इंडियन एयरफोर्स को पांचवें जेनरेशन के फाइटर जेट की जरूरत है. और इसी कड़ी में एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA को डेवलप किया जा रहा है. इस विमान को एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और DRDO मिलकर डेवलप कर रहे हैं. जानकार बताते हैं कि इस विमान को पूरी तरह ऑपरेशनल होने में 10 साल से भी ज़्यादा वक़्त लग सकता है.
सैटेलाइट तस्वीरों में पहली बार दिखा भारत का स्टेल्थ फाइटर AMCA; DRDO कर रही 'गायब' होने वाला टेस्ट
Dundigal में Air Force Academy के पास मौजूद ORANGE फैसिलिटी में मिलिट्री के कई प्लेटफॉर्म्स के रडार क्रॉस सेक्शन यानी RCS की जांच की जाती है. RCS जितना कम होगा, रडार पर विमान उतना ही छोटा दिखेगा. RCS जितना ज्यादा होगा, रडार उतनी आसानी से विमान को ढूंढ लेगा.


इसी बीच एक तस्वीर भी वायरल हो रही है. इसमें एक फाइटर जेट का ढांचा दिखाई दे रहा है, जो कुछ-कुछ उस मॉडल से मिलता है, जिसे एयरो इंडिया 2025 में डिस्प्ले पर रखा गया था. सैटेलाइट इमेज है तो कोई लोकेशन भी होगी ही. और वो लोकेशन है, हैदराबाद के दुंडीगल में मौजूद DRDO की ORANGE (Outdoor Radar Cross Section Analysis and Geometry Evaluation) फैसिलिटी. यानी DRDO की लैब. सूत्रों की मानें, तो खुले में इस एयरक्राफ्ट को इसलिए भी रखा गया है, ताकि इसका रेडियो बिहेवियर चेक किया जा सके. आसान भाषा में कहें तो चेक ये किया जा रहा है कि रडार वेव्स के सामने एयरक्राफ्ट का ढांचा कैसा रिस्पांस करता है. इसको बोलचाल की भाषा में कहा जाता है रडार क्रॉस सेक्शन यानी RCS. ये RCS जितना कम होगा, रडार पर विमान उतना ही छोटा दिखेगा. RCS जितना ज्यादा होगा, रडार उतनी आसानी से विमान को ढूंढ लेगा.

इसको ऐसे समझिए कि अमरीका के बनाए F-35 और रशियन Su-57 जैसे विमानों का RCS काफी कम है. रडार पर ये मुश्किल से नजर आते हैं. और आते भी हैं तो साइज इतना छोटा दिखता है जिससे ये पता करना मुश्किल होता है कि स्क्रीन पर दिख रही चीज सचमुच का फाइटर जेट है या नहीं.
दुंडीगल की ये ORANGE फैसिलिटी, एयरफोर्स अकादमी के बिल्कुल नजदीक है. दुंडीगल की फैसिलिटी, जहां AMCA दिखा है, वो इसलिए भी खास है क्योंकि ये भारत की सबसे एडवांस RCS Measurement फैसिलिटी है. यहां विमान को अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर टेस्ट कर ये देखा जाता है कि वो कितनी रडार तरगें सोख रहा है, और कितनी वापस भेज रहा है. टेस्ट के परिणामों के मुताबिक डिजाइन में बदलाव किए जाते हैं. सब टेस्ट्स के बाद आखिर में विमान उस लेवल पर पहुंचता है जहां रडार की तरंगों को वो पूरी तरह सोख लेता है या दूसरी दिशा में भेज देता है.
विमानों में RCS कम करने के लिए हथियारों को विमान के निचले हिस्से में रखा जाता है. इसे 'इंटर्नल वेपन बे' कहा जाता है. विमान के अगले हिस्से में कॉकपिट (पायलट के बैठने की जगह) के अगल-बगल लगे एयर इनलेट को भी अलग तरह से बनाया जाता है जिससे विमान का RCS कम होता है.

