भारतीय वायुसेना (IAF) की रीढ़ कहे जाने वाले सुखोई (Su-30MKI) फाइटर जेट्स को अब एक ऐसा 'सुरक्षा कवच' मिलने जा रहा है, जिससे दुश्मन के होश उड़ने तय हैं. जिस सुखोई ने चीन की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान जे-20 (Chengdu J-20) के स्टेल्थ होने के दावे की पोल खोल दी थी. अब उसी सुखोई के सिग्नल को जाम करना भी दुश्मन के लिए नामुमकिन हो जाएगा.
दुश्मन के चक्रव्यूह को तोड़ेगा भारत का 'सुपर सुखोई', हवा में गेम चेंजर साबित होगा नया एंटी-जैमिंग सिस्टम
Indian Air Force के सबसे घातक फाइटर जेट में से एक सुखोई-30 (SU 30-MKI) अब सुपर सुखोई में बदलता जा रहा है. रक्षा मंत्रालय ने सुखोई विमानों को अपग्रेड करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत इन लड़ाकू विमानों में एक बेहद आधुनिक, एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग मल्टी-कॉन्स्टेलेशन ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) एंटीना लगाया जाएगा.


‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट्स के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने सुखोई विमानों को अपग्रेड करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत इन लड़ाकू विमानों में एक बेहद आधुनिक, एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग मल्टी-कॉन्स्टेलेशन ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) एंटीना लगाया जाएगा.
आसान भाषा में कहें, तो अब दुश्मन चाहकर भी हमारे सुखोई फाइटर जेट्स के नेविगेशन सिस्टम को न तो ठप कर पाएगा और न ही उन्हें भटका पाएगा. यह पूरा प्रोजेक्ट वायुसेना के 'सुपर सुखोई' (Super Sukhoi) मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम का एक बेहद अहम हिस्सा है.
लल्लनटॉप से बातचीत में भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर जयदीप सिंह ने भी कंफर्म किया कि वायुसेना सुखोई-30 MKI को अपग्रेड करने की तैयारी कर चुकी है. उनके मुताबिक,
ये अपग्रेड Su30 MKI GPS पर लगे एंटीना को अपग्रेड करने के बारे में है.
ये अपग्रेड क्यों अहम है और इससे हासिल क्या होगा, आइये इन्हीं तकनीकी बातों को आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं.
क्या बला है ये जैमिंग और स्पूफिंग, जिसे रोकने की हो रही है तैयारी?
आजकल की लड़ाई सिर्फ गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि कंप्यूटर और सिग्नल्स से भी लड़ी जाती है. इसे तकनीकी भाषा में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (Electronic Warfare) कहते हैं. इसमें दो सबसे खतरनाक तरीके इस्तेमाल होते हैं- जैमिंग (Jamming) और स्पूफिंग (Spoofing). आइए इन्हें बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं.
जैमिंग (Jamming): मान लीजिए आप फोन पर किसी से बात कर रहे हैं और अचानक कोई बगल में आकर बहुत तेज लाउडस्पीकर बजा दे, तो आपको सामने वाले की आवाज सुनाई देना बंद हो जाएगी. जैमिंग तकनीक भी ठीक यही काम करती है. दुश्मन ताकतवर सिग्नल्स भेजकर फाइटर जेट के रिसीवर तक पहुंचने वाले सही सिग्नल को ब्लॉक या ठप कर देता है. इससे पायलट को रास्ता दिखना या जीपीएस सिग्नल मिलना बंद हो जाता है.
स्पूफिंग (Spoofing): यह जैमिंग से भी ज्यादा शातिर और खतरनाक है. इसमें दुश्मन सिग्नल को रोकता नहीं है, बल्कि आपके सिस्टम को एक नकली (गलत) सिग्नल भेजता है. यानी, पायलट को लगेगा कि उसका जीपीएस बिल्कुल सही काम कर रहा है, लेकिन असल में वो गलत रास्ते पर जा रहा होगा. इसे एक तरह से डिजिटली 'भटकाना' या 'धोखा देना' कह सकते हैं.
मगर अब जो नया एंटीना सुखोई में लगने जा रहा है, वो दुश्मन की इन दोनों चालों को पूरी तरह नाकाम कर देगा. दुश्मन कितनी भी कोशिश कर ले, हमारे सुखोई का जीपीएस न तो बंद होगा और न ही भटकेगा.
