गेहूं, मैदा और सूजी. अगर ये तीन चीज़ें आपकी थाली से गायब हो जाएं, तो सोचिए क्या-क्या छूट जाएगा. न तो आप गेहूं की रोटी खा पाएंगे. न पूड़ी-कचौड़ी का स्वाद ले पाएंगे. मैदे से बना भटूरा, खस्ता, केक और दूसरी चीज़ें भी नहीं खा सकेंगे. सूजी से बनने वाला उपमा, हलवा, इडली, चीला, उत्पम, वड़ा और रवा डोसा भी छोड़ना पड़ेगा. पर अच्छी बात है कि ये तीनों चीज़ों कहीं नहीं जा रहीं. आपकी थाली में ही हैं. बनाइए इनसे आइटम्स और खाइए. लेकिन कुछ लोग चाहकर भी गेहूं, मैदा और सूजी से बनी चीज़ें नहीं खा सकते. वजह है एक बीमारी. जिसका नाम है- सीलिएक डिज़ीज़. मिस यूनिवर्स 2021 हरनाज़ संधू को भी यही बीमारी है.
क्या है सीलिएक बीमारी, जिसमें गेहूं, सूजी, मैदा खाने से मना कर देते हैं डॉक्टर?
सीलिएक डिज़ीज़ में शरीर ग्लूटेन के खिलाफ एंटीबॉडीज़ बनाने लगता है. ग्लूटेन एक प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई में पाया जाता है.


सीलिएक डिज़ीज़ में आखिर होता क्या है, यही जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि सीलिएक डिज़ीज़ क्या है. क्या ये सिर्फ पेट से जुड़ी बीमारी है या इसका असर दूसरे अंगों पर भी पड़ता है. बच्चों और बड़ों में सीलिएक डिज़ीज़ के लक्षण क्या हैं. क्या सीलिएक डिज़ीज़ का कोई इलाज है. ये भी समझेंगे कि ग्लूटेन प्रोटीन रोज़मर्रा की किन चीज़ों में पाया जाता है. और ग्लूटेन-फ्री डाइट में क्या-क्या खा सकते हैं.
सीलिएक डिज़ीज़ क्या है?ये हमें बताया डॉक्टर सुफला सक्सेना ने.

सीलिएक डिज़ीज़ एक ऑटोइम्यून बीमारी है. गेहूं, जौ (बार्ले) और राई में ग्लूटेन नाम का प्रोटीन होता है. सीलिएक डिज़ीज़ में शरीर ग्लूटेन के खिलाफ एंटीबॉडीज़ बनाने लगता है. इससे छोटी आंत को नुकसान पहुंचने लगता है. छोटी आंत को नुकसान होने से पोषक तत्व एब्ज़ॉर्व नहीं हो पाते. इससे शरीर में विटामिन्स और मिनरल्स की कमी होने लगती है. बच्चे के विकास और व्यवहार पर असर पड़ सकता है. पेट से जुड़ी दिक्कतें भी रेगुलरली होने लगती हैं.
क्या सीलिएक डिज़ीज़ सिर्फ पेट से जुड़ी बीमारी है?सीलिएक डिज़ीज़ सिर्फ पेट की बीमारी नहीं है. इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है. इससे बच्चों में बार-बार पेटदर्द होता है. लंबे समय तक दस्त लग जाते हैं. वज़न और हाइट सही तरीके से नहीं बढ़ती. शरीर में खून की कमी होने लगती है. हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं. हड्डियों और जोड़ों में दर्द रहने लगता है. दांतों में कीड़ा लग सकता है. सीलिएक डिज़ीज़ दिमाग पर भी असर डालता है. बच्चों के ध्यान लगाने की क्षमता, अलर्टनेस और फोकस धीरे-धीरे कम होने लगता है. इसलिए सीलिएक डिज़ीज़ की समय पर पहचान और इलाज बहुत ज़रूरी है, क्योंकि ये शरीर के कई अंगों पर एक साथ असर डाल सकती है.
सीलिएक डिज़ीज़ के मुख्य लक्षण- बच्चों में बार-बार पेटदर्द होना.
- दस्त लगना, उल्टी आना.
- आयरन सप्लीमेंट लेने के बाद भी खून की कमी पूरी न होना.
- बच्चे की हाइट और वज़न न बढ़ना.
- हड्डियां कमज़ोर होना.
- फोकस और एलर्टनेस कम होना.
- ये सारे लक्षण बच्चों में ज़्यादा आम हैं.
- एडल्ट्स में सीलिएक डिज़ीज़ अक्सर देर से पता चलता है.
- बड़े लोगों में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं.
- जैसे पेट में ज़्यादा गैस बनना.
- ब्लोटिंग होना.
- पेटदर्द होना.
- इनफर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें होना.
- एडल्ट्स में सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या भी इससे जुड़ी हो सकती है.

गेहूं, दलिया, सूजी और मैदा जैसी चीज़ों में ग्लूटेन होता है. रोटी, पूड़ी, पराठा और कुलचा में भी ग्लूटेन होता है. सूजी से बनने वाले आइटम्स, जैसे इडली और उत्तपम में ग्लूटेन होता है. मैदे से बनने वाली मिठाइयों, जैसे गुलाब जामुन और इमरती में ग्लूटेन होता है. समोसे, कचौड़ी, बिस्कुट और ब्रेड जैसे स्नैक्स में भी ग्लूटेन पाया जाता है
सीलिएक डिज़ीज़ का इलाजसीलिएक डिज़ीज़ का सबसे ज़रूरी इलाज ग्लूटेन-फ्री डाइट है. ग्लूटेन-फ्री डाइट का मतलब सिर्फ चावल खाना नहीं है. मरीज़ को बैलेंस्ड डाइट लेनी चाहिए, जिसमें प्रोटीन भी हो. दाल, चावल और सभी तरह की सब्ज़ियां खाई जा सकती हैं. बाजरा, ज्वार और मक्का जैसे मिलेट्स भी अच्छे विकल्प हैं. ज्यादातर दालें, सब्ज़ियां और मसाले खाए जा सकते हैं. दूध और दूध से बनी कई चीज़ें भी ली जा सकती हैं डाइट का बैलेंस्ड होना बहुत ज़रूरी है, वरना बच्चों में लंबे समय में पोषण की कमी हो सकती है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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