पेशाब करने के बाद भी कई बार ऐसा लगता है कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ. या फिर कई बार पेशाब रुक रुक कर आता है. बढ़ती उम्र के साथ कई पुरुष इन समस्याओं का सामना करते हैं. और अक्सर इसे बढ़ती उम्र का असर मानकर इग्नोर कर दिया जाता है. लेकिन ये दिक्कत सिर्फ बढ़ती उम्र नहीं बल्कि बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया यानी BPH की वजह से भी हो सकती है. देखिये आदमियों के शरीर में एक प्रोस्टेट ग्रंथि होती है. इसका साइज़ उम्र के साथ बढ़ता है. इसी से ये दिक्कतें होती है.
प्रोस्टेट का कारण, लक्षण और इलाज क्या होता है?
ये एक बड़ी आम समस्या है और 40 से 45 साल की उम्र के बाद कई पुरुष इससे जूझते हैं. इसलिए आज हम डॉक्टर्स जानेंगे की बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया क्या होता है? इसके लक्षण क्या हैं? किन लोगों में इसका खतरा ज़्यादा होता है? इसका डायग्नोसिस कैसे किया जाता है और इलाज के क्या-क्या विकल्प मौजूद हैं?


ये एक बड़ी आम समस्या है और 40 से 45 साल की उम्र के बाद कई पुरुष इससे जूझते हैं. इसलिए आज हम डॉक्टर्स जानेंगे की बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया क्या होता है? इसके लक्षण क्या हैं? किन लोगों में इसका खतरा ज़्यादा होता है? इसका डायग्नोसिस कैसे किया जाता है और इलाज के क्या-क्या विकल्प मौजूद हैं? साथ ही, क्या इससे बचाव संभव है? सुनिए.
बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया क्या होता है ?डॉ. अमित सापले, एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट, यूरोलॉजी, एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी, विशाखापट्टनम ने प्रोस्टेट के बारे जानकारी दी
-प्रोस्टेट एक ग्रंथि है जो मूत्राशय के नीचे होती है
-ये वीर्य बनाने में मदद करती है
-करीब 40 या 45 साल की उम्र तक ये छोटे साइज में रहती है
-लेकिन इस उम्र के बाद ये तेजी से बढ़ने लगती है
-इसके बढ़ने से कई लोगों को तकलीफ होती है
-ये जब साइज में बढ़ती है तो यूरेथ्रा पर दबाव आता है
-इसकी वजह से पेशाब करने में दिक्कत होती है
-ब्लैडर और किडनी पर भी कुछ प्रभाव होता है
-इसके रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?
-उम्र, क्योंकि 40-45 साल के बाद ही प्रोस्टेट बढ़ना शुरू होता है
-दूसरा है फैमिली हिस्ट्री
-तीसरा है मोटापा, और चौथा है डायबिटीज
- इसके अलावा कुछ हार्ट कंडीशंस जिनमें प्रोस्टेट एनलार्जमेंट ज्यादा होती है
-सबसे अहम लक्षण है पेशाब की धार कम होना
-खड़े होकर पेशाब करने पर पेशाब दूर नहीं जाता बल्कि पांव के पास ही गिरता है
- कई बार पेशाब बूंद-बूंद टपकता है या रुक-रुक के आता है
-पेशाब करने के लिए जोर या ताकत लगानी पड़ती है
-पेशाब करने के बाद कुछ पेशाब बाकी रहने का एहसास होता है
- यह प्रॉब्लम अगर ज्यादा हो तो पेशाब पूरी तरह रुक जाता है जिसे रिटेंशन कहते हैं
- इसके साथ पेशाब बार-बार आना, खास करके रात को जिसे नॉक्ट्यूरिया कहते हैं
-पेशाब रोकने में दिक्कत होना
-कई बार बाथरूम जाने तक कुछ बूंद पेशाब टपक जाना
-अगर यह लक्षण हैं तो पुरुष को अपनी जांच करानी चाहिए
-प्रोस्टेट के लिए सबसे अहम जांच होती है डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन (DRE)
-इसमें यूरोलॉजिस्ट अपनी उंगली से मलाशय के द्वारा प्रोस्टेट की जांच करते हैं
-देखा जाता है कि उसका साइज क्या है और उसमें कोई इंफेक्शन या कैंसर तो नहीं है
- इसके सिवा एक यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और एक पीएसए (PSA) ब्लड टेस्ट किया जाता है
-जांच इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रोस्टेट बढ़ने और प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण कुल मिलाकर एक ही होते हैं
- इसमें सिर्फ लक्षणों से फर्क पता नहीं चलता
-सिर्फ प्रोस्टेट होने के लिए ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती
-इलाज उन लक्षणों के लिए जरूरी है जिसकी वजह से मरीज डॉक्टर के पास आया हो
-शुरुआत में दवाइयां दी जाती हैं
-पेशेंट को रेगुलर फॉलो-अप में रहना होता है
- जब ट्रीटमेंट बहुत जरूरी हो जाए तो टीयूआरपी (TURP) किया जाता है
- इसमें बिना किसी बाहरी कट या ऑपरेशन के, पेशाब के रास्ते से ही इंस्ट्रूमेंट्स अंदर डालकर प्रोस्टेट का ऑपरेशन किया जाता है.
-इसके अलग-अलग तरीके हैं
-जैसे मोनोपोलर TURP, बायपोलर TURP, और होलमियम लेजर (HoLEP)
-आजकल कुछ नए तरीके भी आए हैं जिसमें प्रोस्टेट को भाप डालकर भी डिजॉल्व किया जाता है
-हर पेशेंट के लिए सही तरीका कौन सा है, यह यूरोलॉजिस्ट के साथ चर्चा करके तय किया जा सकता है
-एक उम्र के बाद प्रोस्टेट हर पुरुष में होता है
-ये साइज़ में बढ़ता ही है
-इससे बचा नहीं जा सकता
-लेकिन बचाव के लिए वजन नियंत्रित रखें
-खान-पान पर कंट्रोल रखें
-अल्कोहल न पिएं
-कॉफी का सेवन सीमित रखें
-सबसे महत्वपूर्ण है रेगुलर चेकअप करते रहना ताकि देखा जा सके कि प्रोस्टेट, ब्लैडर और किडनी सही ढंग से काम कर रहे हैं
याद रखिए, समय पर जांच और सही इलाज से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इसलिए अगर ऐसे कोई लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें और डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें.
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