दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है. इस प्रदर्शन के दौरान एक नाम लगातार चर्चा में रहा है. यह नाम है उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के रहने वाले मोहम्मद जुनैद का, जो बीते एक महीने से प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था कर रहे हैं. उनके कई वीडियोज भी वायरल हैं. अब जुनैद ने आरोप लगाया है कि उनकी इस मदद की वजह से उनके परिवार को पुलिस एक्शन का सामना करना पड़ रहा है.
जंतर-मंतर पर छात्रों की मदद कर रहे जुनैद का दावा- 'पिता और रिश्तेदारों को उठा ले गई UP पुलिस'
Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों की मदद कर रहे Junaid का आरोप है कि पुलिस उनके परिवार को परेशान कर रही है. वहीं, गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि उन्होंने सिर्फ पूछताछ की थी. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की भी इस पर प्रतिक्रिया आई है.

जुनैद गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के तहत आने वाले गांव नाहल के निवासी हैं.
उनका आरोप है कि पुलिस ने उनके परिवार के लोगों की पासबुक और आधार कार्ड भी जब्त कर लिए हैं. जुनैद के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि अगर वह खुद थाने पहुंच जाएंगे तो परिवार के लोगों को छोड़ दिया जाएगा.
जुनैद ने बताया कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है. उन्होंने दावा किया कि उनका 'शून्य आपराधिक रिकॉर्ड' है और उनका एकमात्र काम प्रदर्शन में आए छात्रों की सेवा करना है. उनके मुताबिक, पुलिस उन्हें इसलिए निशाना बना रही है ताकि प्रोटेस्ट साइट पर चल रही सेवा व्यवस्था प्रभावित हो और छात्रों के बीच बन रहा हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कमजोर पड़े.
पुलिस ने क्या बताया?लल्लनटॉप ने गाजियाबाद के मसूरी सर्किल के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (ACP) सुनील कुमार से फोन पर बात की. ACP सुनील कुमार ने बताया,
“जुनैद के पिता या उनके किसी भी रिश्तेदार को पुलिस हिरासत में नहीं लिया गया था. उनसे पूछताछ की गई थी. पूछताछ के बाद वे चले गए.”
यह पूछने पर कि किस मामले को लेकर पूछताछ की गई? इस पर उन्होंने बताया कि ‘जुनैद के बारे में पूछताछ की गई.’ क्यों पूछताछ की गई? इसका उन्होंने कोई साफ जवाब नहीं दिया. उन्होंने और गाजियाबाद पुलिस मीडिया सेल से संपर्क करने के लिए कहा. खबर लिखे जाने तक वहां से भी पुलिस का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया.
CJP ने दी प्रतिक्रियाकॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने ‘X’ पर इस मुद्दे को उठाया और एक बयान जारी कर लिखा,
"उत्तर प्रदेश पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय हमारे वॉलंटियर मोहम्मद जुनैद को परेशान करने में अपना समय बर्बाद कर रही है, जो लोगों को खिला-पिला रहे हैं. अब वे (पुलिस) यूपी में उन्हें और उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं. हमारी टीम उनके संपर्क में है और हम उन्हें या उनके परिवार को कभी भी परेशान नहीं होने देंगे."
CJP ने कहा कि पुलिस की हर गैर-कानूनी कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी जाएगी.
पेशे से वकील हैं जुनैदजुनैद ने बताया कि वह पेशे से वकील हैं और ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम (JSE) की भी तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे 6 जून को CJP के पहले प्रदर्शन पर ही जंतर-मंतर आ गए थे. इसके बाद 20 जून का प्रोटेस्ट था, और उसी दिन जुनैद का एक सरकारी जॉब का एग्जाम था.
20 जून को एग्जाम देकर जब जुनैद जंतर-मंतर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि भीषण गर्मी में प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए पीने के पानी जैसी बुनियादी व्यवस्था भी नहीं थी. उसी दिन उन्होंने पानी का स्टॉल लगाने का फैसला किया.
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पानी से हुई शुरुआतमोहम्मद जुनैद के मुताबिक, शुरुआत केवल पानी से हुई थी. बाद में नमकीन, चाय और भोजन की व्यवस्था भी जुड़ती चली गई. पहले कुछ दोस्तों ने मिलकर खर्च उठाया, लेकिन धीरे-धीरे लोग खुद आगे आने लगे. अब कई लोग अपनी इच्छा से पानी, खाना और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचा रहे हैं और करीब 25-30 लोगों की टीम पूरे इंतजाम को संभाल रही है.
जुनैद ने बताया कि 20 जून से शुरू हुए इस आंदोलन के बाद से वह घर भी नहीं गए हैं. उनका कहना है कि वे लगातार प्रोटेस्ट साइट पर रहकर छात्रों की मदद कर रहे हैं. पुलिस कार्रवाई के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अगर किसी प्यासे को पानी पिलाना और भूखे को खाना खिलाना अपराध माना जाता है तो वह यह 'अपराध' बार-बार करेंगे.
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