हाथ-पैरों में कहीं सूजन आती है, तो तुरंत दिख जाता है. मसूड़े सूजें या चेहरे पर कहीं सूजन आए, तो भी देखने से पता चल जाता है. लेकिन अगर आंतों में सूजन हो, तो उसे देखा थोड़ी जा सकता है. ऐसे में आपको उन वॉर्निंग साइन्स पर ध्यान देना होगा. जो शरीर आपको भेज रहा है. क्योंकि अगर आंतों में सूजन बढ़ती गई तो शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं मिलेगा. इससे आप बीमार रहने लगेंगे.
स्टूल में खून, दस्त, बुखार जैसे लक्षणों को हल्के में न लें, आतें सूजी हो सकती हैं
छोटी और बड़ी आंत में सूजन के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. छोटी आंत में सूजन होने पर वज़न कम होना, बुखार और दस्त जैसे लक्षण दिख सकते हैं. वहीं, बड़ी आंत में सूजन होने पर स्टूल से जुड़ी दिक्कतें होती हैं.


अब छोटी आंत या बड़ी आंत में सूजन होने पर कौन-से लक्षण दिखते हैं. ये जानेंगे आज डॉक्टर से. ये भी समझेंगे कि आंतों में सूजन क्यों आ जाती है. आंतों में सूजन होने पर इलाज क्या किया जाता है. और इससे बचने का तरीका क्या है.
आंतों में सूजन के कारणये हमें बताया डॉक्टर सुकृत सिंह सेठी ने.

इंस्टेस्टाइनल इंफ्लेमेशन यानी आंतों में सूजन आना. आंतों में सूजन के कई कारण हो सकते हैं. सबसे आम कारण इंफेक्शन है, जो बैक्टीरिया या पैरासाइट की वजह से हो सकता है. ऐसे मामलों में एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. आंतों में सूजन का एक कारण ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) भी है. टीबी की वजह से आंतों में सूजन और रुकावट होना आम है. इससे वज़न तेज़ी से कम हो सकता है और बुखार भी आ सकता है.
इंफेक्शन के अलावा क्रोहन डिज़ीज़ भी आंतों में सूजन कर सकता है. क्रोहन डिज़ीज़ बड़ी और छोटी, दोनों आंतों को प्रभावित कर सकती है. वहीं, अल्सरेटिव कोलाइटिस सिर्फ़ बड़ी आंत में होती है. अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन डिज़ीज़, दोनों IBD (इंफ्लेमेट्री बॉवेल डिज़ीज़) के प्रकार हैं. अल्सरेटिव कोलाइटिस में स्टूल के साथ खून आना आम लक्षण है. वहीं, क्रोहन डिज़ीज़ में पेट दर्द और दस्त की समस्या देखी जाती है.
आंतों में सूजन के लक्षणछोटी और बड़ी आंत में सूजन के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. छोटी आंत में सूजन होने पर वज़न कम होना, बुखार और दस्त जैसे लक्षण दिख सकते हैं. वहीं, बड़ी आंत में सूजन होने पर स्टूल के साथ खून आ सकता है. बार-बार स्टूल पास करने की ज़रूरत महसूस हो सकती है. स्टूल पास करने के बाद भी पेट पूरी तरह साफ़ न होने का एहसास बना रह सकता है. ये आंतों में सूजन के कुछ आम लक्षण हैं.

अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन डिज़ीज़, IBD से जुड़ी ऑटोइम्यून बीमारियां हैं. इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही आंतों को नुकसान पहुंचाने लगता है. इलाज के लिए इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयां दी जाती हैं. गंभीर मामलों में बायोलॉजिक दवाओं का इस्तेमाल भी किया जाता है. इन दवाओं से सूजन कम करने और लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. ज़्यादातर मामलों में लंबे समय तक दवा लेनी पड़ सकती है. फिर मरीज़ की हालत बेहतर होने पर डॉक्टर दवाइयां कम कर सकते हैं.
आंतों में सूजन से बचावआंतों में सूजन से बचने के लिए साफ़ खाना खाएं. जहां साफ़-सफ़ाई ठीक न हो, वहां का खाना खाने से बचें. हमेशा साफ़ पानी पिएं. टायफॉइड में भी आंतों में सूजन हो सकती है. टायफॉइड दूषित खाने और पानी से फैलता है. इसलिए सिर्फ साफ़-सुथरा खाना ही खाएं. बाहर का खाना अवॉइड करें. ज़्यादा पेनकिलर्स और स्टेरॉयड आंतों में छाले कर सकते हैं. इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लें. अगर किसी को IBD है, तो नियमित फॉलोअप और चेकअप कराना ज़रूरी है. समय-समय पर जांच से दवाइयों को सही तरीके से एडजस्ट करने में मदद मिलती है.
अगर आपके पेट में अक्सर दर्द रहे. वेट लॉस हो. बुखार आए. बार-बार उल्टियां हों, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. ऐसी कोई भी दिक्कत होने पर डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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