सनशाइन विटामिन. जानते हैं, ये किस विटामिन का निकनेम है? विटामिन D का. इसे सनशाइन विटामिन इसलिए कहते हैं, क्योंकि इसका सबसे अच्छा सोर्स है धूप. आप आधा घंटा-40 मिनट हल्की धूप में बैठिए. आपका शरीर खुद-ब-खुद विटामिन D बनाने लगेगा. सोचिए कितना आसान है इसे पाना.
विटामिन D सप्लीमेंट लेना फायदेमंद, पर ये गलती की तो हमेशा के लिए किडनी खराब
विटामिन D फैट सॉल्यूबल यानी चर्बी में घुलने वाला विटामिन है. इसका काम हड्डियों को मज़बूत करना और इम्यूनिटी बढ़ाना है.


फिर भी हर 5 में से 1 भारतीय में विटामिन D की कमी होती है. और जैसे ही लोगों को इसका पता चलता है. वो विटामिन D के सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं. कई बार डॉक्टर से पूछकर, तो कई बार बिना पूछे. अब अगर डॉक्टर से पूछकर ले रहे हैं. जितना उन्होंने कहा है, उतनी डोज़ ले रहे हैं. तब तो ठीक है. लेकिन अगर बिना सलाह-मशविरा के ये सप्लीमेंट लेना शुरू किया है. और लिए ही जा रहे हैं. तो ज़रा बचके, आप अपनी किडनी को मुसीबत में डाल रहे हैं.
कब विटामिन D सप्लीमेंट से किडनी को नुकसान पहुंचने लगता है, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि विटामिन D सप्लीमेंट लेने की ज़रूरत क्यों पड़ती है. इसकी कितनी डोज़ लेना सेफ़ है. और बिना सप्लीमेंट नेचुरली विटामिन D लेवल कैसे बढ़ाएं.
ये हमें बताया डॉक्टर तुषार तायल ने.

विटामिन D फैट सॉल्यूबल यानी चर्बी में घुलने वाला विटामिन है. इसका काम हड्डियों को मज़बूत करना और इम्यूनिटी बढ़ाना है. विटामिन D सप्लीमेंट लेने की ज़रूरत उन लोगों को पड़ती है, जो बहुत ज़्यादा धूप में नहीं निकलते. जैसे बुज़ुर्ग, जो घर से बाहर कम ही निकलते हैं. जिन्हें लंबे वक्त तक चलने वाली कोई बीमारी है, जैसे क्रोनिक किडनी डिज़ीज़. पेट से जुड़ी क्रोनिक दिक्कतें, जैसे एसिडिटी या दस्त हैं. ऐसे लोगों में विटामिन D सही से एब्ज़ॉर्व नहीं हो पाता. फिर अगर टेस्ट्स में पता चलता है कि शरीर में विटामिन D की कमी है. तब डॉक्टर विटामिन D सप्लीमेंट लेने को कह सकते हैं.
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विटामिन D एक फैट-सॉल्यूबल विटामिन है. ये शरीर में फैट यानी चर्बी में जमा होता है. जब हम विटामिन D सप्लीमेंट खाते हैं. तब ये आंतों से कैल्शियम और फॉस्फोरस का एब्ज़ॉर्प्शन बढ़ा देता है. जो जाकर हड्डियों पर चिपकते हैं, जिससे हड्डियां मज़बूत होती हैं. अगर बहुत लंबे वक्त तक बिना किसी सुपरविज़न के विटामिन D सप्लीमेंट लिए जाएं. तो उससे खून में कैल्शियम का लेवल बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है. ये कैल्शियम किडनी में जमा होकर किडनी स्टोन बना सकता है. खून को गाढ़ा कर सकता है. किडनी को कुछ वक्त या हमेशा के लिए नुकसान भी पहुंचा सकता है. इसलिए विटामिन D सप्लीमेंट हमेशा डॉक्टर के कहने पर ही लेने चाहिए. बिना ज़रूरत लंबे समय तक विटामिन D सप्लीमेंट न खाएं.

एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज़ 600–800 IU विटामिन D की ज़रूरत होती है. कुछ गाइडलाइंस के अनुसार, ज़रूरत पड़ने पर 2000 IU प्रतिदिन तक का विटामिन D सप्लीमेंट लिया जा सकता है. कुछ परिस्थितियों में और डॉक्टर की सलाह पर 4000 IU प्रतिदिन तक की डोज़ भी दी जा सकती है. कई डॉक्टर 60,000 IU हफ्ते में एक बार 3-4 महीने तक लेने की सलाह देते हैं. इसके बाद अक्सर हर 15 दिन में एक बार मेंटेनेंस डोज़ दी जाती है, ताकि शरीर में विटामिन D का लेवल बना रहे. बस ध्यान रखें कि विटामिन D सप्लीमेंट हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लें.
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बिना सप्लीमेंट नेचुरली विटामिन D लेवल कैसे बढ़ाएं?विटामिन D नेचुरली बढ़ाने के लिए रोज़ थोड़ी देर धूप में बैठें. आप हल्की धूप में कोई खेल खेल सकते हैं. अगर हाथ, चेहरे और पैरों पर आधा-पौने घंटा धूप पड़े. तब शरीर के फैट में खुद से विटामिन D बनना शुरू हो जाता है.
इसके अलावा, अंडा और मछली खाने से विटामिन D मिलता है. डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही, पनीर और चीज़ में विटामिन D होता है. मशरूम में भी अच्छी मात्रा में विटामिन D पाया जाता है. इन चीज़ों को खाकर और थोड़ी देर धूप में रहकर विटामिन D लेवल मेंटेन किया जा सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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