राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद ट्रस्ट के महासचिव का पद छोड़ने वाले चंपत राय मानते हैं कि भगवान राम ही उन पर लगे आरोपों से उन्हें मुक्त करेंगे. इसी बीच वह चतुर्मास साधना पर बैठ गए हैं. चतुर्मास का मतलब ‘चार महीने’ होता है. यानी इस साधना के तहत वह चार महीने (नवंबर 2026) तक अयोध्या में ही रहेंगे. शहर से बाहर नहीं जाएंगे. बहुत कम लोगों से मिलेंगे और दिन का बड़ा हिस्सा मौन व्रत रखकर बिताएंगे. यही उनकी ‘चतुर्मास साधना’ होगी.
चंदा चोरी की जांच के बीच अयोध्या नहीं छोड़ेंगे चंपत राय, 4 महीने की 'साधना' शुरू कर दी
Ayodhya राम मंदिर के पूर्व महासचिव Champat Rai ने Chaturmas Spiritual Practice करने पर बैठ गए हैं. चंपत राय 21 नवंबर तक शहर से बाहर नहीं जाएंगे.

इधर अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले में अब भी जांच जारी है. स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (SIT) इस काम में लगी है. ये जांच शुरू होने के बाद कुछ समय बाद ही चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था. आज तक से जुड़े मयंक शुक्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद चंपत राय 7 जून से ही रामकोट में तीर्थक्षेत्र भवन में एकांतवास कर रहे हैं. अब शनिवार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी शुरू होने के साथ ही चंपत राय ने अपनी ‘चतुर्मास साधना’ शुरू की है.
इसके अनुसार, आने वाले 21 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के दिन तक वो अयोध्या शहर से बाहर कहीं नहीं जाएंगे. चूंकि, वो एकांतवास में हैं, तो उनका पूरा समय तप-जप और कुछ खास लोगों से मुलाकात में ही जा रहा है. चंदा चोरी मामले की जांच के बीच चंपत राय का यह अनुष्ठान लोगों मे चर्चा का विषय बना हुआ है. इससे पहले उन्होंने अयोध्या के 5 विधायकों से मुलाकात की थी. इस दौरान नेताओं ने उनका हाल-चाल जाना और मामले को लेकर भी बातचीत की.
विधायकों के अलावा अयोध्या के कारोबारियों का भी एक ग्रुप उनसे मिलने पहुंचा था. इसके अलावा कई साधु-संत भी उनसे मिले और सार्वजनिक तौर पर उनके समर्थन में आगे आए. उन्होंने चंपत राय को निर्दोष बताया. बता दें कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई. अब भी जांच की जा रही है. SIT ने एक अंतरिम रिपोर्ट सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी सौंप दिया था.
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अब आने वाले दिनों में SIT की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों की स्थिति साफ हो पाएगी.
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