भारत में कैंसर के मामले हर साल बढ़ रहे हैं. आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर और साफ हो जाती है. साल 2020 में देश में कैंसर के 13 लाख 90 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे. 2021 में ये आंकड़ा बढ़कर 14 लाख 26 हजार के पार पहुंच गया. फिर 2022 में कैंसर के 14 लाख 61 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR और नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिसर्च से ये पता चला है.
भारत में हर साल बढ़ रहे कैंसर के मामले, किन बातों को इग्नोर करना खतरे में डाल सकता है?
7 नवंबर को ‘नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे’ है. इसलिए, हम डॉक्टर से जानेंगे कि भारत में कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं. कम उम्र में भी कैंसर के मामले बढ़े हैं, इसकी क्या वजह है. देश की महिलाओं और पुरुषों में सबसे आम कैंसर कौन-से हैं. कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं.

सिर्फ कैंसर के मामले ही नहीं, इससे होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ी है. 2020 में कैंसर की वजह से 7 लाख 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. 2022 तक ये आंकड़ा बढ़कर 8 लाख के पार पहुंच गया.
ICMR के ऑफिशियल जर्नल ‘इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ में मार्च 2023 में एक रिसर्च छपी. इसमें अनुमान लगाया गया कि 2025 में देश में कैंसर के करीब 15 लाख 70 हजार मामले हो सकते हैं. ये 2020 के मुकाबले करीब 12.8 फीसदी की बढ़ोतरी है.
अब 2025 में कैंसर के कितने मामले सामने आए, ये ऑफिशियली अभी पता नहीं है. लेकिन ये जरूर है कि पिछले कुछ सालों से कैंसर के मामले बढ़े रहे हैं. 7 नवंबर को ‘नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे’ है. इसलिए, हम डॉक्टर से जानेंगे कि भारत में कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं. कम उम्र में भी कैंसर के मामले बढ़े हैं, इसकी क्या वजह है. देश की महिलाओं और पुरुषों में सबसे आम कैंसर कौन-से हैं. कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं. और कैंसर का खतरा कैसे कम करें, स्क्रीनिंग कब जरूरी है.
भारत में कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?हेड एंड नेक कैंसर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डायरेक्टर डॉ. जेपी अग्रवाल ने बताया कि भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने के दो मुख्य कारण है. पहला, देश की आबादी बढ़ना. दूसरा, कैंसर को लेकर लोगों में जागरूकता. जागरूकता बढ़ने से अब कैंसर के ज्यादा मामलों की पहचान हो रही है.

आजकल कम उम्र के लोगों में भी कैंसर के मामले देखने को मिल रहे हैं.डॉ. जेपी अग्रवाल ने हमें बताया कि इसकी एक मुख्य वजह खराब लाइफस्टाइल है. उन्होंने कहा कि कम उम्र में ही बहुत ज्यादा सिगरेट-शराब पीना, एक्सरसाइज न करना और खान-पान की आदतों में बदलाव होना कम उम्र में कैंसर के बड़े कारण हैं. इसके अलावा, बढ़ता हुआ प्रदूषण भी कैंसर का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है.
डॉ. जेपी अग्रवाल के मुताबिक, महिलाओं में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर और सर्विकल कैंसर के मामले देखे जाते हैं. महिलाओं में मुंह और गले, फेफड़ों और खाने की नली के कैंसर भी आम हैं. वहीं, पुरुषों में सबसे ज्यादा मुंह और गले के कैंसर के मामले सामने आते हैं. पुरुषों में फेफड़ों, खाने की नली और बड़ी आंत के कैंसर भी देखे जाते हैं.
कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?हमने डॉ. जेपी अग्रवाल से कैंसर के शुरुआती लक्षण के बारे में पूछा. उन्होंने बताया कि कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर बहुत सामान्य होते हैं. जैसे-
- मुंह में ऐसा घाव होना, जो लंबे समय तक ठीक न हो
- कई दिनों तक गले में दर्द रहना
- ब्रेस्ट में गांठ होना, जो धीरे-धीरे बढ़ती जा रही हो
- इस गांठ में दर्द होना जरूरी नहीं है
- भूख न लगना
- बेवजह वजन कम होना
- 2-3 हफ्तों तक खांसी रहना, जो ठीक न हो रही हो
डॉ. जेपी अग्रवाल ने कहा कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
कैंसर का खतरा कैसे कम करें? स्क्रीनिंग कब जरूरी?कैंसर के रिस्क को काफी हद तक घटाया जा सकता है. डॉ. जेपी अग्रवाल ने बताते हैं कि इसके लिए सिगरेट और शराब से दूर रहें. अच्छी लाइफस्टाइल अपनाएं. रोज एक्सरसाइज करें. बैलेंस्ड डाइट लें. अगर शरीर में घाव हो या कोई असामान्य बदलाव दिखे, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाकर दिखाएं.
(यह भी पढ़ें: कोई पटाखे फोड़ते वक्त जल जाए, तो तुरंत क्या करें और क्या बिलकुल न करें?)
समय पर कैंसर की पहचान के लिए रेगुलर स्क्रीनिंग जरूरी है. परिवार में किसी को कैंसर हुआ हो, तो आपको ज्यादा सतर्क रहना चाहिए. कैंसर होने का मतलब जिंदगी खत्म होना नहीं है. कई तरह के कैंसर शुरुआती स्टेज में पता चलने पर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं. हालांकि, ठीक होने की संभावना मरीज की स्थिति, कैंसर के टाइप और उसकी स्टेज पर निर्भर करती है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: फर्जी डॉक्टरों पर लगाम लगाने के लिए बंगाल सरकार ने क्या फैसला लिया है?












