2008 का मुंबई हमला याद है? उस समय आतंकियों को लगातार कराची में बैठा उनका हैंडलर इंस्ट्रक्शन दे रहा था. कैसे? जवाब है टीवी. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने खुद मुंबई अटैक के दौरान आतंकियों से लड़ रहे सुरक्षाबलों की लाइव रिपोर्टिंग की आलोचना की थी. अब आते हैं 2026 में. 18 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे मुंबई के जुहू में एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी हुई. हमलावर बाइक से भाग गए. फिर शुरू हुआ लुका-छिपी का खेल. इस खेल में हमलावरों को एक तरह से बढ़त हासिल थी. क्योंकि उन्हें न्यूज चैनलों की रिपोर्टिंग के जरिए लगातार पता चल रहा था कि पुलिस की जांच कहां तक पहुंची है.
‘चेहरे टीवी पर आए, निकलो,' टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के आरोपियों को पुलिस की हर हरकत पता चल रही थी
मुंबई पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के बाद आरोपियों को पुलिस के अपडेट भेजे जा रहे थे. हैंडलर्स उन्हें बता रहा थे कि पुलिस से कैसे बचना है. पुलिस अब ये पता लगाने में जुटी है कि अपडेट भेजने वाला व्यक्ति कौन था.

पुलिस के सूत्रों ने इंग्लिश अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब गोलीबारी के वीडियो से ली गई उनकी तस्वीरें टीवी पर दिखाई जाने लगीं, तो हमलावरों में से एक को एक मैसेज मिला. मैसेज में साफ निर्देश था,
तुम्हारे चेहरे आ गए हैं, वहां से निकल जाओ.
अखबार ने जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) अनिल कुंभारे से संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया. कुल मिलाकर देखें तो इस हमले में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए, लेकिन उनका ड्राइवर और एक व्लॉगर घायल हो गए.
तीनों हमलावरों, फूल सिंह, रेहान रहीसुद्दीन अंसारी और ऋतिक महतो (22) को अगले दिन राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें 31 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है. पुलिस ने अब तक कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा करने वाले अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली है.
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पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि हमलावरों तक टीवी न्यूज के अपडेट कौन पहुंचा रहा था. लेकिन जांच टीम को शक है कि आरोपी रेहान अंसारी को किसी कम्युनिकेशन ऐप के जरिए निर्देश देने वाला शख्स या तो लॉरेंस बिश्नोई गैंग का गुर्गा अनिल पंडित हो सकता है, या फिर सोनीपत में हाल ही में गिरफ्तार किए गए अंकित खटक और समीर खत्री हो सकते हैं.
पुलिस सूत्रों ने ये नहीं बताया कि किस मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया गया था. लेकिन, माना जाता है कि लॉरेंस गैंग ‘सिग्नल’ या 'ज़ंगी' (आर्मेनियन ऐप) का इस्तेमाल करता है. इसमें बातचीत करने वालों की पहचान छिपी रहती है.
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