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अचानक भारतीय क्यों बेचने लगे घर में रखा सोना? 3 महीने में 50 टन सोना बिका

Gold Price Update: भारतीय निवेशकों के बीच सोना हमेशा से निवेश का लोकप्रिय जरिया रहा है. हालांकि, पिछले 3 महीने में भारतीयों ने रिकॉर्ड मात्रा में सोना बेचा है. इस पीली धातु के दाम में उतार-चढ़ाव के साथ ही वैश्विक परिस्थितियां भी इसके पीछे वजह हैं.

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भारत ने वित्त वर्ष 2025-2026 में लगभग6.83 लाख करोड़ रुपये कीमत का सोना विदेशों से खरीदा है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीयों ने लगभग 50 टन सोना बेचा है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 43 प्रतिशत अधिक है।
  • सोने की कीमतों में गिरावट के डर के कारण उपभोक्ता अपने पुराने सोने को बेच रहे हैं क्योंकि कीमतें 1 लाख 40 हजार रुपये प्रति दस ग्राम से घटकर संभावित रूप से 1 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच सकती हैं।
  • सोने की बिक्री बढ़ने से गोल्ड रिसाइक्लिंग उद्योग को लाभ हुआ है और अनुमान है कि साल 2026 के लिए रिसाइकिल गोल्ड की मात्रा 200-250 टन तक बढ़ सकती है।

सोने की कीमतों में संभावित गिरावट के डर से देशभर में बड़ी तादाद में लोग अपने सोने के गहने बेच रहे हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के हवाले से बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान भारतीयों ने करीब 50 टन सोना बेचा है. यह पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के मुकाबले 43 परसेंट ज्यादा है. 

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भारतीय अचानक पुराना सोना क्यों बेचने लगे?

पिछले कुछ समय से सोने के दाम तेजी से गिरे हैं. फिलहाल सोने के दाम 1 लाख 40 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास चल रहे हैं. लोगों को चिंता सता रही है कि आगे कीमतों में और गिरावट आ सकती है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सोने की कीमतें 1 लाख 20 हजार रुपये प्रति दस ग्राम पर आ सकती हैं. ऐसे में कई उपभोक्ता नए गहनों के बदले पुराने गहने खरीदने के बजाय पुराना सोना बेचकर मुनाफा कमाना पसंद कर रहे हैं.

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा, "भारतीय उपभोक्ता नकदी जुटाने के लिए सोने की ऊंची कीमतों का फायदा उठा रहे हैं. हालांकि, साल की शुरुआत में कीमतें 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर से गिरकर 1.4 लाख रुपये तक आ गई हैं, लेकिन लोगों को लग रहा है कि आगे कीमतें और गिरकर 1.2 लाख रुपये तक जा सकती हैं. इस वजह से वे सोना बेचकर पैसा जुटा रहे हैं."

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गोल्ड रिसाइक्लिंग में तेजी 

पिछले कुछ समय से सोने के दाम काफी ऊपर जा चुके हैं. इसके चलते लोग पुराने सोने के गहने बेचने या एक्सचेंज करने को भी तवज्जो दे रहे हैं. पहले जो सोना तिजोरी में पड़ा रहता था, अब उसे लोग बेचकर कैश जुटा रहे हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा भारत के संगठित गोल्ड रीसाइक्लिंग उद्योग को भी मिल रहा है.

सोना खरीदने वाली कंपनियों में भी इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. मुथूट एक्जिम ने देशभर में फैले अपने 100 से ज्यादा सेंटर में पुराने सोने की मात्रा में 40% की वृद्धि दर्ज की है. कंपनी ग्राहकों से सीधे पुराना सोना खरीदती है, उसे 24 कैरेट शुद्ध सोने में बदल देती है. इस सोने को कंपनी देशभर के ज्वेलर्स को बेच देती है.

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यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत आयातित सोने पर सबसे ज्यादा निर्भर है. भारत ने वित्त वर्ष 2025-2026 में लगभग 72.4 अरब डॉलर (6.83 लाख करोड़ रुपये) कीमत का सोना विदेशों से खरीदा है. कैलैंडर ईयर 2025 ( एक जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच) रिसाइकिल गोल्ड की हिस्सेदारी करीब 125-150 टन रही है. उद्योग के अनुमानों के अनुसार, अगर आगे भी इस तरह से सोने की रिसाइक्लिंग होती रही तो रिसाइकिल गोल्ड की मात्रा कैलेंडर ईयर 2026 में बढ़कर 200-250 टन हो सकती है.

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