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वकील को 340 वाला सिगरेट का पैकेट 360 रुपये में बेचा, बंदा कोर्ट पहुंचा, अब देने पड़ेंगे 10 लाख

UP: अलीगढ़ में एक दुकानदार ने एक वकील को 20 रुपये अधिक दाम में सिगरेट का पैकेट बेचा. जिसके बाद वकील ने कंपनी और दुकानदार के खिलाफ केस दर्ज कर दिया. अब कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कंपनी और दुकानदार को 10 लाख रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया है.

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अलीगढ़ में एक दुकानदार ने MRP से ज्यादा में सिगरेट बेची. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक दुकानदार ने सिगरेट का पैकेट MRP से 20 रुपये अधिक कीमत पर बेचा, जिसके कारण उपभोक्ता फोरम कोर्ट ने उसे दोषी पाया और जुर्माना लगाया।
  • दुकानदार द्वारा सिगरेट की अधिक कीमत वसूली करने और ग्राहक की शिकायत के बाद केस दर्ज किया गया था, जिस पर कंपनी ने अधिकृत वेंडर न होने का दावा किया था।
  • कोर्ट ने दुकानदार और कंपनी दोनों को 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और ग्राहक को 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, भुगतान 45 दिन में उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा होगा।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक दुकानदार ने एक सिगरेट का पैकेट MRP (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) से 20 रुपये ज्यादा में बेचा. यानी 340 रुपये का पैकेट 360 रुपये में बेचा. जिसके बाद उसे खरीदने वाले ने उपभोक्ता फोरम कोर्ट में शिकायत कर दी. कोर्ट ने कंपनी और दुकानदार को दोषी पाते हुए उनपर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. साथ ही ग्राहक को मुआवज़ा देने का आदेश भी दिया है. 

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दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अलीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग के ठीक सामने प्रतिभा कॉलोनी के रहने वाले हीरा लाल वार्ष्णेय की दुकान है. इसी दुकान से अधिवक्ता देवेश गौतम ने जनवरी में सिगरेट का पैकेट खरीदा था. उसकी कीमत 340 रुपये थी फिर भी दुकानदार ने उनसे अधिक पैसे लिए. देवेश के मुताबिक, विरोध करने पर दुकानदार से बहस हुई और उसने सिगरेट का पैकेट देने से मना कर दिया. इसके बाद ऑनलाइन पेमेंट कर देवेश ने सिगरेट का पैकेट खरीद लिया.

कोर्ट में केस दर्ज 

देवेश गौतम के पास उनके पेमेंट का स्क्रीनशॉट था. इसी पेमेंट का प्रिंटआउट निकलवाया और कोर्ट में अपना केस दर्ज करा दिया. ये केस फरवरी में दर्ज हुआ जिसका फैसला कोर्ट ने 16 जून को दिया है. केस दर्ज होने के बाद कोर्ट ने दुकानदार और कंपनी को नोटिस भेजा, लेकिन दुकानदार कोर्ट में पेश नहीं हुआ. तब कंपनी ने तर्क दिया कि दुकानदार उसका अधिकृत वेंडर नहीं है, इसलिए कालाबाजारी के लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है. कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया.

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कोर्ट ने क्या कहा? 

केस की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की अदालत में हुई. कोर्ट ने तर्क दिया कि दुकानदार कंपनी का ही प्रोडक्ट बेच रहा था इसलिए वो उसका ही सब-एजेंट माना जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा- 

‘कंपनियां अपने प्रोडक्ट की आड़ में हो रही कालाबाजारी से पल्ला नहीं झाड़ सकतीं. यह आम जनता के साथ छिपी हुई लूट है.’

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कोर्ट ने दुकानदार और कंपनी पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है, जिसे 45 दिन के भीतर उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश दिया गया है. साथ ही देवेश गौतम को मुआवजे के रूप में 10 हजार रुपए देने को कहा है. 

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