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चाय के 20 रुपये लिए, खाते में लाखों रुपये फ्रीज हो गए, UPI ट्रांजैक्शन ने चायवाले को फंसा दिया

20 रुपये आखिरकार उनके अकाउंट में पहुंचे, इसलिए जांच एजेंसी ने बैंक से अकाउंट फ्रीज करने को कहा. नतीजतन, साइबर धोखाधड़ी के मामले में आरोपी या संदिग्ध न होने के बावजूद, वे अपने पूरे अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं.

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चायवाले सुल्तान ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. (PHOTO- Wikipedia)

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  • अहमदाबाद के मिर्जापुर इलाके में एक चाय स्टॉल मालिक सुल्तान अहमद शेख का बैंक अकाउंट 20 रुपये के एक डिजिटल पेमेंट के कारण फ्रीज कर दिया गया, जो एक साइबर फ्रॉड मामले की जांच के तहत हुआ था।
  • तेलंगाना पुलिस द्वारा साइबर धोखाधड़ी की जांच के कारण 20 रुपये के लेन-देन वाले खाते को फ्रीज करने का आदेश दिया गया, ताकि संदिग्ध धनराशि की जांच की जा सके, जबकि चाय विक्रेता इस मामले में प्रत्यक्ष आरोपी नहीं था।
  • सुल्तान ने अदालत का सहारा लिया और कोर्ट ने आदेश दिया कि केवल विवादित राशि फ्रीज होनी चाहिए, साथ ही राज्य सरकार को इस मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए कहा गया और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं।

अहमदाबाद के एक चाय स्टॉल मालिक ने एक कप चाय बेची. अब चाय बेची तो एक कप के पैसे यानी 20 रुपये भी लिए. लेकिन एक कप चाय के बदले किए गए 20 रुपये के डिजिटल पेमेंट की वजह से एक बवाल खड़ा हो गया. हुआ ये कि तेलंगाना पुलिस एक साइबर फ्रॉड के मामले की जांच कर रही थी. पैसों के लेन-देन की जांच के दौरान 20 रुपये का एक छोटा सा UPI ट्रांजैक्शन सामने आया. इसके बाद चाय विक्रेता का पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया गया. उनकी गलती इतनी थी कि जिसने उन्हें 20 रुपये भेजे, वो एक कथित फ्रॉड के पैसे थे. 

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20 रुपये के लिए अकाउंट फ्रीज

ये पूरा मामला गुजरात के अहमदाबाद स्थित मिर्जापुर इलाके का है. यहां रहने वाले सुल्तान अहमद शेख 'अल-सफर पान एंड टी कॉर्नर' चलाते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुल्तान का HDFC बैंक अकाउंट इसलिए फ्रीज कर दिया गया, क्योंकि 19 अप्रैल को एक ग्राहक ने उन्हें UPI से 20 रुपये ट्रांसफर किए थे. पता चला कि यह रकम उस ट्रांजैक्शन चेन का हिस्सा थी, जिसकी जांच तेलंगाना की साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस कर रही थी. 

अकाउंट फ्रीज होने के बाद सुल्तान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनकी याचिका के मुताबिक, 20 रुपये आखिरकार उनके अकाउंट में पहुंचे, इसलिए जांच एजेंसी ने बैंक से अकाउंट फ्रीज करने को कहा. नतीजतन, साइबर धोखाधड़ी के मामले में आरोपी या संदिग्ध न होने के बावजूद, वे अपने पूरे अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. अकाउंट फ्रीज होने की वजह पता चलने के बाद सुल्तान ने अकाउंट का एक्सेस बहाल करने के लिए कई बार बैंक अधिकारियों से संपर्क किया. हालांकि, बैंक ने अकाउंट को अनफ्रीज करने से इनकार कर दिया. बैंक का कहना था कि वो चल रही जांच के तहत तेलंगाना पुलिस के निर्देशों का पालन कर रहे थे.

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कोर्ट में क्या हुआ?

सुल्तान की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकीलों ने उनके बैंक रिकॉर्ड दिखाए. इससे यह साबित हुआ कि यह लेन-देन उनकी दुकान के लिए एक नियमित पेमेंट था. इसका कथित धोखाधड़ी से कोई संबंध नहीं था. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विवादित अमाउंट मात्र 20 रुपये थी, लेकिन खाते को फ्रीज करने से शेख को अपने पूरे बैंक बैलेंस तक पहुंच से वंचित कर दिया गया, जिससे उनको लेनदेन में दिक्कत हुई.

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इस खाते से उनकी ईएमआई का पेमेंट भी होता है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस निखिल करियल ने टिप्पणी की कि जब कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं होता है, तो अधिकारी आमतौर पर पूरे बैंक खाते को फ्रीज करने के बजाय केवल विवादित राशि को ही फ्रीज करते हैं. अदालत ने राज्य सरकार को इस मामले में निर्देश प्राप्त करने का निर्देश दिया और सुल्तान को राज्य गृह विभाग को दूसरी पार्टी के रूप में शामिल करने की अनुमति दी. अदालत ने उन्हें सरकारी वकील को याचिका की एक कॉपी देने का भी निर्देश दिया. 

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