मोतियाबिंद यानी आंख के नेचुरल लैंस का धुंधला हो जाना. इससे चीज़ें साफ़ नहीं दिखाई देतीं और नज़र कमज़ोर हो जाती है. उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद होना, भारत में एक आम समस्या है. Frontiers in Public Health नाम के जर्नल में साल 2024 में एक स्टडी छपी. इसके मुताबिक, भारत में करीब 14% बुज़ुर्गों में मोतियाबिंद पाया गया.
मोतियाबिंद सर्जरी के बाद भी धुंधला दिख रहा? ये वजह हो सकती है
सर्जरी के बाद दोबारा रोशनी कम होने के कई कारण हो सकते हैं. मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद आंख के पीछे छोड़ी गई झिल्ली में धुंधलापन आ सकता है. इसकी वजह से रोशनी कम हो सकती है.

आपने देखा होगा, बहुत सारे बुज़ुर्ग मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराते हैं. फिर कुछ हफ्तों में आंख पूरी तरह ठीक हो जाती है और चीज़ें बहुत साफ़ दिखने लगती हैं. पर कभी-कभी मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद भी धुंधला दिखाई देता है. इसका क्या मतलब है और ऐसा क्यों होता है, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि क्या मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद दोबारा मोतियाबिंद हो सकता है. सर्जरी के बाद नज़र दोबारा धुंधली होने के पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं. मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखें. कितने दिन आराम करें. डाइट कैसी हो और कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए.
सर्जरी के बाद दोबारा मोतियाबिंद हो सकता है?
ये हमें बताया डॉक्टर पुरेंद्र भसीन ने.

मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद दोबारा मोतियाबिंद होने की संभावना नहीं रहती. सर्जरी के दौरान मोतियाबिंद को हटाकर, उसके अंदर मौजूद न्यूक्लियस और कॉर्टेक्स को निकाल दिया जाता है. इसके बाद आंख में एक इंट्राओक्युलर लेंस यानी आर्टिफिशियल लेंस लगाया जाता है. इसलिए दोबारा मोतियाबिंद बनने का चांस नहीं रहता.
सर्जरी के दौरान लेंस के पीछे एक पतली झिल्ली छोड़ दी जाती है, जिसे कैप्सूल कहते हैं. समय के साथ इस कैप्सूल में धुंधलापन आ सकता है. इसमें नए सेल्स भी बढ़ सकते हैं, जिससे मरीज़ को धुंधला दिख सकता है.
इसके लिए एक आसान इलाज मौजूद है. लेज़र की मदद से इस झिल्ली में बने धुंधलेपन को हटाया जाता है. ये एक OPD प्रोसीजर है, इसके बाद मरीज़ की नज़र फिर से साफ़ हो सकती है.
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सर्जरी के बाद भी धुंधला दिखने के दूसरे कारण
सर्जरी के बाद दोबारा रोशनी कम होने के कई कारण हो सकते हैं. मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद आंख के पीछे छोड़ी गई झिल्ली में धुंधलापन आ सकता है. इसकी वजह से रोशनी कम हो सकती है.
आंखों में ड्रायनेस होने या चश्मे का नंबर बदलने पर भी नज़र कमज़ोर हो सकती है. आंख के पर्दे यानी रेटिना में सूजन, डायबिटीज़, हाई बीपी होने पर रेटिना से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. इसकी वजह से मैक्युलर एडिमा, BRVO या CRVO जैसी समस्या हो सकती है.
बहुत कम मामलों में सर्जरी के दौरान लगाए गए लेंस को सही सपोर्ट न मिलने पर वो अपनी जगह से खिसक सकता है. अगर लेंस की पावर कैलकुलेशन में गड़बड़ी हुई हो, तो भी धुंधलापन आ जाता है. अगर सर्जरी के बाद नजर धुंधली हो रही है, तो डॉक्टर को दिखाएं. वो सही वजह पता करके उस हिसाब से इलाज कर सकते हैं.

मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद क्या ध्यान रखें?
आजकल मोतियाबिंद की सर्जरी उन्नत तकनीक से की जाती है. लेंस भी अब काफी एडवांस हो गए हैं. कुछ लेंस ऐसे होते हैं, जिनके लगने के बाद दूर या पास के चश्मे की ज़रूरत नहीं पड़ती. इसलिए सर्जरी के बाद रिकवरी भी जल्दी होती है. सर्जरी के बाद ध्यान रखें कि आंख पर चोट न लगे. कुछ समय तक आंख में पानी जाने से बचाएं. आंख को दबाएं या रगड़ें नहीं.
सर्जरी के अगले दिन से रोज़मर्रा के काम शुरू किए जा सकते हैं. लेकिन कुछ समय तक भारी एक्सरसाइज़ न करें. भारी सामान भी न उठाएं. डॉक्टर की सलाह से ड्राइविंग और मोबाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं.
सर्जरी के बाद डाइट को लेकर कोई खास पाबंदी नहीं होती. लेकिन अगर आपको डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या कोई दूसरी बीमारी है. जिसकी वजह से डाइट पर पाबंदी है, तो उसका पालन करें. अगर सर्जरी से पहले खून पतला करने वाली दवाइयां ले रहे थे, तो डॉक्टर से पूछकर उन्हें दोबारा शुरू कर सकते हैं. आजकल मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद आमतौर पर ज़्यादा आराम की ज़रूरत नहीं पड़ती.
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कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
- अगर सर्जरी के बाद नज़र पहले से कम हो जाए.
- अगर आंख में रेडनेस हो.
- आंखों के सामने मच्छर या धब्बे उड़ते हुए दिखाई दें.
- आंखों के सामने अचानक चमक यानी फ्लैश दिखाई दे.
- आंख में ज़्यादा चुभन या तेज़ दर्द हो रहा है.
- नज़र पहले से ज़्यादा कम हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
आमतौर पर सर्जरी के बाद पहले दिन और सातवें दिन फॉलोअप के लिए डॉक्टर को दिखाया जाता है. ज़रूरत पड़ने पर तीसरे दिन भी डॉक्टर से जांच कराई जा सकती है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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