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फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे, कैसे पता चलेगा?

आज डॉक्टर से जानेंगे कि फेफड़ों को सबसे ज़्यादा नुकसान किन चीज़ों से होता है. फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे, इसके लक्षण क्या हैं. फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए कौन-सी आदतें अपनाएं और फेफड़ों को डिटॉक्स कैसे करें.

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फेफड़े शरीर का बहुत ज़रूरी अंग हैं (फोटो: Magnific)

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  • डॉक्टर नवनीत सूद ने बताया कि फेफड़ों को सबसे ज़्यादा नुकसान प्रदूषण, सिगरेट, बीड़ी, हुक्का और धुएं के संपर्क में आने से होता है।
  • फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के पीछे मुख्य कारण प्रदूषण, धुआं, सिगरेट पीना, चूल्हे का धुआं और उम्र बढ़ना है जो उनकी कार्य क्षमता को प्रभावित करता है।
  • फेफड़ों की सुरक्षा के लिए धुएं से दूर रहना, पर्याप्त पानी पीना, वैक्सीन लेना व समय पर डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है ताकि गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।

हमारी हर सांस के साथ फेफड़े लगातार काम करते हैं. ये हमारे खून में ऑक्सीज़न पहुंचाते हैं और शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं. फेफड़े अपना काम कर रहे हैं, तभी आप और हम आसानी से सांस ले पा रहे हैं. 

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इतने ज़रूरी होने के बावजूद कई बार हम खुद ही अपने फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं. इसलिए आज डॉक्टर से जानेंगे कि फेफड़ों को सबसे ज़्यादा नुकसान किन चीज़ों से होता है. फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे, इसके लक्षण क्या हैं. फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए कौन-सी आदतें अपनाएं और फेफड़ों को डिटॉक्स कैसे करें. 

फेफड़ों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाने वाली चीज़ें 

ये हमें बताया डॉक्टर नवनीत सूद ने. 

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डॉ. नवनीत सूद, एसोसिएट डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

फेफड़ों को सबसे ज़्यादा नुकसान प्रदूषण से होता है. सिगरेट, बीड़ी और हुक्का पीने से भी फेफड़ों को नुकसान होता है. जो लोग ऐसी जगहों पर काम करते हैं, जहां धुआं ज़्यादा होता है. जो लोग गांवों में धुएं या अंगीठी के पास बैठते हैं या जो महिलाएं चूल्हे पर खाना बनाती हैं. उनमें धुएं का एक्सपोज़र बढ़ जाता है. इन सबसे फेफड़ों को नुकसान हो सकता है. इससे फेफड़ों की काम करने की क्षमता कम हो सकती है. उम्र बढ़ने के साथ भी फेफड़ों की काम करने की क्षमता धीरे-धीरे घटती जाती है.

फेफड़े ठीक से काम न करने के लक्षण 

फेफड़े ठीक से काम न करने के शुरुआती लक्षणों में सांस फूलना शामिल है. खासकर जब पहले के मुकाबले ज़्यादा सांस फूलने लगे. कई लोगों की लाइफस्टाइल बहुत सुस्त होती है. इसलिए थोड़ा चलने पर भी उनकी सांस फूल सकती है. ऐसे लोगों के लिए ये उनका सामान्य स्तर हो सकता है. लेकिन अगर पहले आप एक किलोमीटर चलने पर नहीं थकते थे. पर अब 500 मीटर चलने पर ही सांस फूलने लगे, तो ये फेफड़ों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है.

इसके अलावा, लगातार खांसी और बलगम बने रहना भी एक लक्षण है. कभी-कभी ज़ुकाम और सिरदर्द भी हो सकता है. ये लक्षण इस बात का संकेत हैं कि फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं. अगर आपके पास पल्स ऑक्सीमीटर है और सांस ज़्यादा फूल रही है, तो अपना ऑक्सीज़न लेवल चेक कर सकते हैं. अगर ऑक्सीजन लेवल 90%  से नीचे आता है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

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फेफड़े हेल्दी कैसे रखें? 

सबसे पहला काम ये करें कि जहां भी धुआं हो, वहां से दूर रहें. धूल-मिट्टी और धुआं फेफड़ों के लिए बहुत नुकसानदेह हैं. इसलिए इन दोनों चीज़ों से बचने की कोशिश करें. पर्याप्त पानी पिएं, ये फेफड़ों की इम्यूनिटी में अहम भूमिका निभाता है. जब हाइड्रेशन ठीक रहेगा, तो फेफड़ों का डिफेंस सिस्टम भी ठीक से काम करेगा. इससे धूल-मिट्टी या इंफेक्शन जैसी चीज़ों से बचने में मदद मिल सकती है. 

कुछ वैक्सीन भी हैं, जो फेफड़ों की बीमारी वाले मरीज़ों को लगाई जाती हैं. कई बुज़ुर्गों को भी ये वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है. जैसे इंफ्लूएंज़ा की वैक्सीन हर साल लगाई जाती है. वहीं, न्यूमोकोकल वैक्सीन हर 5 साल में लगती है. फेफड़ों की कई बीमारियों में मरीज़ों को इनहेलर और खाने वाली दवाएं दी जाती हैं. 

कई लोगों को लगता है कि इनहेलर की आदत लग जाती है, इसलिए वो इसका इस्तेमाल नहीं करते. ऐसा नहीं करना चाहिए, दवा छोड़ने से फेफड़ों को नुकसान बढ़ सकता है. इसलिए डॉक्टर ने जो दवा लिखी है, उसे ज़रूर लें. अगर घर में कोई सिगरेट या बीड़ी पीता है, तो उसके धुएं का असर आसपास रहने वाले लोगों पर भी पड़ता है. इसे पैसिव स्मोकिंग या सेकंड हैंड स्मोकिंग कहते हैं. इससे दूर रहें क्योंकि ऐसे लोगों के पास बैठने से आपका भी धुएं से एक्सपोज़र होता है. खासकर बच्चे, बुज़ुर्ग और प्रेग्नेंट महिलाएं इसका खास ध्यान रखें.

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फेफड़ों को डिटॉक्स कैसे करें?

फेफड़ों को डिटॉक्स करने के लिए खूब पानी पिएं. लंबी गहरी सांसें लें. प्रदूषण के दौरान बाहर जाने से बचें. ऐसे समय ही बाहर जाएं, जब प्रदूषण कम हो. जैसे दोपहर में, क्योंकि सुबह और शाम को प्रदूषण ज़्यादा होता है. इसलिए सुबह टहलने वाले दोपहर में टहल सकते हैं. आप चाहें तो घर पर ही एक्सरसाइज़ कर सकते हैं.

अगर थोड़ा काम करने पर भी आपकी सांस फूल रही है. बहुत खांसी आ रही है या बलगम बन रहा है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि समय से इलाज न कराने पर मरीज़ को वेंटिलेटर या ऑक्सीज़न थेरेपी की ज़रूरत भी पड़ सकती है. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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