सर्दियों में फ्लू तेजी से फैलता है. हो भी यही रहा है. ख़ासतौर पर H3N2. हर घर में कोई न कोई बीमार है. खांसी-बुखार-ज़ुकाम और गले में खराश से परेशान है. लेकिन क्या सर्दी, खांसी, ज़ुकाम यानी फ्लू हो गया? ऐसा नहीं है. हर सर्दी-ज़ुकाम फ्लू नहीं होता. ये दो अलग-अलग चीज़ें हैं. आम सर्दी-ज़ुकाम को Common Cold कहते हैं. ये फ्लू से अलग है. फ्लू के लक्षण ज़्यादा गंभीर होते हैं.
खांसी-बुखार-ज़ुकाम और गले में खराश है तो फ्लू हो गया? आज बड़ी गलतफहमी दूर होगी
हर सर्दी-ज़ुकाम फ्लू नहीं होता. ये दो अलग-अलग चीज़ें हैं. आम सर्दी-ज़ुकाम को Common Cold कहते हैं. ये फ्लू से अलग है. फ्लू के लक्षण ज़्यादा गंभीर होते हैं.


चलिए, डॉक्टर से समझते हैं कि फ्लू क्या होता है, फ्लू और सर्दी-ज़ुकाम यानी कॉमन कोल्ड में क्या फ़र्क है, सर्दियों के मौसम में फ्लू क्यों बढ़ जाता है, इससे बचाव और इसका इलाज कैसे करें.
फ्लू क्या होता है?
ये हमें बताया डॉक्टर शुभम शर्मा ने.

फ्लू इन्फ्लुएंज़ा वायरस से होता है, ठीक वैसे ही जैसे कोरोना वायरस से कोविड-19 होता है. हर मौसमी बुखार फ्लू नहीं होता. जो इन्फेक्शन इन्फ्लुएंज़ा वायरस से होता है, उसे ही फ्लू कहते हैं.
फ्लू और सर्दी-ज़ुकाम में फ़र्क
फ्लू और सर्दी-ज़ुकाम के कुछ लक्षण मिलते-जुलते हैं. जैसे ज़ुकाम, गला ख़राब होना और बुखार आना. लेकिन फ्लू में शरीर में बहुत दर्द भी होता है. कमज़ोरी होती है और तेज़ बुखार आता है. बहुत ज़्यादा खांसी आना और सांस फूलना भी फ्लू के लक्षण हैं. जिन लोगों को अस्थमा, COPD, ILD जैसी फेफड़ों की बीमारियां हैं. उनमें फ्लू के लक्षण गंभीर हो सकते हैं. कमज़ोर इम्यूनिटी वालों, बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों, डायबिटिक और बीपी के मरीज़ों में भी फ्लू गंभीर हो सकता है. ऑक्सीजन की भी ज़रूरत पड़ सकती है. इसलिए ऐसे लोगों को ज़्यादा सावधानियां बरतनी चाहिए.

सर्दियों में फ्लू क्यों बढ़ जाता है?
ऐसा होने के पीछे 2-3 कारण हैं. इस मौसम में हवा ठंडी होती है. ठंडी हवा में वायरस ज़्यादा पनपते हैं और जल्दी खत्म नहीं होते. इसलिए इन्फेक्शन होने का रिस्क बढ़ जाता है.
सर्दियों में लोग घरों के अंदर ज़्यादा रहते हैं. ठंड की वजह से खिड़की-दरवाज़े बंद रखते हैं. इससे वेंटिलेशन नहीं होता. ऐसे में अगर परिवार में किसी एक को फ्लू हो जाए, तो वो आसानी से दूसरों में भी फैल सकता है.
बचाव और इलाज
अगर केवल सर्दी-ज़ुकाम है, तो मरीज़ को पोषण का ध्यान रखना चाहिए. पर्याप्त पानी पीना चाहिए. डॉक्टर की दी हुई ज़ुकाम-बुखार की दवा खानी चाहिए. लेकिन अगर तेज़ बुखार है, ज़्यादा खांसी आ रही है, सांस फूल रही है तो डॉक्टर को दिखाएं. हो सकता है आप में इन्फ्लुएंज़ा वायरस ज़्यादा गंभीर असर कर रहा हो, जैसा कोविड-19 में भी हुआ. तब कुछ लोगों में लक्षण हल्के-फुल्के थे, लेकिन कुछ को ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही थी. उनके फेफड़े ख़राब हो रहे थे और वेंटिलेटर की ज़रूरत भी पड़ रही थी.

वैसे ही इन्फ्लुएंज़ा वायरस की वजह से भी कुछ लोगों में गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है. यहां तक कि शरीर में ऑक्सीज़न का लेवल कम होने लगता है. इसलिए अगर सर्दी-ज़ुकाम शुरू हुआ है और लक्षण बढ़ते ही जा रहे हैं, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाना चाहिए. हो सकता है, इन्फ्लुएंज़ा वायरस ने फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया हो.
अगर आपको लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो परिवारवालों से दूरी बना लें. मास्क पहनें. पहले 5 दिन इन्फेक्शन एक्टिव रहता है. इसलिए अगर घर में ऐसे लोग हैं, जिन्हें शुगर, हाई बीपी, अस्थमा या किडनी की बीमारी है तो ख़ास ख्याल रखें. अगर लक्षण बढ़ते हैं तो डॉक्टर को दिखाएं.
फ्लू के लिए एंटी-वायरल कैप्सूल उपलब्ध हैं. अगर लक्षण आने के 48 घंटों के अंदर दवा शुरू कर दी जाए, तो काफ़ी फ़ायदा होता है. ज़्यादा बीमार होने से बच जाते हैं. इसके अलावा, खान-पान ठीक रखें. विटामिन C से भरपूर चीज़ें खाएं. पर्याप्त पानी पिएं. एक्सरसाइज़ करें. फ्लू के लक्षण हैं तो मास्क पहनें. हाथ धोएं. जैसे कोविड में बचाव करते थे, ठीक वैसी ही कुछ सावधानियां सर्दियों में भी बरतनी चाहिए.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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