झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि बिना इजाजत महिला के घर में घुसकर उसके कपड़े उठाना रेप की कोशिश नहीं है. 1999 के इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 376/511 के तहत रेप करने की कोशिश और जुर्म करने की कोशिश में दोषी ठहराया था. हाई कोर्ट ने फैसला पलटते हुए आरोपी को रेप की कोशिश के बजाय महिला की इज्जत भंग करने के लिए IPC की धारा 354 के तहत दोषी माना. हालांकि, चोट पहुंचाने के इरादे से घर में बिना इजाजत घुसने के मामले में IPC की धारा 452 के तहत दी गई सजा बरकरार रखी.
'महिला के घर में घुसकर उसके कपड़े ऊपर उठाना रेप की कोशिश नहीं', HC ने दोषी की सजा बदली
महिला ने दावा किया कि 27 दिसंबर 1999 को आधी रात 12 बजे जब वो सो रही थी, तो उसने दरवाजे के जोर से खुलने की आवाज सुनी. महिला ने कोर्ट को बताया कि एक शख्स उसका रेप करने की नीयत से घर के अंदर घुस आया और उसकी साड़ी उठाई.

ट्रायल कोर्ट से शख्स को चार साल की सजा मिली. इसके खिलाफ उसने झारखंड हाई कोर्ट में अपील की. 31 अगस्त को हाई कोर्ट ने अपना आदेश दिया, जो 5 सितंबर को कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुआ.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट के जस्टिस कुमार श्रीवास्तव ने अपने आदेश में कहा,
"शिकायतकर्ता महिला के बयान पर पूरी तरह से विचार करने पर अपील करने वाले शख्स की ओर से ऐसा कोई खास काम सामने नहीं आता, जिसे उसके साथ रेप करने की दिशा में उठाया गया कदम कहा जा सके, और जिससे IPC की धारा 376/511 के तहत सजा के काबिल जुर्म माना जा सके."
हाई कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने खुद कहा कि अपीलकर्ता तब उसके घर में घुसा, जब वो सो रही थी. जबकि उसकी मां ने कहा कि रुदन सिंह भी पीड़िता के साथ सो रही थी. कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे सेक्स करने (Sexual Intercourse) की कोशिश या रेप करने की कोशिश साबित हो सके.
शख्स ने क्या दलील दी?अपीलकर्ता शख्स ने भी दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में उस रुदन सिंह की गवाही हुई ही नहीं, जबकि वो मौका-ए-वारदात की सबसे बड़ी चश्मदीद थी. क्योंकि पीड़िता की मां ने खुद कहा था कि रुदन सिंह पीड़िता के साथ ही सो रही थी.
हाई कोर्ट ने इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए अपीलकर्ता की सजा को IPC की धारा 376/511 से बदलकर महिला की इज्जत भंग करने की IPC की धारा 354 में बदल दिया. बिना इजाजत घर में घुसने की सजा बरकरार रही.
क्या है पूरा मामला?मामला झारखंड के घाटशिला का है. एक महिला ने दावा किया कि 27 दिसंबर 1999 को आधी रात 12 बजे जब वो सो रही थी, तो उसने दरवाजे के जोर से खुलने की आवाज सुनी. महिला ने कोर्ट को बताया कि एक शख्स उसका रेप करने की नीयत से घर के अंदर घुस आया. उसने महिला की साड़ी उठाई और रेप करने की कोशिश की.
महिला ने शोर मचाया और शख्स को ताकत लगाकर खुद से दूर कर दिया. शोर सुनकर पीड़िता की मां और पड़ोसी आ गए, और शख्स मौके से फरार हो गया. महिला का भाई घर पर नहीं था, तो उसने 31 दिसंबर 1999 को चकुलिया पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई.
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ट्रायल कोर्ट में घाटशिला के एडिशनल सेशन जज के सामने 10 लोगों की गवाही हुई. अदालत ने शख्स को रेप की कोशिश, जुर्म करने की कोशिश और घर में बिना इजाजत घुसने का दोषी ठहराया. चार साल की सजा सुनाई गई. शख्स ने सजा को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी.
सजा भी घटीहाई कोर्ट ने उन अपराधों को बदल दिया, जिसमें दोषी ठहराते हुए सजा दी गई. कोर्ट ने सजा की अवधि में भी बदलाव किया. कोर्ट ने कहा कि ये अपीलकर्ता का पहला अपराध था, उसे पहले दोषी नहीं ठहराया गया था, और इस अपराध को 26 साल से ज्यादा समय बीत चुका है. इसलिए कोर्ट ने अपीलकर्ता के क्राइम का नेचर, उम्र, केरेक्टर और गुजरी जिंदगी को ध्यान में रखते हुए उसे पहले ही पूरी हो चुकी अवधि की सजा सुनाई, जो मुकदमे के दौरान लगभग आठ महीने थी.
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