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जोड़ घिसने का सबसे ज़्यादा रिस्क किन लोगों को होता है? डॉक्टर से जानिए बचने के तरीके

Osteoarthritis Symptoms, Causes, Treatment: डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि जोड़ घिसने का असर सबसे पहले किन जॉइंट्स पर पड़ता है. जोड़ घिसने के शुरुआती संकेत क्या हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. और इससे बचाव कैसे करें.

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जोड़ों में दर्द रहता है?

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  • डॉ. यश गुलाटी के अनुसार, जोड़ घिसने की समस्या उम्र बढ़ने के कारण कार्टिलेज के घिसने से होती है, जिससे ऑस्टियोअर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसे रोग होते हैं।
  • जोड़ घिसने के पीछे अधिक वजन, एक्सरसाइज की कमी और लगातार एक ही स्थान पर बैठना जैसे कारण होते हैं, जो मांसपेशियों को कमजोर करते हैं और जोड़ों पर दबाव बढ़ाते हैं।
  • अगर शुरुआत में जोड़ घिसने का पता लग जाए तो वजन कम करना, एक्सरसाइज करना और दवाओं का इस्तेमाल बीमारी को नियंत्रित कर सकता है, अन्यथा गंभीर मामलों में सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।

जवानी के अपने ही फायदे होते हैं. शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है. आप लंबी मैराथन दौड़ सकते हैं. पहाड़ों पर ट्रेकिंग कर सकते हैं. मनचाहा खेल खेल सकते हैं और जितनी मर्ज़ी, उतनी फिजिकल एक्टिविटी कर सकते हैं. बेस्ट टाइम यही है. क्योंकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है. शरीर कमज़ोर पड़ने लगता है. आप घर के बुज़ुर्गों को ही देखिए. वो अक्सर हाथ, पैर और घुटनों में दर्द से परेशान रहते हैं. 

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जानते हैं ऐसा क्यों है? ये दिक्कत है जोड़ घिसने की वजह से. पर जोड़ घिसते क्यों हैं, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि जोड़ घिसने का असर सबसे पहले किन जॉइंट्स पर पड़ता है. जोड़ घिसने के शुरुआती संकेत क्या हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. किन लोगों में जोड़ घिसने का ख़तरा ज़्यादा होता है. जोड़ घिसने का इलाज क्या है और इससे बचाव कैसे करें. 

जोड़ क्यों और कब घिसने लगते हैं?

हमें बताया पद्म श्री डॉक्टर यश गुलाटी ने. 

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पद्म श्री डॉ. यश गुलाटी, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली

जिस तरह शरीर के दूसरे हिस्सों में बदलाव आते हैं, वैसे ही जोड़ भी घिसने लगते हैं. जैसे स्किन में झुर्रियां आने लगती हैं, बाल टूटने लगते हैं या सफेद हो जाते हैं. वैसे ही, बढ़ती उम्र के साथ जोड़ भी घिसने लगते हैं. हमारे जोड़ों में एक मुलायम परत होती है, जिसे कार्टिलेज कहा जाता है. ये कार्टिलेज हड्डियों को कवर करती है और उन्हें आपस में रगड़ खाने से बचाती है. जब उम्र बढ़ती है, तो कार्टिलेज घिसना शुरू हो जाती है. इससे नीचे की हड्डियां आपस में टकराने लगती हैं. इसकी वजह से बहुत दर्द होता है. उम्र बढ़ने की वजह से होने वाली इस समस्या को ऑस्टियोअर्थराइटिस कहा जाता है. ऑस्टियोअर्थराइटिस सबसे ज़्यादा घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में देखने को मिलती है. महिलाओं में अंगूठे का सीएमसी जॉइंट भी अक्सर प्रभावित होता है.

एक दूसरी तरह का अर्थराइटिस भी है, जिसे रूमेटाइड या इंफ्लेमेट्री अर्थराइटिस कहा जाता है. ये ऑस्टियोअर्थराइटिस से अलग होता है. रूमेटाइड अर्थराइटिस अक्सर हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों से शुरू होता है. धीरे-धीरे इसका असर शरीर के बड़े जोड़ों पर भी पड़ने लगता है. कुछ लोगों में शुरुआत से ही बड़े जोड़ प्रभावित हो सकते हैं.

जोड़ घिसने के शुरुआती संकेत

जब जोड़ घिसने शुरू होते हैं, तो सुबह उठते समय जोड़ों में अकड़न महसूस होने लगती है. शुरुआत में जोड़ों में हल्का दर्द भी होता है. लेकिन जैसे ही व्यक्ति चलना-फिरना शुरू करता है, अकड़न और दर्द कुछ कम हो जाता है. यही जोड़ घिसने के शुरुआती संकेत माने जाते हैं. समय के साथ जोड़ों का दर्द धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. चलने, सीढ़ियां चढ़ने पर दर्द ज़्यादा महसूस हो सकता है. वहीं, रूमेटाइड अर्थराइटिस में दर्द और अकड़न लंबे समय तक बनी रहती है. इसमें हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों में सूजन भी आ सकती है. यानी ऑस्टियोअर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस, दोनों के लक्षण और असर अलग-अलग होते हैं.

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लाइफस्टाइल खराब है तो बढ़ती उम्र में जोड़ घिसना शुरू हो जाएंगे

किन लोगों में जोड़ घिसने का ज़्यादा ख़तरा?

- जिन लोगों का वज़न ज़्यादा है

- जो रेगुलर एक्सरसाइज़ नहीं करते

- जो दिनभर एक ही जगह बैठकर काम करते हैं  

- जो योग और स्ट्रेचिंग नहीं करते

- जो अपनी मांसपेशियां को मज़बूत नहीं बनाते

जोड़ घिसने का इलाज और बचाव

अगर शुरुआत में ही बीमारी की पहचान हो जाए, तो इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. जिन लोगों का वज़न ज्यादा है, उन्हें वज़न कम करने की कोशिश करनी चाहिए. अगर मांसपेशियां कमज़ोर हैं, तो एक्सरसाइज़ और फिजिकल एक्टिविटी शुरू करें. आजकल कुछ दवाइयां भी मौजूद हैं, जो कार्टिलेज को सपोर्ट करने में मदद कर सकती हैं. डॉक्टर की सलाह से इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए, तो अर्थराइटिस तेज़ी से बढ़ सकता है. गंभीर मामलों में सर्जरी की ज़रूरत भी पड़ सकती है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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