The Lallantop

ट्रेन में बैठकर चला गया था, 21 साल बाद फेसबुक पर दिखा बेटा, मां बोली- 'ये तो शंकरवा है'

Facebook की मदद से बिहार का आदमी दशकों के बाद अपने परिवार से मिल पाया. लापता हुआ शख्स करीब 21 साल से अपने घर से लापता था. लेकिन एक Facebook पोस्ट की मदद से वो वापस अपने परिवार से मिल पाया.

Advertisement
post-main-image
करीब 21 साल बाद परिवार से मिले राम शंकर कुशवाहा. (Courtesy- DSP Santosh Patel)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • फेसबुक पर ग्वालियर के डीएसपी संतोष पटेल द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो से बिहार के मधुबनी जिले के लापता राम शंकर कुशवाहा को उनके परिवार से 21 साल बाद मिलवाया गया।
  • राम शंकर 2005 में एक साधु के साथ ट्रेन में अयोध्या जाने के दौरान भटक गए और बाद में ग्वालियर के आश्रम में रहने लगे, जबकि परिवार ने उनकी पुलिस में गायब होने की शिकायत दर्ज नहीं कराई।
  • वीडियो वायरल होने के बाद शंकर के परिवार ने संपर्क किया और 7 सितंबर को वे वापस अपने गांव महेशपुर में अपने परिवार के पास लौट आए, जहां उनका स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।

फेसबुक ने एक परिवार को उनके लापता बेटे से 21 साल बाद मिलवाने में मदद की है. वो बेटा जो करीब 2 दशक पहले किसी ट्रेन पर बैठकर अपने घर से तकरीबन एक हजार किलोमीटर दूसरे राज्य मध्य प्रदेश पहुंच गया था. ग्वालियर के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस संतोष पटेल के एक वीडियो ने बिछड़े लोगों को मिलवा दिया. शख्स का नाम राम शंकर कुशवाहा है. वो बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं, जो सालों पहले ‘लापता’ हो गए थे.

Advertisement

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शंकर को बचपन से ही ट्रेनों में सफर करना पसंद था. उनके गांव महेशपुरा से रेलवे स्टेशन महज 400 मीटर की दूरी पर है. अक्सर वो लोकल ट्रेनों में बैठकर सफर करते थे लेकिन 2-3 घंटे में लौटकर घर आ जाते थे. पर एक दिन ऐसा नहीं हुआ. गांव में विवाह पंचमी की पूजा थी. इस दिन लोग भगवान राम और माता सिता के विवाह का उत्सव मनाते हैं. महेशपुर गांव मधुबनी जिले में आता है. इस त्योहार पर पूरे देशभर से साधू-संत यहां आते हैं.

Advertisement
ट्रेन में चढ़कर हुए लापता

शंकर के पिता बताते हैं कि 6 सितंबर 2005 को इसी त्योहार का दिन था. उनका छोटा बेटा एक ट्रेन पर चढ़ा तो उसे घर लौटने में दशकों लग गए. घर वालों को कुछ नहीं पता कि उनका बेटा शंकर कहां गया? 21 साल बाद शंकर का एक वीडियो फेसबुक पर देख परिवार के लोग बोले, ‘अरे ये तो शंकरवा है.’

शंकर कैसे लापता हुए, पहले कहां गए? और मध्य प्रदेश कैसे पहुंचे? इन सबके बारे में उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है. उन्होंने कहा कि पूजा में आए एक साधू ने उन्हें अयोध्या चलने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने पूछा कि जाना कैसे है? साधू ने कहा ट्रेन से. फिर क्या था. शंकर के मन की बात बन गई. वो बिना कुछ लिए साधू के साथ ट्रेन में बैठे और अयोध्या के लिए निकल गए. उनका शुरुआती समय अयोध्या में गुजरा लेकिन वो मध्यप्रदेश कैसे पहुंचे, इसके बारे में उन्हें कुछ भी याद नहीं है.

