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स्ट्रेस अगर टिक गया तो समय से पहले बूढ़ा कर देगा, कैसे बचें?

डॉक्टर से समझेंगे कि क्रोनिक स्ट्रेस शरीर और दिमाग पर कैसे असर डालता है. इससे किन-किन बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है. और अपना स्ट्रेस मैनेज करने के लिए क्या करें. कब डॉक्टर की मदद लें.

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आप किस बात से स्ट्रेस में हैं?

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  • डॉक्टर अविना गुप्ता ने बताया कि लंबे समय तक चलने वाला क्रोनिक स्ट्रेस शरीर के सेल्स को जल्दी बूढ़ा कर देता है और इससे हाई बीपी, थायरॉइड, और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
  • काम का दबाव, पैसों की चिंता, और परिवार की जिम्मेदारियां लोगों में स्ट्रेस उत्पन्न करने के मुख्य कारण हैं, जो आमतौर पर कुछ समय के लिए होता है लेकिन अगर लगातार बना रहे तो नुकसानदेह हो सकता है।
  • स्ट्रेस प्रबंधन के लिए जर्नलिंग, नियमित दिनचर्या बनाना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सहायता लेना आवश्यक है, खासकर जब लगातार बेचैनी, पैनिक अटैक या उदासी के लक्षण नजर आने लगें।

काम का प्रेशर. पैसों की चिंता. भविष्य की फिक्र. रिश्तों में अनबन. घर-परिवार की ज़िम्मेदारियां. इन सबसे किसी को भी स्ट्रेस हो सकता है. अमूमन ये स्ट्रेस कुछ ही वक्त या कुछ ही दिनों के लिए होता है. लेकिन अगर स्ट्रेस टिक जाए. लगातार रहने लगे, तो ये शरीर को बहुत गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इतना नुकसान कि आप समय से पहले बूढ़े भी हो सकते हैं. लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से क्या-क्या होता है, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि क्रोनिक स्ट्रेस शरीर और दिमाग पर कैसे असर डालता है. इससे किन-किन बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है. और अपना स्ट्रेस मैनेज करने के लिए क्या करें. कब डॉक्टर की मदद लें. 

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लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर अविना गुप्ता ने. 

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डॉ. अविना गुप्ता, कंसल्टेंट, साइकेट्री, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

स्ट्रेस होना बहुत आम बात है. हम सबकी ज़िंदगी में स्ट्रेस होता है. काम, पैसों और परिवार की ज़िम्मेदारियों के कारण स्ट्रेस हो सकता है. ये हमारी परफॉर्मेंस बढ़ाने में मदद कर सकता है. स्ट्रेस शरीर को अलर्ट करता है. इससे हम बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं. ये हमें करियर में आगे बढ़ने में भी मदद कर सकता है. लेकिन क्रोनिक स्ट्रेस यानी लंबे समय तक रहने वाला स्ट्रेस नुकसानदेह है. क्रोनिक स्ट्रेस में शरीर लगातार फाइट एंड फ्लाइट मोड में रहता है. इससे शरीर के कुछ सेल्स जल्दी बूढ़े होने लगते हैं.

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मान लीजिए, किसी व्यक्ति की उम्र 38 साल है. इस उम्र में शरीर के सेल्स में बदलाव होने लगते हैं. जिससे सेल्स धीरे-धीरे बूढ़े होने लगते हैं. अगर इसी दौरान व्यक्ति लंबे समय तक स्ट्रेस में रहता है, तो उसके शरीर की उम्र तेज़ी से बढ़ने लगती है. ज़्यादा स्ट्रेस लेने वाले लोगों के बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं. उनका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. स्ट्रेस के कारण थायरॉइड, डायबिटीज़ और हाई बीपी जैसी बीमारियों का ख़तरा भी बढ़ सकता है.

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क्रोनिक स्ट्रेस शरीर और दिमाग पर कैसे असर डालता है?

हमारे शरीर में कुछ ऐसी बायोलॉजिकल प्रक्रियाएं होती हैं. जो खून की नलियों को ठीक से काम करने में मदद करती हैं. इससे हमारा दिल भी सही तरीके से काम करता रहता है. लेकिन लगातार स्ट्रेस में रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है. इससे हाई बीपी होने का ख़तरा बढ़ जाता है. हाई बीपी होने पर दवाइयां शुरू की जाती हैं. आगे जांच में पता चलता है कि बीपी बढ़ने की वजह स्ट्रेस था. यानी स्ट्रेस के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. एंग्ज़ायटी, नींद आने में परेशानी और घबराहट हो सकती है. ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है. ये सब स्ट्रेस की वजह से होता है. लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से कई बीमारियों का ख़तरा बढ़ सकता है.

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स्ट्रेस का असर दिमाग और शरीर, दोनों पर पड़ता है. इसकी वजह से हाई बीपी, डायबिटीज़ और थायरॉइड का ख़तरा बढ़ जाता है. स्ट्रेस कम करके स्ट्रोक का रिस्क घटाया जा सकता है. स्ट्रेस की वजह से हमारे व्यवहार में भी बदलाव आ सकते हैं. जैसे शराब और सिगरेट पीने की आदत बढ़ सकती है. कुछ लोग स्ट्रेस में बहुत ज़्यादा या बहुत कम खाने लगते हैं. स्ट्रेस लेने से इनका रिस्क भी बढ़ जाता है.

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स्ट्रेस कैसे मैनेज करें? कब डॉक्टर की मदद लें?

स्ट्रेस मैनेज करना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए आप कुछ चीज़ें कर सकते हैं. जैसे जर्नलिंग करना यानी अपने विचारों को डायरी में लिखना. 

स्ट्रेस में कई बार लोग अपने विचार दूसरों से शेयर नहीं कर पाते. उन्हें लगता है कि इस बारे में किसी से बात नहीं करनी चाहिए. लेकिन आपको अपने विचार और परेशानियां दूसरों से शेयर करनी चाहिए. 

अपना टाइम टेबल बनाएं और रोज़ एक तय रूटीन फॉलो करें. ऑफिस नहीं जाते, फिर भी अपने सोने-जागने का समय तय करें. रोज़ एक रूटीन होना बहुत ज़रूरी है. 

ज़रूरत पड़ने पर दूसरों से मदद मांगने में हिचकिचाएं नहीं. अगर आपको लगातार उदासी, घबराहट या बेचैनी महसूस होती है. अगर आप अपने रोज़मर्रा के काम नहीं कर पा रहे. अगर बार-बार पैनिक अटैक आ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. ऐसे लक्षण होने पर प्रोफेशनल हेल्प लेना ज़रूरी है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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