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'70 करोड़ के फर्जी सिक्के बाजार में आ गए', आपका भी 20 रुपये का सिक्का नकली तो नहीं?

पकड़े गए आरोपियों ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक बाजार में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के 20 रुपये के नकली सिक्के बाजार में चला दिए हैं. पूरा गैंग पकड़ा गया, कैसे बनाते थे सिक्के, फिर कितने रुपये में बेचते थे, सब पता लगा है.

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दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 20 रुपये के नकली सिक्के पकड़े. Courtesy: SPMCIL/Delhi Police)

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  • दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 1 नवंबर को नकली 20 रुपये के सिक्कों का एक बड़ा गैंग पकड़ा, जिसमें 5,000 नकली सिक्के बरामद किए गए और प्रमुख आरोपी पारस जैन को गिरफ्तार किया गया।
  • गैंग ने नकली सिक्के बनाने के लिए मशीनों और औजारों का इस्तेमाल किया, जिनकी फैक्ट्री हरियाणा से सहारनपुर स्थानांतरित की जा रही थी, जहां से पहले भी छापेमारी की जा चुकी थी।
  • पुलिस की जांच के तहत नकली सिक्कों का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला पाया गया है और 70 करोड़ रुपये से अधिक की नकली करेंसी बाजार में खपाने के दावे की सत्यता जाँची जा रही है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में सप्लाई करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है. 1 नवंबर को पुलिस ने करीब 1 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले नकली सिक्के बरामद किए हैं. ये सिक्के दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास एक टोयोटा इटियॉस कार से पकड़े गए. कार की पिछली सीट से 50 पॉलीथिन पैकेट मिले. हर पैकेट में 100 नकली 20 रुपये के सिक्के रखे गए थे. इस तरह कुल 5,000 नकली सिक्के बरामद हुए, जिनकी फेस वैल्यू करीब 1 लाख रुपये थी. पुलिस ने सिक्कों की सप्लाई करने के आरोपी पारस जैन को मौके से गिरफ्तार किया.

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आजतक से जुड़े अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की WR-I टीम ने इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया.

पुलिस के मुताबिक, गैंग 1 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले नकली सिक्कों को करीब 70 हजार रुपये में सप्लाई कर रहा था. जांच में सामने आया कि सिक्के बनाने वाली यूनिट पहले हरियाणा के सोनीपत में थी, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शिफ्ट किया जा रहा था.

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13 सितंबर को यूनिट सहारनपुर में शिफ्ट किए जाने के दौरान सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाने का रैकेट पकड़ा था. मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी.

70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के खपाने का दावा

पुलिस के मुताबिक, नकली सिक्कों का नेटवर्क हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक फैला है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अभिनंदन ने कहा,

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"आरोपियों ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक बाजार में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के सर्कुलेट किए हैं."

70 करोड़ रुपये बनाने के लिए 20 रुपये के 3.50 लाख सिक्के लगते हैं. फिलहाल, पुलिस 70 करोड़ रुपये की कीमत के नकली सिक्कों को खपाने के दावे की सच्चाई को वेरिफाई कर रही है. SSP अभिनंदन ने कहा कि नकली सिक्कों की फिनिशिंग इतनी अच्छी होती थी कि असली-नकली सिक्के के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता था.

लेकिन, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर 20 रुपये के ये नकली सिक्के तैयार कैसे किए जाते थे और फिर इन्हें बाजार में असली सिक्कों की तरह चलाया कैसे जाता था?

कैसे बनाए 20 रुपये के नकली सिक्के?

पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह ने नकली सिक्के तैयार करने के लिए बाकायदा मशीनों और दूसरे औजारों का इस्तेमाल किया था. नकली सिक्के बनाने की यूनिट हरियाणा के सोनीपत में चल रही थी.

आरोप है कि कंफ्यूज करने के लिए यूनिट को पेचकस की फैक्ट्री बताया गया, जबकि यहां नकली सिक्के बनाए जा रहे थे. पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया, तो बाकी आरोपी डर गए. उन्होंने वहां काम बंद कर दिया और मशीनों को सहारनपुर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी.

सहारनपुर में पुलिस की कार्रवाई के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और मशीनों के बारे में जानकारी सामने आई. आरोपियों के कब्जे से भारी मशीनें, लोहे के डाई और सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले दूसरे टूल्स बरामद किए गए थे.

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्होंने सबसे पहले दिल्ली की एक यूनिट से एल्युमिनियम, कॉपर और निकल के मिक्सचर से बनी सिक्के के साइज की रिंग खरीदीं. फिर, दिल्ली की एक दूसरी यूनिट से खास तौर पर 20 रुपये के सिक्कों की नकल करने वाली डाई मंगवाईं.

इन रिंग पर मशीनों की मदद से सिक्कों की छाप तैयार की जाती थी. इसके बाद उनकी फिनिशिंग की जाती थी, ताकि सिक्के देखने में असली जैसे लगें. पुलिस ने अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान ऐसी डाई, पॉलिशिंग मशीन और कई दूसरे औजार भी बरामद किए थे.

