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शैंपू और कंडीशनर दोस्त को सूट करता है लेकिन आपको नहीं, इसके पीछे का खेल ये है

हेयर पोरोसिटी यानी बालों की नमी को एब्ज़ॉर्ब करने और उस नमी को बनाए रखने की क्षमता.

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हर किसी पर हर हेयर प्रोडक्ट काम नहीं करता

बालों का तेल. शैंपू. कंडिशनर. ये वो प्रोडक्ट हैं जिन्हें हम सभी इस्तेमाल करते हैं ताकि बाल अच्छे और चमकदार दिखें. वो टूटे नहीं. एकदम मज़बूत रहें. मगर कई बार, कोई प्रोडक्ट हमें सूट नहीं करता. लेकिन वही प्रोडक्ट हमारे दोस्त को बड़ा फायदा पहुंचाता है. जिस प्रोडक्ट के इस्तेमाल से हमारे बाल झड़ने लगते हैं. उसी प्रोडक्ट के इस्तेमाल से हमारे दोस्त के बाल मज़बूत हो जाते हैं. उनमें चमक आ जाती है.

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अब ऐसा क्यों होता है? तो, ऐसा हेयर पोरोसिटी की वजह से होता है. हेयर पोरोसिटी यानी बालों की नमी को एब्ज़ॉर्ब करने और उस नमी को बनाए रखने की क्षमता.

अपनी हेयर पोरोसिटी कैसे चेक करें. और, इसके हिसाब से कैसे प्रोडक्ट इस्तेमाल करने चाहिए. ये हमने पूछा डॉक्टर भावुक धीर से.

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डॉ. भावुक धीर, कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, पीएसआरआई हॉस्पिटल

डॉक्टर भावुक बताते हैं कि हेयर पोरोसिटी यानी बालों की नमी को सोखने की क्षमता तीन तरह की होती है. लो पोरोसिटी. मीडियम पोरोसिटी. हाई पोरोसिटी.

अब इन तीनों का मतलब क्या है, ये जानने के लिए पहले हमें अपने बालों को समझना होगा. 

hair layers
किसी बाल में तीन परतें होती हैं

हमारे बालों की तीन लेयर्स होती हैं. यानी परतें. सबसे ऊपरी है क्यूटिकल. फिर कोर्टेक्स और एकदम बीच वाली मेड्युला. बाल तभी हेल्दी रहते हैं. जब तेल, पानी, या उसे नमी देने वाले दूसरे प्रोडक्ट क्यूटिकल से होते हुए मेड्युला तक पहुंच पाते हैं. यानी सबसे बाहरी परत से लेकर सबसे अंदरूनी परत तक.

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अगर नमी बालों की पहली परत यानी क्यूटिकल को पार करके अंदर नहीं जा पा रही. तो इसका मतलब बाल ‘लो पोरोसिटी’ हैं. अगर नमी आराम से पर्याप्त मात्रा में अंदरूनी परत मेड्युला तक जा रही है. तो इसका मतलब बाल ‘मीडियम पोरोसिटी’ हैं. इस तरह के बाल सबसे बढ़िया होते हैं. इन्हें संभालना भी आसान होता है. 

वहीं अगर नमी बहुत ज़्यादा मात्रा में बालों के अंदर तक जा रही है. तो इसका मतलब बाल ‘हाई पोरोसिटी’ हैं.

हेयर पोरोसिटी चेक करने का तरीका
hair porosity test
हेयर पोरोसिटी चेक करना आसान है

पोरोसिटी चेक करने के लिए अपने बालों को शैंपू करने के बाद सुखा लें. फिर एक कांच के गिलास में पानी भरें. अब अपने एक बाल को जड़ से तोड़कर पानी भरे गिलास में डाल दें. अगर बाल ऊपर तैरता है तो वो ‘लो पोरोसिटी’ का है. अगर बाल पानी के बीच में तैरने लगता है. तो वो ‘मीडियम पोरोसिटी’ का है. वहीं अगर बाल पानी में डूब जाता है. गिलास की तली में बैठ जाता है. तो वो ‘हाई पोरोसिटी’ का है.

आमतौर पर, लो और हाई पोरोसिटी वाले बाल बहुत हेल्दी नहीं होते हैं. इन्हें हेल्दी बनाने के लिए, इनकी बहुत ज़्यादा देखभाल करनी पड़ती है.

कैसे करें बालों की देखभाल?

‘लो पोरोसिटी’ बालों को गुनगुने पानी से धोएं. इससे क्यूटिकल्स को खोलने में मदद मिलेगी. शैंपू ऐसा इस्तेमाल करें जिसमें शहद या ग्लिसरीन हो. ये दोनों ही, दूसरे तत्वों की तुलना में बालों की बाहरी परत को आसानी से पार कर सकते हैं. ध्यान रखें, शैंपू सल्फेट-फ्री और ऑयल-फ्री भी हो. वहीं कंडिशनर को हमेशा थोड़े पानी के साथ मिलाकर बालों में लगाएं. कभी-कभी डीप कंडिशनिंग भी करें. जैसे हीट कैप लगाना. या गर्म तौलिए का इस्तेमाल.

‘लो पोरोसिटी’ वाले बालों में पहले से ही पर्याप्त प्रोटीन होता है. इसलिए, ज़्यादा प्रोटीन वाला प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें. इसके अलावा, बालों पर हल्के प्रोडक्ट्स लगाएं. हेवी क्रीम या बटर बेस्ड प्रोडक्ट्स से बचें.

वहीं ‘हाई पोरोसिटी’ वाले बालों में पहले नारियल या जैतून का तेल लगाएं. फिर शैंपू इस्तेमाल करें. शैंपू ऐसा हो जिसमें ग्लिसरीन, एलोवेरा या शहद हो. प्रोटीन हो. वो सल्फेट-फ्री हो. इसके बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें. फिर बालों में कंडिशनर लगाएं. कंडिशनर में बटर या ऑयल होना चाहिए. बालों की डीप कंडिशनिंग करना भी ज़रूरी है. आप DIY हेयर मास्क लगा सकते हैं. इसके लिए दही, केले और शहद का इस्तेमाल करें.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप' आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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