भारत का 'नाविक' और दुनिया के सैटेलाइट्स, सब मिलकर करेंगे काम
इस नए अपग्रेड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मल्टी-कॉन्स्टेलेशन (Multi-Constellation) तकनीक पर काम करेगा. इसका मतलब है कि यह एंटीना सिर्फ अमेरिका के जीपीएस (GPS) भरोसे नहीं रहेगा. यह एक साथ दुनिया के कई नेविगेशन सिस्टम से कनेक्ट हो सकता है, जिनमें शामिल हैं,
- NaVIC (भारत): भारत का अपना स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम.
- GPS (अमेरिका): ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम.
- GLONASS (रूस): रूस का सैटेलाइट नेविगेशन.
- BeiDou (चीन): चीन का नेविगेशन सिस्टम.
- Galileo (यूरोप): यूरोपीय संघ का सिस्टम.
- GAGAN (भारत): भारत का सैटेलाइट-बेस्ड ऑग्मेंटेशन सिस्टम.
रक्षा विशेषज्ञ और भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डॉ डी के पाण्डेय के मुताबिक,
इसका फायदा यह होगा कि अगर अंतरिक्ष में किसी एक देश का सैटेलाइट सिस्टम काम करना बंद भी कर दे या कोई दुश्मन देश अपने जीपीएस का एक्सेस ब्लॉक कर दे (जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान हुआ था), तो हमारा सुखोई तुरंत भारत के अपने 'नाविक' या रूस के 'ग्लोनास' पर शिफ्ट हो जाएगा.
यानी, आसान भाषा में कहें सुखोई कभी भी 'अंधा' नहीं होगा.
हवा में चीते की रफ्तार और 21 किमी की ऊंचाई पर भी करेगा काम
फाइटर जेट्स आम पैसेंजर प्लेन की तरह सीधे और शांत नहीं उड़ते. ये पल भर में आसमान छूते हैं, तो अगले ही पल कलाबाजियां खाते हुए जमीन की तरफ आते हैं. डिफेंस पोर्टल ‘इंडिया सेंटिनल’ के मुताबिक रक्षा मंत्रालय की रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) में ये साफ किया गया है कि इस नए एंटीना सिस्टम को सुखोई की पूरी उड़ने की क्षमता (Flight Envelope) के दौरान बिना रुके काम करना होगा. इसकी शर्तें कुछ ऐसी हैं,
21 किलोमीटर की ऊंचाई: ये एंटीना जमीन से 21 किमी ऊपर (करीब 68,000 फीट) की ऊंचाई पर भी पूरी तरह एक्टिव रहेगा.
मैक 1.5 की रफ्तार: जब सुखोई ध्वनि की रफ्तार से भी तेज यानी करीब 1800 किमी प्रति घंटा की स्पीड से उड़ रहा होगा, तब भी सिग्नल्स एकदम सटीक मिलेंगे.
-2g से 9g का दबाव: जब फाइटर जेट हवा में तीखे मोड़ लेता है, तो उस पर गुरुत्वाकर्षण बल (G-Force) का भारी दबाव पड़ता है. यह एंटीना -2g से लेकर 9g तक के भयंकर दबाव को झेलते हुए भी बिना फेल हुए काम कर सकेगा.
प्रोजेक्ट का पूरा प्लान, कितने एंटीना और कब तक होगा काम?
वायुसेना इस समय करीब 258 सुखोई (Su-30MKI) विमानों का संचालन करती है, जो हमारे बेड़े का सबसे मजबूत हिस्सा हैं. इस बड़े अपग्रेड के लिए रक्षा मंत्रालय ने पूरा खाका तैयार कर लिया है,
नोट: AI की मदद से तैयार ग्राफिक, स्रोत- रक्षा मंत्रालय की रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP)
यह काम बेहद तेज गति से होना है. ऑनलाइन बोलियां (Bids) आने के बाद अगले ही दिन टेक्निकल बिड खोल दी जाएगी, ताकि बिना वक्त गंवाए देश के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमान को और ज्यादा घातक बनाया जा सके.
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वायुसेना के लिए क्यों गेम चेंजर है ये अपग्रेड?
चीन और पाकिस्तान के साथ लगती सीमाओं पर जिस तरह से तनाव और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह अपग्रेड भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी ताकत बनने जा रहा है. 'सुपर सुखोई' बनने की दिशा में यह कदम हमारे विमानों की मारक क्षमता और उनकी पहुंच (Reach) को कई गुना बढ़ा देगा. अब हमारे पायलट दुश्मन के इलाके में बिना किसी डर के, सटीक नेविगेशन के साथ सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाइयों को अंजाम दे सकेंगे. दुश्मन का इलेक्ट्रॉनिक चक्रव्यूह अब भारत के सुखोई का रास्ता नहीं रोक पाएगा.
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