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पैरों में सूजन कहीं दिल या किडनी की वजह से तो नहीं? डॉक्टर से समझ लीजिए

पैरों में सूजन को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है. पहला भाग हड्डी और जोड़ों से संबंधित होता है. दूसरा भाग किडनी और दिल से जुड़ा होता है.

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महिलाओं के पैरों में अक्सर सूजन रहती है

पैर हमारे पूरे शरीर का भार उठाते हैं. हम सभी अपने दिन का ठीक-ठाक हिस्सा खड़े-खड़े या चलते-चलते बिताते हैं. अगर वज़न ज़्यादा हो. या कोई भारी सामान पकड़ा हो. तब तो पैरों पर बोझ और ज़्यादा बढ़ जाता है. अब इतनी मेहनत करने के बाद, बदले में पैरों को क्या मिलता है? सूजन. कई लोगों के पैर अक्सर सूजे रहते हैं. ये दिक्कत महिलाओं को खूब होती है.

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कई बार तो पैरों की सूजन सीरियस नहीं होती. पर कभी कभार ये इमरजेंसी सिचुएशन हो सकती है. इसलिए आज डॉक्टर से जानेंगे कि पैरों में सूजन क्यों आ जाती है. इसका कनेक्शन दिल, किडनी और गठिया से कब हो सकता है. पैरों की सूजन दूर करने के घरेलू उपाय क्या हैं. और पैरों में सूजन का इलाज कैसे होता है.

पैरों में सूजन किन वजहों से आ सकती है?

ये हमें बताया डॉक्टर सुशील शर्मा ने. 

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डॉ. सुशील शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स, कैलाश हॉस्पिटल, नोएडा

पैरों में सूजन का कोई एक कारण नहीं होता, इसके कई कारण हो सकते हैं. पैरों में सूजन को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है. पहला भाग हड्डी और जोड़ों से संबंधित होता है. इसमें अर्थराइटिस (गठिया), पैरों में खून का फ्लो घटना, ज़्यादा वज़न और लंबे समय तक खड़े रहना शामिल है. इन कारणों से पैरों में सूजन आ सकती है. 

दूसरा भाग किडनी और दिल से जुड़ा होता है. इसमें शरीर में पानी जमा होने की वजह से पैरों में सूजन आ जाती है. इस तरह की सूजन में अक्सर दर्द भी होता है. कुछ मामलों में बिना दर्द वाली सूजन भी होती है, जिसे पिटिंग एडिमा कहते हैं. ऐसी सूजन अक्सर किडनी या दिल से जुड़ी होती है. इस तरह की सूजन को फिज़ीशियन देखते हैं. वहीं, अर्थराइटिस से जुड़ी सूजन को ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ देखते हैं.

एक और कारण रूमेटॉइड अर्थराइटिस हो सकता है, जिसका पता ब्लड टेस्ट से चलता है. ज़्यादा देर खड़े रहने या भारी वज़न उठाने से भी एडिमा (फ्लूइड की वजह से सूजन) हो सकता है. इसमें खून नीचे पैरों में रुक जाता है क्योंकि वो सही तरीके से दिल की तरफ नहीं लौट पाता. 

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एक कारण पिंडलियों में मौजूद खून की नलियों में खून का थक्का बनना है. ऐसा DVT यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस की वजह से हो सकता है. इसमें पैरों में सूजन के साथ दर्द भी होता है, खासकर घुटने के नीचे. अगर सूजन के साथ सांस फूलने लगे और डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) भी हो. तब इसका मतलब है कि खून की नली में रुकावट हो रही है. ऐसे में खून का थक्का फेफड़ों तक भी पहुंच सकता है. ये एक इमरजेंसी स्थिति है. 

इसी तरह, अगर सांस फूल रही है, तो ये दिल से जुड़ा हो सकता है. अगर पैरों में सूजन के साथ दूसरे लक्षण भी दिखते हैं, तो इसे इमरजेंसी माना जा सकता है. अगर पैरों में सिर्फ सूजन और दर्द है, तो ये इमरजेंसी नहीं है. लेकिन इलाज की ज़रूरत फिर भी होती है.

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गुनगुने पानी से पैरों की सिकाई करने से सूजन कम की जा सकती है 

पैरों की सूजन कम करने के घरेलू उपाय

- सबसे पहले, हल्के गुनगुने पानी से पैरों की सिकाई की जा सकती है

- दूसरा उपाय है पैरों को ऊंचा करके रखना

- इसके लिए पैरों के नीचे तकिया या गद्दा लगाकर उन्हें ऊपर उठाकर रखें

- पैरों को करीब आधा-एक फीट ऊपर रखने से सूजन कम होने में मदद मिलती है

- तीसरा उपाय है नमक का सेवन कम करना

- नमक कम खाने से शरीर में पानी कम रुकता है और सूजन घटती है

- बाकी सूजन का कारण पता करके उन कारणों को दूर करना पड़ता है

पैरों में सूजन का इलाज

अगर पैरों में सूजन का कारण खून का थक्का है. तब खून पतला करने की दवाएं दी जाती हैं. अगर वज़न ज़्यादा है, तो सबसे पहले वज़न कम करने की सलाह दी जाती है. अगर अर्थराइटिस (गठिया) की वजह से सूजन होती है. तब ब्लड टेस्ट करने के बाद अर्थराइटिस का इलाज किया जाता है. ज़रूरी दवाइयां खानी पड़ती हैं. 

अगर सूजन दिल या किडनी से जुड़ी है, तो दोनों की जांच करके उनका इलाज होता है. पैरों की सूजन कई अलग-अलग बीमारियों का संकेत हो सकती है. इसलिए इस सूजन का कारण समझना ज़रूरी होता है. सही कारण पता चलने के बाद ही उसका उचित इलाज किया जाता है. पैरों की सूजन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. ये किसी न किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है.

अगर आपके भी पैरों में सूजन है, तो पहले घरेलू उपायों से उसे दूर करने की कोशिश करें. अगर सूजन दूर न हो, तब डॉक्टर को दिखाकर ज़रूरी जांचें कराएं. ताकि सही कारण पता करके सूजन हमेशा के लिए दूर की जा सके. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)  

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