‘मैं बीजेपी के लिए ज्यादा वोट जुटाने की कोशिश करूंगा.’ ये बयान ओडिशा के नए नामित राज्यपाल ब्रज मोहन राम का है. राज्यपाल पद के लिए उनके नाम का ऐलान होने के बाद उन्होंने कहा कि वो ओडिशा में बीजेपी के अनुसूचित जाति यानी SC मोर्चे को और सक्रिय करेंगे और पार्टी के लिए ज्यादा वोट जुटाने की कोशिश करेंगे. उनके इस बयान पर विवाद शुरू हो गया है. ओडिशा में विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल यानी बीजेडी और कांग्रेस ने उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.
'मैं BJP को ज्यादा वोट दिलाने की कोशिश करूंगा', राज्यपाल बनते ही बोले नेता, मचा बवाल
ओडिशा के नए राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने बयान दिया कि वो भाजपा के लिए ज्यादा वोट जुटाने की कोशिश करेंगे. इस बयान पर विवाद शुरू हो गया है. ओडिशा में विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल यानी बीजेडी और कांग्रेस ने उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. अब ब्रज मोहन राम की सफाई भी आई है.

12 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया था. वो झारखंड से बीजेपी के पूर्व सांसद हैं. नियुक्ति के अगले दिन, रांची में एक न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वो ओडिशा में बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चे को और सक्रिय करने के लिए काम करेंगे.
ब्रज मोहन राम ने बताया कि झारखंड में भी उन्होंने बीजेपी के दलित मोर्चे को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी. चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मिलने के बावजूद वो पार्टी संगठन के साथ जुड़े रहे और पार्टी के उम्मीदवारों की जीत के लिए काम करते रहे.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया भी अदा किया. ब्रज मोहन राम ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले उनके जैसे कार्यकर्ता को इतने बड़े पद पर मौका दिया गया. जब ये बयान लोगों ने सुना तो इसे लेकर सवाल उठने लगे.
पूर्व मुख्यमंत्री ने जताई आपत्तिराज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर वीडियो को शेयर किया और लिखा,
‘ओडिशा के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए ब्रज मोहन राम जी का हार्दिक स्वागत है. ओडिशा के लोग नए राज्यपाल के पार्टी के लिए काम करने के उत्साह को देख रहे हैं. उम्मीद है कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ उन्हें ओडिशा के लोगों की सेवा करने का उत्साह और ताकत देंगे, ताकि वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखते हुए अपनी जिम्मेदारियां निष्पक्षता से निभा सकें.”
उन्होंने इस ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति भवन को भी टैग किया.
वहीं, बीजेडी के राज्यसभा सांसद संतृप्त मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए लिखा कि, ‘राज्यपाल की प्राथमिकताएं उनके बयान से साफ हो गई हैं.’ उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी पार्टी के हित को प्राथमिकता देना लोकतंत्र की नई परिभाषा जैसा है. उन्होंने व्यंग्य करते हुए ये भी लिखा कि अगर ऐसे और राज्यपाल नियुक्त किए गए, तो इससे लोकतंत्र मजबूत ही होगा.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि ब्रज मोहन राम की बातों से ऐसा लगता है कि वो बीजेपी को ज्यादा वोट दिलाने और चुनाव में जीत दिलाने के लिए काम करना चाहते हैं.
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अब ब्रज मोहन ने सफाई भी दीइस पूरे विवाद पर बीजेपी की भी प्रतिक्रिया आई. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के प्रवक्ता मनोज महापात्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ब्रज मोहन राम अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझते हैं और विपक्ष को बेवजह विवाद नहीं खड़ा करना चाहिए.
वहीं, 15 अक्टूबर की सुबह अपने इस बयान पर खुद ब्रज मोहन राम की भी सफाई आई. उन्होंने कहा- ‘अब वह पार्टी की राजनीति से ऊपर हैं. हालांकि, जिस पार्टी से जुड़े रहे हैं, उसके प्रति उनका लगाव हमेशा रहेगा.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं किसी खास पार्टी के लिए काम नहीं करूंगा. हम सबके हैं, सब हमारे हैं.’
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