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बढ़ती उम्र का सबसे पहला असर दिखता है आंखों पर! जानिए कहीं आप भी तो बूढ़े नहीं हो रहे?

एजिंग का पहला लक्षण हैं झुर्रियां. उम्र बढ़ने के साथ स्किन में कोलेजन और इलास्टिन नाम के प्रोटीन का प्रोडक्शन कम हो जाता है. इससे स्किन का लचीलापन घट जाता है और झुर्रियां नज़र आने लगती हैं.

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आंखों के आसपास ये बदलाव दिखें तो समझ जाएं कि स्किन बूढ़ी हो रही है (फोटो: Getty Images)

बढ़ती उम्र के साथ हमारी स्किन में कई बदलाव आने लगते हैं. इन बदलावों का सबसे पहला असर दिखता है, हमारी आंखों के आसपास. दरअसल, आंखों के आसपास की स्किन बहुत पतली और नाज़ुक होती है. ऐसे में जब उम्र बढ़ती है. तो सबसे पहला असर यहीं दिखता है. जैसे…

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झुर्रियां आना 

कॉस्मेटोलॉजिस्ट प्रियंका वाधवानी  कहती हैं कि एजिंग स्किन का पहला लक्षण हैं झुर्रियां. आंखों के कोनों पर बनने वाली बारीक लाइन्स को क्रो’ज़ फीट कहा जाता है. क्योंकि, ये छोटे कौए के पैर जैसी दिखती हैं. ये लाइनें तब उभरती हैं, जब आप मुस्कुराते हैं, आंखें मिचकाते हैं, या फिर बहुत एक्सप्रेशंस देकर बात करते हैं. उम्र बढ़ने के साथ स्किन में कोलेजन और इलास्टिन नाम के प्रोटीन का प्रोडक्शन कम हो जाता है. इससे स्किन का लचीलापन घट जाता है. और, झुर्रियां नज़र आने लगती हैं.

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प्रियंका वाधवानी, सर्टिफाइड कॉस्मेटोलॉजिस्ट, इंदौर

डार्क सर्कल्स

दूसरा लक्षण है, डार्क सर्कल्स यानी स्किन के नीचे काले घेरे. उम्र बढ़ने के साथ स्किन पतली होने लगती है. जिससे खून की नलियां ज़्यादा साफ दिखने लगती है. इससे आंखों के नीचे काले घेरे नज़र आने लगते हैं. पर्याप्त नींद न लेने, स्ट्रेस में रहने, अनहेल्दी खाने और बहुत धूप में रहने से डार्क सर्कल्स बढ़ जाते हैं.

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आंखों के आसपास सूजन

तीसरा लक्षण पफी आईज़ हैं. यानी आंखों के आसपास सूजन या आंखों के नीचे की स्किन फूली हुई लगना. उम्र बढ़ने के साथ स्किन की लोच कम हो जाती है. लोच का मतलब है, स्किन कितनी खिंच सकती है और फिर वापस अपने आकार में आ सकती है. लोच कम होने से आंखों के नीचे सूजन नज़र आने लगती है. हालांकि, ये दिक्कत शरीर में पानी की कमी, किसी एलर्जी, खराब लाइफस्टाइल और नींद की कमी की वजह से भी हो सकती है.

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अपनी स्किन का ख्याल रखना ज़रूरी है वरना एजिंग साफ नज़र आएगी

आंखों के नीचे खोखलापन

चौथा लक्षण है, आंखों के नीचे खोखलापन. इसे Sunken Eyes भी कहते हैं. देखिए, उम्र बढ़ने के साथ स्किन में कोलेजन और फैट की मात्रा कम होने लगती है. इससे आंखों के नीचे की स्किन और भी पतली और नाज़ुक हो जाती है. इससे आंखों के नीचे खोखलापन आने लगता है. जिससे चेहरा थका हुआ लगता है.

हेवी आईलिड्स

पांचवा लक्षण है, Heavy Eyelids यानी ऊपरी पलकों का भारी होना. इससे स्किन झुकने लगती है. ऐसा स्किन का लचीलापन कम होने की वजह से होता है. जिससे पलकें भारी लगने लगती हैं. कई बार ये दिक्कत इतनी बढ़ जाती है कि नज़र पर भी असर पड़ने लगता है.

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अब बात आती है कि अगर ये दिक्कतें हैं, तो इन्हें ठीक कैसे किया जाए.

प्रियंका कहती हैं कि अगर झुर्रियां और फाइन लाइंस हैं तो मॉइश्चराइज़र और एंटी-एजिंग क्रीम लगाएं. डार्क सर्कल्स हैं तो एंटीऑक्सीडेंट युक्त क्रीम लगाएं. साथ ही, भरपूर नींद लें और खुद को हाइड्रेट रखें. आंखों के नीचे सूजन है तो ठंडी सिकाई कर सकते हैं. हाइड्रेटिंग आई क्रीम लगा सकते हैं. अगर आंखों के नीचे खोखलापन है तो हेल्दी डाइट लें. पानी पिएं और डॉक्टर की सलाह पर सही स्किनकेयर रुटीन अपनाएं. अगर हेवी आईलिड्स की दिक्कत है तो रोज़ आई एक्सरसाइज़ करें और एंटी-एजिंग क्रीम लगाएं.

इन सबके साथ ये एक बात रखें. एजिंग यानी उम्र बढ़ना नेचुरल है. एक वक्त के बाद समय चेहरे पर अपनी छाप छोड़ता ही है. इसमें परेशान होने या घबराने की ज़रुरत नहीं है. इस बदलाव को अपनाएं. बस साथ में हेल्दी आदतें भी रखें. जिससे आपका शरीर और स्किन हेल्दी रहें.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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