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पेट्रोल-एलपीजी की वजह से बजट बिगड़ गया है? इन स्मार्ट तरीकों को अपनाएं, होगी बढ़िया सेविंग

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जब दुनिया में कच्चे तेल के दाम लगातार उछल रहे हैं. एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं तो वे दिन दूर नहीं जब भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा हो सकता है. जब तेल और गैस के दाम बढ़ते हैं तो देर-सबेर बिजली की दरें भी बढ़ जाती हैं. लेकिन सवाल ये है कि आप एनर्जी सेविंग्स और पैसे बचाने के लिए क्या कर रहे हैं.

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जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में 10% तक की वृद्धि हो सकती है (फोटो क्रेडिट: India Today)

केस 1-
दिल्ली में रजत ग्रेवाल जब भी अपनी महिंद्रा थार में डीजल भरवाते हैं, तो उन्हें लगभग 3,000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं. वे महीने में लगभग दो बार ऐसा करते हैं. इस तरह से वे डीजल पर ही हर महीने 5,500 रुपये से ज्यादा खर्च करते हैं. यह तो पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले की बात है यानी जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल इतना महंगा नहीं हुआ था. लेकिन अब कयास लग रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल महंगा हो सकता है. तब तो रजत का खर्च और बढ़ जाएगा.

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केस 2-
दिल्ली से लगभग 900 किलोमीटर दूर अहमदाबाद के रहने वाले कुंजन भावसर ने महीनों से अपना बिजली का बिल नहीं भरा है. क्योंकि उनको इसकी जरूरत नहीं पड़ी. साल 2024 में कुंजन ने अपनी छत पर सोलर सिस्टम लगवा लिया था . यह सोलर सिस्टम उनके घर की खपत से ज्यादा बिजली पैदा करता है. उनका यह सोलर सिस्टम 5-6 साल में अपनी लागत वसूल कर लेगा. 

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में इन दो उदाहरणों से बताया गया है कि एक व्यक्ति अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी भी परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर है. वहीं दूसरा व्यक्ति रिन्यूबल एनर्जी यानी सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करके पैसों की बचत कर रहा है.

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी दिख रही है. एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं तो वे दिन दूर नहीं जब भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा हो सकता है. जब तेल और गैस के दाम बढ़ते हैं तो देर-सबेर बिजली की दरें भी बढ़ जाती हैं. लेकिन सवाल ये है कि आप एनर्जी सेविंग्स और पैसे बचाने के लिए क्या कर रहे हैं.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर लोग इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), छत पर सोलर सिस्टम या इंडक्शन कुकटॉप का इस्तेमाल करते हैं तो यह प्रदूषण के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है. साथ ही आर्थिक बचत भी हो सकती है. हालांकि शुरू में हो सकता है कि आपको एक सेटअप बनाने में खर्च करना पड़े, लेकिन लंबी अवधि में फायदा हो सकता है.

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क्या ईवी में शिफ्ट होना समझदारी भरा कदम है?

रिपोर्ट बताती है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को ईंधन की बढ़ती कीमतों से होने वाले नुकसान को कम करने के एक व्यावहारिक तरीके के रूप में देखा जा रहा है. खासकर उन परिवारों के लिए जो रोजाना ट्रैवल करते हैं. कुछ लोग नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने के सस्ते विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक वाहन को रेट्रोफिट करने पर भी विचार कर रहे हैं. हालांकि बाजार अभी भी सीमित है लेकिन बढ़ रहा है.

इलेक्ट्रिक वाहनों का असली फायदा तब पता चलता है जब इसकी तुलना प्रति किलोमीटर के आधार पर की जाती है. ग्रीन ड्राइव मोबिलिटी के सीईओ हरि कृष्णा के अनुसार, "पेट्रोल और डीजल कारों को चलाने में लगभग 6.6 रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च आता है, जबकि घर पर चार्ज होने वाली इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को चलाने में लगभग 1.2 रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च आता है. इस तरह से पेट्रोल-डीजल से चलने वाले इंजन वाली गाड़ियों की तुलना में इन्हें चलाना पांच गुना सस्ता है."

जानकारों का कहना है कि अभी जो पेट्रोल और डीजल का भाव चल रहा है उस हिसाब से  दिल्ली में रोज कार इस्तेमाल करने वालों के लिए पेट्रोल कारों का सालाना ईंधन खर्च लगभग 85,000 रुपये और डीजल कारों का 1.2 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. लेकिन ईंधन की कीमतों में अगर थोड़ी भी बढ़ोतरी होती है तो यह खर्च काफी बढ़ सकता है.

कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि तनाव बढ़ने की स्थिति में इसका असर और गहरा हो सकता है. INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी कहते हैं, “अगर तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर के करीब बनी रहती हैं, तो ईंधन की कीमतों में 10% तक की वृद्धि हो सकती है.” क्लीन-एनर्जी कंपनी ग्रीनवे ग्रामीण के को फाउंडर अंकित माथुर कहते हैं, “सबसे खराब स्थिति में भी 15-20% की का इजाफा हो सकता है."

आपकी जेब पर कितना असर?

मान लीजिए अगर आप दिल्ली में रोज कार चलाते हैं और हर दिन 1.5-4 लीटर पेट्रोल या डीजल  खर्च करते हैं. फिलहाल पेट्रोल का रेट 94.77 रुपये प्रति लीटर है और डीजल का भाव 87.67 रुपये प्रति लीटर है. आइए इस कैलकुलेशन को समझते हैं.