सूत्रों की मानें तो AMCA के नए डिजाइन में डाइवर्टरलेस सुपरसॉनिक इनलेट (DSI) तकनीक जोड़ी गई है. इस तकनीक को समझते हैं. जहाज़ के इंजन में हवा आने की जगह होती है. एयर इनटेक कहते हैं. पारंपरिक एयर इनटेक में खास प्लेट्स होती थीं, जिन्हें डाइवर्टर प्लेट्स कहते हैं. जो रडार पर दिखाई दे सकती थीं. नए डिज़ाइन में जो प्लेट्स लगाई गई हैं, उन्हें डाइवर्टरलेस बनाने की कोशिश की जा रही है. यानी रडार पर विज़िबिलिटी कम रखने के प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि सूत्रों का ये भी कहना है कि सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देने वाला एयरफ्रेम AMCA का फाइनल डिजाइन नहीं है.
अभी टेस्टिंग चल रही है, और टेस्टिंग के बाद फ़ाइनल डिज़ाइन बनकर सामने आएगा.अभी तक आपने पढ़ा-सुना कि ये पांचवे जनरेशन का जेट हो सकता है. लेकिन ये जेनरेशन क्या चीज़ है? आसान तरीके से समझिए.
फाइटर जेट्स के जेनेरेशन, उनकी डिजाइन, हवा में उनकी मजबूत उड़ान और उनकी अलग-अलग तरह के हथियार कैरी करने की क्षमता से डिसाइड होते हैं. जो जहाज इन मापदंडों पर जितना ऊपर, उतनी ऊंची उसकी जेनेरेशन. अमरीका, रशिया और चाइना के पास इस समय पांचवें जेनरेशन के जेट फाइटर हैं. F 22, F 35, Su 57, J 20 और J 35 इसी लिस्ट में आते हैं. और भारत जिस तेजस मार्क 1 को डेवलप कर रहा है, वो चौथे जेनेरेशन का फाइटर जेट है. और अभी खबर आ रही है 5th जेनरेशन जेट के डेवलपमेंट की.

चीन ने स्टेल्थ फाइटर बना कर उनकी तैनाती भी शुरू कर दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन अब न सिर्फ एयरफोर्स, बल्कि नेवी के अपने तीनों एयरक्राफ्ट कैरियर पर भी स्टेल्थ फाइटर जेट तैनात कर रहा है. और चीन-पाकिस्तान की डिफेंस पार्टनरशिप को देखते हुए ये अंदाज़ लगाए जा रहे हैं कि आगे आने वाले सालों में पाकिस्तान को भी चायनीज़ स्टेल्थ या फिफ्थ जेनरेशन जेट मिल सकते हैं.
ऐसे में ये और भी जरूरी हो जाता है कि भारत के बेड़े में ऐसे विमान हों जो चीन के J-35 जैसे उन्नत टेक्नोलॉजी वाले विमानों से टक्कर ले सकें. लेकिन अभी की स्थिति देखते हुए ऐसा लगता है कि AMCA को पूरी तरह एयरफोर्स को मिलने में अभी एक दशक लग सकता है.

जेट्स की कमी को देखते हुए बीते कुछ समय से सरकार इस प्रोग्राम में तेजी लाने की कोशिश भी कर रही है. यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय ने सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की जगह प्राइवेट कंसोर्टियम (बिजनेस ग्रुप्स) को AMCA प्रोजेक्ट में शामिल करने का फैसला किया है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक इसके लिए तीन कंसोर्टियमों को शॉर्टलिस्ट किया है. ये तीन कंसोर्टियम हैं-
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड
- लार्सन एंड ट्यूब्रो (L&T) + भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
- भारत फोर्ज + BEML
इस फाइटर जेट के मामले में सरकार बहुत सोच-समझकर आगे बढ़ रही है. चूंकि भारत को ये जेट अगले कुछ सालों में चाहिए और क्वालिटी से समझौता करने का सवाल ही नहीं है. ऐसे में सरकार ने बिडिंग यानी बोली जीतने वाली कंपनी के लिए कुछ शर्तें रखी हैं. जिस भी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट के लिए चुना जाएगा उसे सारी शर्तों को पूरा करना होगा. जैसे-
- चुनी गई कंपनी को विमान के ढांचे से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, इंजन से जुड़े सिस्टम, फ्यूल सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम तक सब तैयार करना होगा.
- कंपनी को टेस्टिंग के लिए जरूरी सुविधाएं और ग्राउंड सपोर्ट वाला इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना होगा.
- रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे प्रोग्राम के लिए सात साल का समय तय किया है.
- पहला प्रोटोटाइप, खरीद का आदेश मिलने के 30 महीने के भीतर उड़ान भरना चाहिए.
- 64 महीनों के अंदर सभी पांच प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार होने चाहिए.
- कंपनी को 84 महीनों के भीतर करीब 1800 टेस्ट उड़ानें पूरी करनी होंगी.
इस प्रोजेक्ट के लिए बोली जमा करने की आखिरी तारीख 27 जुलाई 2026 रखी गई है. इंडियन एयरफोर्स फिलहाल मिग-29, सुखोई Su-30MKI, रफाल, मिराज 2000, जगुआर और तेजस मार्क 1 जैसे जेट्स का इस्तेमाल कर रही है. इनमें कई विमान जैसे जगुआर पुराने हो चुके हैं. इसलिए जेट्स की कमी को जल्द से जल्द भरना एयरफोर्स की प्राथमिकता है.
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