गुस्सा. आजकल कोई गुस्से में आग लगा दे रहा है. तो कोई जान तक ले रहा है. ऐसा करना नॉर्मल नहीं है. पर धीरे-धीरे हो ज़रूर रहा है. ये घटनाएं सिर्फ़ ख़बरें भर नहीं हैं. ये इस बात का इशारा हैं कि लोग अपने गुस्से पर कंट्रोल खोते जा रहे हैं. पर क्यों? आखिर कुछ लोगों को ज़्यादा गुस्सा क्यों आता है? यही जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि ज़्यादा गुस्सा करने पर शरीर में क्या होता है और गुस्सा कंट्रोल करने की प्रैक्टिकल टिप्स क्या हैं.
जरा सी बात पर हो रही हत्याएं, जानें गुस्सा कंट्रोल करने की प्रैक्टिकल टिप्स
ये भी जानिए कि आखिर किसी को गुस्सा आता ही क्यों है, और इस दौरान शरीर के अंदर क्या चल रहा होता है.


ये हमें बताया डॉक्टर मोनिका चिब ने.

गुस्सा आने का एक कारण परिवार की जेनेटिक हिस्ट्री हो सकती है. यानी कुछ लोगों को जीन्स की वजह से ज़्यादा गुस्सा आता है. जिस माहौल में व्यक्ति बड़ा होता है, उसका भी असर पड़ता है. अगर घर में बड़े लोग अक्सर गुस्से में रहते हैं, तो बच्चा वही व्यवहार सीख सकता है. फिर उसे लगता है कि गुस्सा करना ही चीज़ों से निपटने का सही तरीका है. बचपन की यादों और अनुभव की वजह से भी गुस्सा आ सकता है. अगर बचपन में कोई ऐसी घटना हुई हो, जिससे बहुत गुस्सा या दुख हुआ हो. तब उसकी यादें बाद में फिर से उभर सकती हैं, इससे गुस्सा और बढ़ जाता है. जब कोई हमारे ईगो या आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है, तब भी गुस्सा आ जाता है. अगर लगे कि ज़िंदगी या लोग हमारे साथ नाइंसाफी कर रहे हैं, तब भी गुस्सा आ सकता है.
ज़्यादा गुस्सा करने पर शरीर में क्या होता है?
जब गुस्सा हद से बढ़ जाता है, तो हमें एक ख़तरा महसूस होता है. इस स्थिति में हमारा शरीर उस ख़तरे से निपटने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया देता है. इसे 'फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स' कहा जाता है. फाइट के दौरान गुस्सा बढ़ता है, ताकि हम ख़तरे का सामना करने के लिए तैयार हो सकें. गुस्सा इस तैयारी का एक तरीका बन जाता है. इस दौरान शरीर कांपना शुरू कर देता है. दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है. सांसें तेज़ी से चलने लगती हैं. पसीना आने लगता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में कुछ हार्मोन्स रिलीज़ होते हैं, जो ख़तरे का सामना करने के लिए हमें तैयार करते हैं.

गुस्सा कंट्रोल करने की प्रैक्टिकल टिप्स
अगर आपको जल्दी गुस्सा आता है, तो सबसे पहले खुद को कंट्रोल करने की कोशिश करें. गुस्सा आते ही कुछ देर के लिए लंबी और गहरी सांसें लें. जिस स्थिति में गुस्सा आ रहा है, वहां से थोड़ी देर के लिए दूर हो जाएं. यानी उस जगह या माहौल को छोड़ दें, ताकि आप शांत हो सकें. ध्यान भटकाने के लिए कुछ और सोचें या गिनती करना शुरू करें, जैसे 10 से 1 तक उल्टी गिनती. अगर लगे कि गुस्सा अब आपके कंट्रोल में नहीं है. गुस्से से पर्सनल, प्रोफ़ेशनल लाइफ़ या रिश्तों पर असर पड़ रहा है. तब ऐसे में किसी डॉक्टर या साइकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलें.
स्ट्रेस, काम का बोझ, नींद की कमी और लाइफस्टाइल में असंतुलन से भी आप चिड़चिड़े हो सकते हैं, और गुस्सा आ सकता है. इसलिए अपनी लाइफस्टाइल ठीक रखें. रोज़ 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें और अपना स्ट्रेस मैनेज करें. इसके लिए गहरी, लंबी सांसें लें. ज़रूरत पड़ने पर प्रोफ़ेशनल हेल्प भी ले सकते हैं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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