ऐसा नहीं है कि हम सबकी ज़िंदगी में हमेशा खुशियां ही रहती हैं. हर कोई कभी न कभी उदास होता है. दुखी होता है. अपनी काबिलियत पर शक करता है. परेशान होता है. खीझता है. चिड़चिड़ाता है. रातें जागकर बिता देता है. अक्सर ये सब कुछ वक्त, कुछ दिनों के लिए ही होता है. लेकिन कई बार ये सारी भावनाएं टिक जाती हैं. वो भी एक साथ, और व्यक्ति डिप्रेशन में जाने लगता है.
आपका करीबी डिप्रेशन में है ये पहचानने का तरीका जान लीजिए
मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक गंभीर कंडीशन है डिप्रेशन. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन का अनुमान है कि हमारे देश में 5 करोड़ 66 लाख से ज़्यादा लोग डिप्रेशन से जूझ रहे थे. यानी डिप्रेशन कोई ऐसी समस्या नहीं हैं, जो बहुत रेयर हो.

डिप्रेशन, मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक गंभीर कंडीशन है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन का अनुमान है कि हमारे देश में 5 करोड़ 66 लाख से ज़्यादा लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं. यानी डिप्रेशन कोई ऐसी समस्या नहीं हैं, जो बहुत रेयर हो. ये एक आम कंडीशन है. हो सकता है कि इससे जूझ रहा कोई व्यक्ति हमारे आसपास ही हो. या शायद हम खुद ही डिप्रेशन की तरफ जा रहे हों. पर अब तक इसे समझ न पाए हों.
इसलिए आज हम डिप्रेशन पर बात करेंगे. डॉक्टर से जानेंगे कि डिप्रेशन क्यों होता है. किसी व्यक्ति में इसके संकेत कैसे पहचानें. इसके शारीरिक लक्षण क्या होते हैं. क्या ये अपने आप ठीक हो सकता है. और अगर किसी को डिप्रेशन है, तो परिवार व दोस्त उसकी मदद कैसे कर सकते हैं.
डिप्रेशन होने की सबसे बड़ी वजहें
इसके बारे में हमें बताया डॉक्टर हमज़ा हुसैन ने.

डिप्रेशन होने की कोई एक वजह नहीं होती. जैसे डायबिटीज़ और हाई बीपी के पीछे कई कारण हो सकते हैं. वैसे ही डिप्रेशन के पीछे भी कई फैक्टर्स काम करते हैं. इसलिए डिप्रेशन को मल्टी-फैक्टोरियल इलनेस कहा जाता है. यानी इसके होने में कई चीज़ों की भूमिका हो सकती है.
जैसे आपके जीन्स. जब आप गर्भ में थे, उस दौरान मां की मेंटल हेल्थ कैसी है. इसका असर भी आपकी मेंटल हेल्थ पर पड़ सकता है. इसके बाद बचपन कैसा रहा. आपने किस तरह के स्ट्रेस का सामना किया. आपका माहौल कैसा था और परवरिश किस तरह हुई. आपके जेनेटिक्स कैसे हैं. अभी आप कितने स्ट्रेस में हैं. आपकी नौकरी कैसी चल रही है. इन सबका असर मेंटल हेल्थ पर पड़ता है. यानी डिप्रेशन की कोई एक खास वजह नहीं है. इसके पीछे कई अलग-अलग फैक्टर्स हो सकते हैं.
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कैसे पता करें, व्यक्ति डिप्रेशन से जूझ रहा है?
डिप्रेशन का मतलब हमेशा ये नहीं होता कि व्यक्ति हर समय उदास रहे. डिप्रेशन में कई बार चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है. कई मरीज़ बताते हैं कि वो पहले इतने चिड़चिड़े या गुस्सैल नहीं थे. लेकिन अब उन्हें बहुत गुस्सा आने लगा है या चिड़चिड़ापन रहने लगा है. कई बार छोटी-सी बात पर गुस्सा आ जाता है या रोना आने लगता है. ठीक से नींद नहीं आती. भूख कम हो चुकी है. काम में ध्यान नहीं लगता. बच्चों, घरवालों के साथ एन्जॉय नहीं कर पाते. जिन चीज़ों में पहले मन लगता था, अब उनमें मन नहीं लगता. व्यक्ति को लगातार उदासी महसूस होती है. वो ज़िंदगी से थका हुआ महसूस करते हैं. कई बार उन्हें लगता है कि वो बेकार हैं या किसी काम के नहीं हैं. ये सब डिप्रेशन के कुछ आम लक्षण हैं.
डिप्रेशन के शारीरिक लक्षण
- गर्दन में दर्द होना.
- सिरदर्द होना..
- कमर में दर्द होना
- हाथ-पैर थरथराना.
- पेट में गैस बनना.
- एसिडिटी, कब्ज़ या डायरिया होना.
- दिल की धड़कन तेज़ होना.
- हाथ-पैरों में ठंडा पसीना आना.
- ये कुछ आम शारीरिक लक्षण हैं, जो एंग्ज़ायटी, डिप्रेशन और दिमाग से जुड़ी दूसरी बीमारियों में देखने को मिल सकते हैं.
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क्या डिप्रेशन अपने आप ठीक हो सकता है?
अगर माइल्ड (हल्का) डिप्रेशन है, तो कुछ मामलों में ये अपने आप ठीक हो सकता है. लेकिन इसके अपने आप ठीक होने की संभावना बहुत कम होती है. माइल्ड डिप्रेशन में हर बार दवाइयों की ज़रूरत नहीं होती. माइल्ड और एक हद तक मॉडरेट डिप्रेशन थेरेपी से भी ठीक हो सकता है. लेकिन अगर सीवियर (गंभीर) डिप्रेशन है, तो दवाइयों की ज़रूरत पड़ती है. ये साइकेट्रिस्ट ही बता सकते हैं कि आपके लिए सिर्फ़ थेरेपी काफ़ी है या दवाइयों की ज़रूरत है. इसलिए ज़रूरी नहीं कि डिप्रेशन में हर व्यक्ति को दवाइयां लेनी ही पड़ें. थेरेपी और दूसरी तकनीकों के साथ-साथ न्यूट्रिशन वग़ैरा ठीक करने से डिप्रेशन के लक्षणों में सुधार हो सकता है. लेकिन आपके लिए क्या सही रहेगा, ये मनोचिकित्सक ही बता सकते हैं.
अगर किसी को डिप्रेशन है, तो परिवार और दोस्त कैसे मदद करें?
सबसे पहले व्यक्ति को समझने की कोशिश करें. उसे नज़रअंदाज़ न करें. उसकी भावनाओं को हल्के में न लें. समझें कि वो एक मानसिक स्थिति से जूझ रहा है. फिर उसे साइकेट्रिस्ट के पास लेकर जाएं. वो उसकी स्थिति को समझकर सही इलाज और आगे की मदद के बारे में गाइड करेंगे.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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