अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा है. साथ ही याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत की सहायता करने की अनुमति दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चंदा चोरी का केस बंद किया, CJI सूर्यकांत की बेंच ने वजह बताई
Supreme Court Ram Mandir theft: अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा है. साथ ही याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत की सहायता करने की इजाजत दी है.

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी. साथ ही ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का व्यापक ऑडिट कराने की भी मांग थी.
याचिकाओं का निपटारा करते हुए क्या कहा?Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 नवंबर को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की. उन्होंने अपने आदेश में कहा,
"यूपी राज्य ने एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है. इसके मुताबिक, मामले में अब चार्जशीट दायर कर दी गई है. इसे देखते हुए, हम इस रिट याचिका और इससे जुड़े अन्य मामलों का निपटारा करते हैं. साथ ही संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश देते हैं कि वे कानून के अनुसार मामले में आगे की कार्रवाई करें.
बेंच ने आगे कहा,
"इस मामले में जनहित का पहलू शामिल है. इसलिए याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी जाती है कि वे न्यायिक मजिस्ट्रेट की सहायता कर सकते हैं. ठीक उसी तरह, जैसे कानून किसी अपराध के पीड़ित को अदालत की मदद करने का अधिकार देता है. यह साफ किया जाता है कि इस अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है. ताकि किसी भी पक्ष पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े."
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे. उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में यूपी पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गहराई से छानबीन कर रही है. मंदिर में श्रद्धालुओं के किए गए दान और नकदी की गिनती के समय कथित तौर पर चोरी और हेराफेरी की जा रही थी.
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र बीजेपी प्रमुख ने दीया मिर्जा को 'बाहरी' कहा, BMC ने दिवाली वाला पोस्ट डिलीट ही कर दिया
मामले की जांच में क्या पता लगा था?पुलिस और जांच एजेंसियों ने आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों की वित्तीय ट्रेकिंग की है. जांच में सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों ने भारी मात्रा में संपत्ति खरीदी. मेहता ने बेंच से कहा,
"गिनती के समय चोरी की गई थी, जो लोग गिनती कर रहे थे, वे ही चोरी कर रहे थे. हमने उनके बैंक खातों और संपत्ति की खरीद का पता लगाया है. ऑडिट भी किया गया है."
अदालत को बताया गया कि एक मामले में कर्मचारी ने 50 लाख रुपये की संपत्ति की खरीद की. उसमें केवल 15 लाख रुपये बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए दिखाए गए. बाकी रकम का भुगतान कथित तौर पर हेराफेरी से मिले कैश के जरिए किया गया. इसके बाद CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया.
वीडियो: मनीषा भानवाला ने पूरा किया पिता का सपना, 16 साल के इंतजार के बाद बनीं वर्ल्ड चैंपियन