हालांकि, परिवार और पुलिस का मानना है कि वो भटकने के बाद मध्य प्रदेश पहुंचे होंगे. क्योंकि, उन्हें ये समझ ही नहीं आ रहा था कि वो कहां हैं और उन्हें जाना कहां है? साल 2018 में ग्वालियर के आश्रम ‘स्वर्ग सदन’ को शंकर रेलवे स्टेशन के पास मिले. तब से अब तक वो उस आश्रम में ही रह रहे थे. इसी बीच ग्वालियर DSP संतोष पटेल आश्रम में दौरा करने गए थे. यहां शंकर की मुस्कान ने उनका ध्यान खींचा. 

Advertisement
DSP का वीडियो हुआ वायरल

DSP ने शंकर से बात की और उनके घर-परिवार के बारे में पूछा. शंकर ने अपने पिता और भाइयों का नाम बताया, लेकिन वो अपने गांव और शहर का नाम नहीं बता पा रहे थे. ये सारी बात DSP के कैमरे पर रिकॉर्ड हुई, जो उन्होंने फेसबुक पर डाला. यह वीडियो खूब वायरल हुआ और शंकर के भाई ललित के पास पहुंच गया. ललित, शंकर के बड़े भाई हैं. वो बताते हैं कि 4 सितंबर को उन्होंने यह वीडियो देखा. 

पोस्ट देखकर वो काफी भावुक हुए. ललित बताते हैं कि उन्होंने कांपते हुए हाथों से वीडियो में दिए हुए नंबर पर कॉल किया. बाद में तमाम प्रक्रियाओं के बाद 7 सितंबर को वापस अपने परिवार के पास लौटे. वो बताते हैं कि जब यह वीडियो उनकी मां ने देखा तो वो फौरन शंकर को पहचान गईं. मां ने कहा, ‘अरे ये तो मेरा बेटा शंकरवा है.’ 

शंकर के भाई ने आगे बताया कि उनके पता चलने के बाद मां लगातार शंकर का हालचाल जानने के लिए व्याकुल रहीं. पिता ने अखबार को बताया कि उनके तीन बेटे हैं. लेकिन शंकर के लापता होने के बाद से उन्होंने 2 के आगे गिनती बोलना ही छोड़ दिया था. शंकर के परिवार में लौटने से घर वालों के साथ-साथ पूरा गांव खुश है. लोग कह रहे हैं कि उन्होंने कभी भी ऐसी घरवापसी नहीं देखी है. 

शंकर ने भी अपने सफर के बारे में अखबार से बात की. उन्होंने बताया कि वो शुरुआती दिनों में उन्होंने कई रातें ग्वालियर रेलवे स्टेशन के आस-पास बिताई थीं. कई दिन-रात स्टेशन के प्लेटफॉर्म और खुले आसमान के नीचे सोने में गुजरे. इसके बाद आश्रम वालों की नजर उन पर पड़ी.

ढाबों पर काम किया

शंकर को भीख मांगना नहीं पसंद था. इसलिए वो यात्रियों और दुकानदारों से मिलने वाले खाने पर निर्भर थे. इसके अलावा सड़क के किनारे ढाबों पर छोटा-मोटा काम करके अपना दिन काटते थे. 

अब आपके मन में सवाल होगा कि पुलिस शंकर को क्यों नहीं खोज पाई? 

दरअसल, शंकर के परिवार ने कभी थाने में उनके लापता होने की औपचारिक शिकायत दर्ज ही नहीं कराई थी. इसलिए इस केस में पुलिस शामिल नहीं हो पाई. क्योंकि, शंकर के परिवार को लगता था कि एक दिन उनका बेटा किसी ट्रेन से वापस घर आ जाएगा.

यह भी पढ़ें: ‘मां, उन्होंने छाती पर मारा’, आखिरी कॉल के बाद होमस्टे में मिली गुवाहाटी की छात्रा की लाश

शंकर के घर लौटने पर परिवार के साथ-साथ गांव के लोगों ने भी उनका स्वागत किया. कम से कम 500 लोग उन्हें उनके घर तक छोड़ने गए. सालों बाद घर में त्यौहार जैसा माहौल बना. शंकर की मां ने बेटे के स्वागत के लिए मिथलांचल के विशेष पकवान बनाए. 

वीडियो: कश्मीर पर बोल रहे थे शहबाज शरीफ, भारत ने आईना दिखा दिया

Advertisement