गाड़ी मॉडल-मौजूदा सालाना खर्च -मामूली दाम बढ़ने पर- ज्यादा दाम (20%) बढ़ने पर 
पेट्रोल (कार) ₹51,100 – ₹85,000 ₹53,800 – ₹89,700 ₹61,400 – ₹1.02 लाख
डीजल (कार) ₹63,000 – ₹1,26,000 ₹66,600 – ₹1.33 लाख ₹75,700 – ₹1.51 लाख

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दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटी सब्सिडी

सरकारी सब्सिडी और कम मेंटनेंस कॉस्ट ने इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया है. दिल्ली में नई कार खरीदने पर आपको स्क्रैप से जुड़ी 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है. हालांकि, इसका आर्थिक फायदा काफी हद तक वाहन के इस्तेमाल  पर निर्भर करता है. घर पर चार्जिंग करने से लागत का लाभ सबसे ज्यादा होता है, क्योंकि घर पर बिजली के चार्ज कम होते हैं. हालांकि अभी भी देश में ईवी का बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है. इस वजह ज्यादातर लोग लंबी दूरी की यात्रा की तुलना में शहरी क्षेत्रों में ही ईवी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इसके अलावा ईवी की बैटरी बदलना भी काफी खर्चीला है. इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) किसी घर की बिजली खपत में प्रति माह कम से कम 200 यूनिट की वृद्धि कर सकता है. इसका मतलब है कि 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से सालाना लागत लगभग 12,000 रुपये होगी. इस वृद्धि के बावजूद, समान उपयोग के लिए पेट्रोल या डीजल की तुलना में कुल परिचालन लागत काफी कम रहती है. यह उन घरों के लिए फायदेमंद है जिनके पास पहले से ही रूफटॉप सोलर सिस्टम हैं या जो इसे लगवाने की योजना बना रहे हैं.

सौर पैनल लगवाने से कितना फायदा

बिजली का बिल कम करने के लिए रूफटॉप सोलर पैनल को एक कारगर उपाय के रूप में देखा जा रहा है. अहमदाबाद के रहने वाले अंकित भावसर (जिनका हमने ऊपर खबर की शुरुआत में जिक्र किया) अपने सोलर पैनल लगवाने के फैसले से बेहद संतुष्ट हैं . उन्हें इस बात की तसल्ली है कि अगर दरें बढ़ती भी हैं, तो उनको बिजली के बढ़े दाम नहीं चुकाने होंगे. भावसार कहते हैं, “कम खपत वाले महीनों के दौरान, मैंने बिजली का बिल जीरो चुकाया है और मुझे 1,000-2,000 रुपये तक का क्रेडिट भी मिला है.”

शुरुआत में लागत ज्यादा लेकिन लंबी अवधि में फायदा

घरों में एनर्जी स्टोरेज से जुड़ी जरूरतें पूरी करने वाली कंपनी लिवगार्ड ने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा कि रूफटॉप ऑन-ग्रिड सौर प्रणाली की शुरुआती लागत आमतौर पर 3 किलोवाट सिस्टम के लिए 1.5 लाख रुपये से 2.2 लाख रुपये और 5 किलोवाट सिस्टम के लिए 2.5 लाख रुपये से 3.2 लाख रुपये तक होती है.

वहीं, अंकित भावसर के 3.3 किलोवाट के ग्रिड पैनल की स्थापना ला लागत लगभग 1.8 लाख रुपये थी, जो सब्सिडी के बाद घटकर लगभग 1.2 लाख रुपये रह गई. पिछले दो महीनों में, अंकित भावसर ने सरप्लस बिजली उत्पादन से लगभग 1,200 रुपये कमाए. उनका कहना है कि अगले पांच से छह साल में वे लागत की भरपाई कर लेंगे. रिपोर्ट बताती बै कि सरकारी सब्सिडी से और फायदा मिलता है. प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत छत पर सौर पैनल लगवाने के लिए 78,000 रुपये तक की सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं. यह  लागत की वसूली अवधि तीन से छह वर्ष तक कम हो सकती है.

लिवगार्ड कंपनी के मुताबिक , कई शहरी परिवारों के लिए, सौर ऊर्जा की लागत में कमी  औसत अवधि इस्तेमाल के पैटर्न, सिस्टम की लागत और प्रदर्शन के आधार पर 6-10 साल तक होती है. हालांकि, सौर ऊर्जा हर परिवार के लिए आर्थिकरूप से फायदेमंद नहीं है. अगर आपके राज्य में बिजली सस्ती है तो सोलर पैनल लगाने का फायदा नहीं है.

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एलपीजी की जगह खाने पकाने के लिए क्या करें?

एलपीजी खाना पकाने का प्रमुख ईंधन बना हुआ है. यह वैश्विक मूल्य झटकों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले ईंधनों में से एक है. क्लीन-एनर्जी कंपनी ग्रीनवे ग्रामीण के को फाउंडर अंकित माथुर कहते हैं, “परिवारों को एलपीजी की लागत में वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए. घरेलू सिलेंडर की कीमत में समय के साथ 300-400 रुपये की वृद्धि अनुचित नहीं होगी.

वह परिवारों को सलाह देते हैं कि वे रोजमर्रा के कामों के लिए एलपीजी के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कुकिंग का भी इस्तेमाल करें. इंडक्शन कुकिंग का उपयोग पानी उबालने, चावल पकाने और खाना गर्म करने जैसे रोजमर्रा के कामों के लिए तेजी से बढ़ रहा है. 

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