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यूपी के इस गांव में आई बड़ी आफत, रेजर के ब्लेड से पुरुषों में फैला हेपेटाइटिस!

उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के एक गांव में 95 से ज़्यादा लोगों को हेपेटाइटिस B और C हो गया है. डॉक्टर से जानिए इस खतरनाक वायरस से कैसे बचें?

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शुरुआती जांच के मुताबिक, इस गांव में एक भी सैलून नहीं है. इसलिए आसपास के गांवों से कई हजाम यहां आते हैं. (फोटो: Freepik)

सीतापुर. उत्तर प्रदेश का एक ज़िला है. यहां के एक गांव में हेपेटाइटिस B और C के अचानक कई मामले सामने आने से हड़कंप मच गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गांव में 95 से ज़्यादा लोगों को हेपेटाइटिस B और C हो गया है. इतने सारे मामलों को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जांच शुरू कर दी है. 

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शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस गांव में एक भी सैलून नहीं है. इसलिए आसपास के गांवों से कई हजाम यहां आते हैं. गांव के कई पुरुष उनसे बाल कटवाते हैं और दाढ़ी बनवाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा शक है कि हजाम, ब्लेड या शेविंग उपकरणों को बिना साफ़ किए लगातार इस्तेमाल कर रहे थे. जिससे गांव के कई पुरुष हेपेटाइटिस B और C वायरस की चपेट में आ गए.

हालांकि, इस गांव में हेपेटाइटिस B और C फैलने का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है. पर शेविंग और हेयरकट में इस्तेमाल होने वाले रेज़र्स और ब्लेड को ही इसकी वजह माना जा रहा है. फिलहाल प्रशासन ने हेपेटाइटिस को फैलने से रोकने के लिए गांव में स्क्रीनिंग और टेस्टिंग अभियान शुरू कर दिया है.

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अब ये हेपेटाइटिस B और C क्या है? क्या ये ब्लेड और रेज़र से फैल सकता है? ये सवाल हमने पूछे मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोग्राम क्लीनिकल डायरेक्टर और हेड, डॉक्टर बीर सिंह सहरावत से.

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बीर सिंह सहरावत, प्रोग्राम क्लीनिकल डायरेक्टर एंड हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद)

डॉक्टर बीर कहते हैं कि हेपेटाइटिस लिवर की एक बीमारी है. इसमें लिवर में सूजन आ जाती है. ये सूजन किसी भी वजह से हो सकती है. जैसे शराब पीने, किसी दवा के साइड इफ़ेक्ट या फिर इंफेक्शन के चलते. जब लिवर की सूजन किसी खास वायरस की वजह से हो, तो इसे वायरल हेपेटाइटिस कहते हैं. हेपेटाइटिस B और C, इसी वायरल हेपेटाइटिस के प्रकार हैं. ये वायरस अनसेफ सेक्स, संक्रमित खून चढ़ाने या संक्रमित सुई के इस्तेमाल से फैल सकते हैं. अगर मां इंफेक्टेड है, तो वायरस गर्भ में बच्चे तक भी पहुंच सकता है.

अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो ब्लेड या रेज़र के बार-बार इस्तेमाल से भी हेपेटाइटिस B और C फैल सकता है. दरअसल, ये दोनों वायरस खून के ज़रिए फैलते हैं. अगर किसी व्यक्ति को हेपेटाइटिस B या C है. अगर उसका इस्तेमाल किया गया ब्लेड, कोई और व्यक्ति इस्तेमाल कर ले, तो उसे भी हेपेटाइटिस हो सकता है. शेव या बाल काटते हुए, कभी-कभी स्किन ब्लेड से कट जाती है. उसपर खून लग जाता है. अगर यही ब्लेड बिना साफ़ किए, दोबारा किसी और पर इस्तेमाल किया जाए तो हेपेटाइटिस का इंफेक्शन उस में भी फैल सकता है.

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लिहाज़ा, जब भी आप शेव या बाल कटवाने जाएं. तो सैलून वाले को हमेशा नया ब्लेड इस्तेमाल करने को कहें. ये भी देखें कि वो ब्लेड बदल रहा है या नहीं. आप अपना पर्सनल रेज़र या ट्रिमर भी साथ ले जा सकते हैं. अगर ट्रिमर इस्तेमाल हो रहा है, तो उसके हेड्स को यानी जिस हिस्से से वो स्किन को छूता है. उसे हर इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह साफ़ करना ज़रूरी है.

अक्सर हेपेटाइटिस B और C के शरुआती लक्षण नहीं दिखते. सीतापुर के गांव में भी कुछ ऐसा ही हुआ. लोगों में हेपेटाइटिस B और C के शुरुआती लक्षण नहीं दिखे. जब कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में ब्लड टेस्ट किए गए, तब लोगों को हेपेटाइटिस होने का पता चला.

हालांकि, इन्फेक्शन बढ़ने पर कुछ लक्षण महसूस होते हैं. जैसे लगातार थकान रहना, भूख न लगना, उबकाई-उल्टी आना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना (खासकर दाईं ओर, जहां लिवर होता है), पेशाब का रंग गाढ़ा हो जाना और स्किन और आंखें पीली पड़ना.  

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हेपेटाइटिस B और C लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं, इससे लिवर सिरोसिस या कैंसर तक हो सकता है

हेपेटाइटिस B और C लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं. जिससे लिवर सिरोसिस या कैंसर तक हो सकता है. इसलिए बचाव बेहद ज़रूरी है.

हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए वैक्सीन आती है. इसे लगवाएं. वहीं हेपेटाइटिस C से बचने के लिए कोई वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है. इसलिए सतर्कता बरतना ज़रूरी है. साफ-सफाई का ध्यान रखें. केवल विश्वासनीय ब्लड बैंक से ही खून लें. इंजेक्शन या ब्लड टेस्ट करवाते समय ध्यान रखें कि सिरिंज एकदम नई हो. 

इलाज की बात करें तो हेपेटाइटिस B का पूरी तरह इलाज मुमकिन नहीं है. लेकिन कुछ खास एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं. ये वायरस को दबाकर लिवर को नुकसान से बचाती हैं. अगर हेपेटाइटिस B की वजह से लिवर में कैंसर हो जाता है. तो सर्जरी करके लिवर का एक हिस्सा या पूरा लिवर हटाया जा सकता है और फिर लिवर ट्रांसप्लांट करना पड़ सकता है.

वहीं हेपेटाइटिस C का इलाज एंटी-वायरल दवाइयों से किया जाता है. आमतौर पर, इससे मरीज़ पूरी तरह ठीक हो जाता है. हालांकि अगर लिवर को बहुत ज़्यादा नुकसान पहुंचा है. तो लिवर ट्रांसप्लांट भी करना पड़ सकता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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