डेली 10 से 12 हजार नकली सिक्के बनते थे

सहारनपुर पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया था कि उनकी यूनिट एक दिन में 10 हजार से 12 हजार नकली सिक्के तैयार कर सकती थी. आरोपियों के मुताबिक, एक सिक्का बनाने में करीब 5 से 6 रुपये खर्च होते थे. पुलिस आरोपियों के इन दावों को कंफर्म नहीं कर सकी, क्योंकि सहारनपुर में मशीनें बरामद होने के समय चालू हालत में नहीं थीं.

पुलिस के मुताबिक, गैंग में हर मेंबर का काम अलग-अलग था. उपकार लूथरा सिक्कों की फिनिशिंग देखता था. संतोष चौरसिया मैन्युफैक्चरिंग का काम संभालता था, जबकि अनुराग पाल फैक्ट्री चलाने की जिम्मेदारी देखता था. कुलदीप और हिमांशु पर सिक्कों को बाजार में खपाने की जिम्मेदारी थी.

कैसे होती थी नकली सिक्कों की सप्लाई?

नकली सिक्के तैयार होने के बाद उन्हें 100-100 के पैकेट में बांटा जाता था. इसके बाद गिरोह के सदस्य इन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाते थे. पुलिस के मुताबिक, गिरोह 200 रुपये की कीमत वाले नकली सिक्कों का पैकेट करीब 160 रुपये में देता था. यानी सिक्कों की असल फेस वैल्यू से कम कीमत पर इन्हें बाजार में उतारा जाता था.

इसके बाद इन सिक्कों को आगे सप्लाई करने के लिए नौजवानों का इस्तेमाल किया जाता था. आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसे लोगों को सिक्के दिए, जिन्हें ये नहीं बताया जाता था कि सिक्के नकली हैं. उन्हें ये कहकर सिक्के दिए जाते थे कि सिक्के बड़ी संख्या में हैं, जिन्हें मार्केट में चलाना मुश्किल हो रहा है. इसलिए, मजबूरी में कम दाम में ज्यादा कीमत के सिक्के देने पड़ रहे हैं.

इन सिक्कों को टोल प्लाजा, छोटे शहरों, शराब की दुकानों और गांवों की छोटी दुकानों पर चलाने की कोशिश की जाती थी. इस तरह गिरोह एक जगह से दूसरी जगह तक सिक्कों की सप्लाई करता था.

जेल में मुलाकात, फिर खड़ा किया नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, उपकार लूथरा पहले भी नकली सिक्के बनाने के मामले में गिरफ्तार हो चुका था. उसने पहले सुनार का काम किया था और इसी दौरान हासिल किए गए एक्सपीरियंस का इस्तेमाल नकली सिक्के तैयार करने में किया.

पुलिस के मुताबिक, उपकार की मुलाकात तिहाड़ जेल में हिमांशु से हुई थी. बाद में दोनों ने मिलकर ये नेटवर्क खड़ा किया. गिरोह के दूसरे सदस्य भी अलग-अलग जेलों में मुलाकात के बाद इस नेटवर्क से जुड़ते गए.

पहले भी पकड़ी जा चुकी नकली सिक्के की यूनिट

दिल्ली और हरियाणा में नकली सिक्के बनाने का ये पहला मामला नहीं है. अक्टूबर 2016 में दिल्ली पुलिस ने 10 दिनों के अंदर दिल्ली और हरियाणा में नकली सिक्के बनाने वाली तीन यूनिट का पर्दाफाश किया था. उस दौरान 12.24 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले नकली सिक्के बरामद हुए थे. इस मामले में उपकार लूथरा और उसका भाई स्वीकार लूथरा आरोपी थे.

(यह भी पढ़ें: प्लास्टिक के नोट नकली करेंसी की समस्या खत्म कर देंगे?)

इसके बाद मई 2019 में हरियाणा में फरीदाबाद क्राइम ब्रांच ने जिले के बहादुरगढ़ के गणपति धाम इंडस्ट्रियल एरिया में नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी थी. वहां थर्मोकोल की प्लेट बनाने के नाम पर फैक्ट्री किराये पर ली गई थी. पुलिस ने पहले एक गाड़ी से 50 हजार नकली 5 रुपये के सिक्के बरामद किए. इसके बाद फैक्ट्री पर छापेमारी कर 50 हजार और सिक्के जब्त किए गए.

बिहार तक पहुंची जांच, एक आरोपी गिरफ्तार

सहारनपुर पुलिस ने इस नेटवर्क की जांच के दौरान बिहार के मधुबनी में भी छापेमारी की थी. बिहार पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में 55 साल के मिथिलेश चौरसिया उर्फ जनार्दन को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, वो गिरोह के लिए कच्चा माल और मजदूरों का इंतजाम करता था. मिथिलेश पहले गिरफ्तार किए गए संतोष चौरसिया का भाई है. इस गिरफ्तारी के बाद सहारनपुर के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या छह हो गई थी. वहीं, दिल्ली पुलिस ने अलग से पारस जैन को गिरफ्तार किया.

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