कुछ लोगों को सर्दियां बहुत पसंद होती हैं. वहीं, कुछ के लिए ये मौसम काटना मुश्किल हो जाता है. ख़ासकर जिन्हें अस्थमा या सांस से जुड़ी कोई परेशानी है. क्योंकि, इस मौसम में अस्थमा और बाकी सांस से जुड़ी दिक्कतें बढ़ जाती हैं. अस्थमा अटैक पड़ते हैं. खांसी आती है. बलगम निकलता है. द ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2022 के मुताबिक, भारत में करीब साढ़े 3 करोड़ लोगों को अस्थमा है.
बार-बार अस्थमा अटैक पड़ रहे? जानिए, सर्दियों में इससे बचने के लिए क्या करें?
घर में पल्स ऑक्सीमीटर होना चाहिए. पल्स ऑक्सीमीटर में पल्स नापने पर अगर ऑक्सीजन लेवल कम है. बीपी कम या ज़्यादा है और पल्स ज़्यादा है, तो ये गंभीर अस्थमा के लक्षण हैं.


इसलिए, डॉक्टर से समझेंगे कि अस्थमा क्या होता है. सर्दियों में अस्थमा क्यों बढ़ जाता है. किन लक्षणों को देखकर डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है. और, इससे बचने का तरीका और इलाज क्या है.
अस्थमा क्या होता है?
ये हमें बताया डॉक्टर नितिन राठी ने.

अस्थमा सांस की नलियों में होने वाली एलर्जी है. प्रदूषण, स्मोकिंग, पराग के कण, धूल या मिट्टी के संपर्क में आने से सांस की नलियों में सूजन आ जाती है. नतीजा? सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और उसमें बलगम फंसने लगता है. इसकी वजह से खांसी आती है. काला, पीला, नीला बलगम आता है. सांस फूलने लगती है. आंखों से पानी आने लगता है. दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं. अगर ये लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.
डॉक्टर कुछ टेस्ट करेंगे. जैसे चेस्ट एक्स-रे, PFT और CBC ESR. PFT से पता चलेगा, सांस की नलियों में कितनी सूजन है और किस तरह का इलाज होना चाहिए. टैबलेट देनी चाहिए, इन्हेलर देना चाहिए या नेबुलाइजर देना चाहिए. अगर अस्थमा के लक्षण महसूस होते हैं तो डॉक्टर से मिलकर इलाज लें.

सर्दियों में अस्थमा क्यों बढ़ जाता है?
सर्दियों के मौसम में तापमान कम हो जाता है. तापमान कम होने से हवा घनी हो जाती है. वातावरण में हवा नहीं चलती है. इस वजह से धूल, प्रदूषण, स्मोक, पराग के कण हवा में बढ़ जाते हैं. यानी AQI बढ़ जाता है. अगर ये चीज़ें ज़्यादा मात्रा में सांस के ज़रिए शरीर के अंदर जाएंगी, तो एलर्जी होने के कारण लक्षण गंभीर हो जाएंगे. इस मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो जाता है. एक्टिविटी और एक्सरसाइज़ भी कम होती है. इस कारण अस्थमा सर्दियों में गंभीर हो जाता है. इसलिए अस्थमा के लक्षणों पर ध्यान दें, इन्हें नज़रअंदाज़ न करें.
किन लक्षणों पर ध्यान देना ज़रूरी?
अगर रोज़ के काम करने में ज़्यादा मेहनत लगने लगे, तो सतर्क हो जाइए. खांसी, बुखार, पीला बलगम आ रहा है, तो समझ जाइए कि अस्थमा का अटैक पड़ रहा है. घर में पल्स ऑक्सीमीटर होना चाहिए. पल्स ऑक्सीमीटर में पल्स नापने पर अगर ऑक्सीजन कम आ रहा है. बीपी कम या ज़्यादा आ रहा है, पल्स ज़्यादा है तो ये गंभीर अस्थमा के लक्षण हैं. ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर की दी हुई इमरजेंसी दवा लें. नेबुलाइज़र लें. अगर 15-20 मिनट बाद भी आराम नहीं मिलता है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. टेस्ट और इलाज करवाएं.

बचाव और इलाज
आउटडोर एक्टिविटी कम से कम करें. अगर बाहर जा रहे हैं तो N95 मास्क पहनें, जिसकी फिटिंग टाइट हो. घर में धूपबत्ती, अगरबत्ती न जलाएं. आग सेंकने के लिए कोयला, लकड़ी न जलाएं. घर में झाड़ू के बजाय वैक्यूम क्लीनर इस्तेमाल करें. घर के अंदर एक्सरसाइज़ करें. प्राणायाम और अनुलोम-विलोम करें. हेल्दी डाइट लीजिए. खूब पानी पीजिए. अस्थमा के मरीज़ों को अपनी दवाएं लेनी चाहिए. ये मालूम होना चाहिए कि कौन-सी दवा रोज़ लेनी है और कौन-सी इमरजेंसी में.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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