मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में 14 अक्टूबर को कोर्ट का फैसला आया. सेशन कोर्ट ने दोषी साहिल शुक्ला और मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई. फैसला सुनाते हुए जज ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधियों को दंड देना भी धर्म का काम है.
साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा देने वाले जज अरविंद मिश्रा-II के बारे में जानें
Blue Drum Murder Case में जिस जज ने फैसला दिया उनका 5 महीने पहले ही मेरठ ट्रांसफर हुआ था. वो 2003 में न्यायिक अधिकारी बने थे यानी उन्हें करीब 23 साल का अनुभव है.

सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान पर अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर उनकी हत्या का आरोप लगा था. हत्या के बाद दोनों ने सौरभ राजपूत के शरीर के कई टुकड़े कर उन्हें एक नीले ड्रम में भर दिया था. इसके बाद ड्रम को कंक्रीट से पूरी तरह सील कर दिया था. केस में फैसले आया तो लोगों में इसे सुनाने वाले जज अरविंद मिश्रा-II के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई. उनके अब तक के कार्यकाल पर एक नजर डालते हैं.
इंडिया टुडे से जुड़े उस्मान चौधरी के मुताबिक, अरविंद कुमार मिश्रा-II मऊ के रहनेवाले हैं. 5 महीने पहले ही उनका मेरठ ट्रांसफर हुआ था. वो 2003 में न्यायिक अधिकारी बने थे यानी उन्हें करीब 23 साल का अनुभव है.
मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II ने अपने करियर की शुरुआत सिविल जज के तौर पर की थी. इसके बाद वो अलग-अलग पदों पर काम करते हुए डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज बने. 21 मई, 2026 को उन्होंने मेरठ में ये जिम्मेदारी संभाली. इससे पहले वो मिर्जापुर में भी डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज थे.
2014 में कानपुर ट्रांसफरअरविंद कुमार मिश्रा-II का जन्म 2 जुलाई 1971 को हुआ था. उन्होंने 1990 में बीए, 1994 में LLB और 1996 में LLM की पढ़ाई पूरी की थी. 31 मई, 2003 को वो सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बने. इसके बाद गाजीपुर, सुल्तानपुर, अलीगढ़ और गोरखपुर समेत कई जिलों में काम किया. अलीगढ़ में वो सिविल जज, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और रेलवे से जुड़े न्यायिक पदों पर रहे. इसके बाद गोरखपुर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Chief Judicial Magistrate) और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर काम किया. अप्रैल 2014 में उनका ट्रांसफर कानपुर नगर हो गया. यहां वो अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने.
कानपुर नगर में उन्होंने फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी भी संभाली. अप्रैल 2018 से अगस्त 2020 तक वह उत्तर प्रदेश सरकार में प्रतिनियुक्ति पर रहे. इस दौरान उन्होंने विशेष सचिव और Additional Legal Adviser (Legislative) के तौर पर काम किया.
इसके बाद उन्होंने बस्ती और कानपुर नगर की फैमिली कोर्ट्स में प्रिंसिपल जज के तौर पर काम किया. मई 2023 में उन्हें लखनऊ के राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण (State Transport Appl. Tribunal Lucknow) का चेयरमैन बनाया गया.

नवंबर 2024 में अरविंद कुमार मिश्रा-II मिर्जापुर के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज बने. फिर 13 मई 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके ट्रांसफर का आदेश जारी किया. इसके बाद 21 मई 2026 को उन्होंने मेरठ में काम संभाल लिया. यानी सौरभ राजपूत हत्याकांड में फैसला आने से करीब पांच महीने पहले ही वह मेरठ आ गए थे.
मेरठ में उनके कार्यकाल के दौरान सौरभ राजपूत हत्याकांड काफी चर्चा में रहा. इस मामले में 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया गया था. इस हत्याकांड की चर्चा देशभर में हुई थी. दोनों को सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी. अब साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को मौत की सजा सुनाई गई है.
अपने करियर में अरविंद कुमार मिश्रा-II ने कई जिलों में जज के तौर पर काम किया. इसके अलावा वह फैमिली कोर्ट, उत्तर प्रदेश सरकार के लॉ डिपार्टमेंट और राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण में भी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. वो 31 जुलाई 2031 को रिटायर होंगे.
वीडियो: मेरठ मर्डर केस में मुस्कान के पड़ोसी ने शेयर किया वीडियो, नीले ड्रम को घसीटकर ले जाते दिखे पुलिसवाले










