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शरद पवार NDA में जाने का मन बना रहे! लेकिन बीजेपी ने ये शर्त रख दी

BJP का प्रस्ताव ये है कि अगर NCP के दोनों गुट फिर से एक हो जाते हैं, तो बाद में हर गुट को केंद्र में एक मंत्री पद देने पर विचार किया जा सकता है. जब से शिवसेना और NCP में फूट पड़ी है, उसके बाद से बीजेपी महाराष्ट्र में सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी है. वह अच्छी तरह जानती है कि NCP (SP) को एक अलग पार्टी के तौर पर गठबंधन में शामिल करने से उसके मौजूदा सहयोगियों के बीच अस्थिरता और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है.

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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है (PHOTO- India Today)

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  • शरद पवार के बीजेपी से संपर्क की चर्चाओं के बीच बीजेपी ने NCP के दोनों गुटों के विलय के बाद ही NDA में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत हर गुट को केंद्र में मंत्री पद दिए जा सकते हैं।
  • शिवसेना और NCP में फूट के कारण महाराष्ट्र में बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है और परिसीमन बिल के संदर्भ में NCP (SP) का नरम रुख बीजेपी को संसद में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचाने में मदद कर सकता है।
  • लोकसभा में सांसदों के गुटों के बदलाव और तृणमूल कांग्रेस के NDA समर्थन के बीच, अगले कदमों में NCP (SP) का NDA में औपचारिक समर्थन शामिल हो सकता है, जिससे परिसीमन बिल पास करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर कोई बड़ा बदलाव होने वाला है? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि शरद पवार के बीजेपी से संपर्क साधने की चर्चाएं तेज होती जा रही हैं. हालांकि, बीजेपी के अंदरखाने की चाहत कुछ और ही है. पार्टी चाहती है कि NCP (शरद पवार) को एक अलग पार्टी के तौर पर NDA में शामिल न किया जाए. अगर उन्हें गठबंधन में शामिल करना है तो उससे पहले ये पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली NCP (अजित पवार) के साथ विलय कर ले. 

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हर गुट से केंद्र में एक मंत्री

इंडिया टुडे के सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने एक प्रस्ताव भी रखा है. प्रस्ताव ये है कि अगर NCP के दोनों गुट फिर से एक हो जाते हैं तो बाद में हर गुट को केंद्र में एक मंत्री पद देने पर विचार किया जा सकता है. जब से शिवसेना और NCP में फूट पड़ी है, उसके बाद से बीजेपी महाराष्ट्र में सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी है. वह अच्छी तरह जानती है कि NCP (SP) को एक अलग पार्टी के तौर पर गठबंधन में शामिल करने से उसके मौजूदा सहयोगियों के बीच अस्थिरता और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है.

भाजपा को क्या फायदा होगा?

यह सब कुछ ऐसे समय में हुआ है जब NCP (SP) ने संकेत दिया है कि वह परिसीमन बिल पर नरम रुख अपना सकती है. यानी एक तरह से इससे भाजपा को फायदा हो सकता है. सरकार ने इस बिल को महिला आरक्षण कानून से भी जोड़ा है. इस संविधान संशोधन बिल का मकसद लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है. भाजपा को अगर ये बिल पास कराना है, तो उसे संसद में दो-तिहाई बहुमत चाहिए. BJP के लिए NDA में NCP (SP) के शामिल होने से वह संसद में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी जो संविधान संशोधन बिल पास करने के लिए जरूरी है. बहुमत ही वो वजह थी कि मोदी सरकार अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान परिसीमन बिल पास नहीं करा पाई थी.

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संसद का गणित भी चेंज हुआ है

संसद के गणित को देखें तो ये पहले से काफी बदल चुका है. तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) नाम के एक संगठन में शामिल हो गए हैं और उन्होंने BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन किया है. उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं. लोकसभा में NCP(SP) के पास 8 और राज्यसभा में 1 सीट है.

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हालांकि, NCP (SP) ने अभी तक NDA के समर्थन का कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है. बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा था कि अगर प्रस्तावित परिसीमन सभी राज्यों में सीटों में एक समान 50% बढ़ोतरी पर आधारित होता तो इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होता.

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