, और वो भी टेंडर देने से कुछ दिन पहले.

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नियम बदलने पर CBSE की सफाई

बोर्ड ने ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) की ज़िम्मेदारी हैदराबाद की कंपनी कॉम्प्ट एडुटेक (coempt edutech) को दी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने वेंडर के ब्लैकलिस्टिंग वाला नियम 20 सितंबर 2025 को हटाया था. और कंपनी को टेंडर दिया करीब ढाई महीने बाद 05 दिसंबर 2025 को. ब्लैकलिस्टिंग की जगह आर्थिक दंड यानी फाइन के नियम बनाए गए. मतलब अगर वेंडर कोई गलती करेगा तो उसे सिर्फ फाइन भरना होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, CBSE ने माना है कि उन्होंने टेंडर में ब्लैकलिस्टिंग के रूल को लेकर बदलाव किए थे. लेकिन साथ में बोर्ड का ये भी कहना है कि ये बदलाव उन्होंने थर्ड पार्टी TCS के कहने पर किया था. अपनी सफाई में CBSE ने आगे कहा कि भले ही टेंडर से टेक्निकली ब्लैकलिस्टिंग का क्लॉज हटा दिया गया हो. लेकिन बोर्ड के पास अभी भी ये अधिकार है कि अगर परिस्थितियां ऐसी मांग करती हैं, तो वो किसी भी दोषी वेंडर को ब्लैकलिस्ट कर सकता है.

ये भी पढ़ें: OSM विवाद पर राहुल गांधी ने पूछे तीखे सवाल, कहा- ‘CBSE ने खास वेंडर के लिए बदले नियम’

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OSM विवाद क्या है?

OSM सिस्टम एक डिजिटल इवैल्यूएशन प्रोसेस है. इसमें कॉपी को स्कैन करके कंप्यूटर स्क्रीन पर चेक किया जाता है. कॉपी चेक करने वाले टीचर लैपटॉप या टैबलेट पर लॉगिन करके स्क्रीन पर ही आंसर देखते हैं और डिजिटल पेन या माउस से मार्क्स देते हैं. सिस्टम खुद ही मार्क्स जोड़ता है और इससे टोटलिंग एरर नहीं होता. इस प्रोसेस में पेन की ज़रूरत नहीं पड़ती. पूरा काम स्क्रीन पर होता है.

लेकिन, इस सिस्टम से CBSE के कई स्टूडेंट्स खुश नहीं हैं. स्टूडेंट्स का दावा है कि OSM कि वजह से उनके नंबर उम्मीद से कम आए हैं. कई स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें जो स्कैन शीट मिली, वह ब्लैंक थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इस इवैल्यूएशन प्रोसेस में कई टीचर्स ने भी समस्याओं की बात की है. विपक्ष भी इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है.

विपक्ष का आरोप है कि OSM को बोर्ड ने कमाई का ज़रिया बना लिया है, और कंपनी को बचाने के लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं. नेता विपक्ष राहुल गांधी लगातार इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. वो उन स्टूडेंट्स से मिल रहे हैं, जो इस OSM सिस्टम से खुश नहीं हैं. विपक्ष की मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें. इस विवाद को लेकर कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं. 

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