आप रात में सोए. फिर जब सुबह उठे, तो मुंह पर लार लगी थी. तकिया भी लार से गीला हो चुका है. कभी-कभार सोते समय मुंह से लार टपकना आमतौर पर सीरियस नहीं माना जाता. पर अगर ये रोज़ होने लगे. हर सुबह आपको तकिए पर लार के निशान मिलें. तब इसकी वजह पता करना ज़रूरी है.
सोते समय लार निकलती है? डॉक्टर से जानिए कब ये बड़ी चिंता की बात है
आज डॉक्टर से समझेंगे कि सोते हुए मुंह से लार क्यों निकलती है. कब ये नॉर्मल है और कब चिंता की बात. किन कंडीशंस में सोते समय मुंह से ज़्यादा लार निकल सकती है. और लार टपकने की समस्या कम करने के लिए क्या करें.

यही हम आपको बताएंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि सोते हुए मुंह से लार क्यों निकलती है. कब ये नॉर्मल है और कब चिंता की बात. किन कंडीशंस में सोते समय मुंह से ज़्यादा लार निकल सकती है. और लार टपकने की समस्या कम करने के लिए क्या करें.
सोते हुए मुंह से लार क्यों निकलती है?ये हमें बताया डॉक्टर प्रवीण गुप्ता ने.

सोते समय हमारी निगलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इस वजह से हम मुंह में बनने वाली लार को ठीक से नहीं निगल पाते. अगर मुंह में लार ज़्यादा बनती है या मुंह खोलकर सोते हैं. चेहरे की मांसपेशियों में कमज़ोरी आ गई है या फिर एक ही तरफ करवट लेकर सोते हैं. तब सोते समय मुंह से लार निकल सकती है.
अगर बार-बार और ज़्यादा लार निकलती है, तो इसकी वजह जानना ज़रूरी है. लेकिन अगर ऐसा कभी-कभी ही होता है और आपको कोई न्यूरोलॉजिकल समस्या नहीं है. तब आमतौर पर घबराने की ज़रूरत नहीं होती.
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अगर आपकी नाक अक्सर बंद रहती है. तब ज़ुकाम या साइनोसाइटिस होने पर मुंह से सांस लेने की वजह से लार बाहर निकल सकती है. अगर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया यानी सोते समय सांस अटकने की समस्या है. मुंह खोलकर सोते हैं या बहुत ज़्यादा खर्राटे लेते हैं. चेहरे की मांसपेशियों में कमज़ोरी है. पार्किंसंस डिज़ीज़ या इससे जुड़ी कोई बीमारी है. जिसमें आप लार को ठीक से गटक नहीं पाते, तब लार मुंह में जमा होती रहती है और सोते समय बाहर निकल सकती है.
सोते समय लार टपकने की समस्या कम करने के लिए क्या करें?सोते समय बार-बार लार निकलने की वजह जानने के लिए जांच करवाना ज़रूरी है. सबसे पहले अपनी नाक की जांच करवाएं. अगर नाक लगातार बंद रहती है, तो उसका इलाज करवाएं. इसके लिए डॉक्टर की सलाह से एंटीहिस्टामिन दवाएं ले सकते हैं. भाप लेना भी कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है. ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया हो, तो सी-पैप मशीन लगाकर सो सकते हैं. इससे सोते समय सांस लेने में मदद मिलती है और खर्राटे भी कम हो सकते हैं.
मुंह खोलकर सोते हैं या रात में दांत पीसते हैं, तो डेंटिस्ट से मिलें. बच्चों में एडिनॉइड्स बढ़ने से नाक बंद हो सकती है, जिससे वो मुंह खोलकर सोते हैं. इस समस्या का इलाज किया जा सकता है. अगर चेहरे के एक तरफ़ कमज़ोरी आ रही है. तब उस तरफ़ से लार बाहर निकलने की समस्या हो सकती है. इसलिए किसी न्यूरोलॉजिस्ट से मिलकर जांच ज़रूर करवाएं.
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अगर आपके शरीर में कमज़ोरी आ रही है. चाल धीमी हो रही है. तब ऐसा दिमाग से जुड़ी बीमारियों की वजह से भी हो सकता है. इनमें सूजन, ट्यूमर, पार्किंसंस या मांसपेशियों की कमज़ोरी शामिल है जिससे लार गिर सकती है.
अगर आप एक ही तरफ़ करवट लेकर सोते हैं और मुंह में लार ज़्यादा बनती हैं. तो दवाइयों की मदद से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. सोने का पोश्चर बदलने से भी लार निकलने की समस्या कम हो सकती है. इसलिए अगर सोते समय लार निकलती है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है. कभी-कभी सोते समय लार निकलना सामान्य बात है. लेकिन अगर लार बार-बार निकल रही है तो नाक, कान और गले की जांच करवाएं. सही जांच और इलाज से लार की समस्या को कंट्रोल कर सकते हैं. किसी गंभीर बीमारी का समय पर पता भी लगा सकते हैं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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