ओडिशा के बालासोर जिला स्थित जंगल में पाए गए 5 ओरंगटान को नंदनकानन चिड़ियाघर में रखा गया है. यहां उनकी अच्छे से देखभाल की जा रही है. इन ओरंगटान को 30 दिन के क्वारंटीन में रखा जाएगा. ओरंगटान एप्स भारत में नहीं मिलते. ये प्रजाति इंडोनेशिया और मलेशिया में पाई जाती है. जाहिर है इन्हें भारत के तापमान में रहने की आदत नहीं है. लिहाजा इन्हें इनके बॉडी टेंप्रेचर के हिसाब से माहौल दिया जा रहा है. खाने-पीने का भी काफी ध्यान रखा जा रहा है.
ओडिशा में मिले 5 ओरंगटाइन्स की खातिरदारी में कमी नहीं, खाना-खेलना सब 'स्पेशल'
ये पांचों ओरंगटान 8 सितंबर की सुबह उदयपुरा-तालसारी के जंगली इलाके में पाए गए थे. इनमें 3 नर और 2 मादा हैं. पांचों को देखभाल के लिए नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क लाया गया. यहां उन्हें एक्सपर्ट की देखरेख में रखा गया है.

ये पांचों ओरंगटान 8 सितंबर की सुबह उदयपुरा-तालसारी के जंगली इलाके में पाए गए थे. इनमें 3 नर और 2 मादा हैं. पांचों को देखभाल के लिए नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क लाया गया. यहां उन्हें एक्सपर्ट की देखरेख में रखा गया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चिड़ियाघर के डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे ने बताया कि ओरंगटान की देखभाल के लिए तीन एनिमल कीपर रखे गए हैं. डॉक्टरों की स्पेशल टीम इनकी सेहत को मॉनिटर कर रही है. निगरानी के लिए CCTV कैमरे भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
प्रदीप ने अखबार को बताया कि पांचों में से एक ओरंगटान को बुखार था. उसे दवा दी गई है. अब उसकी तबीयत सही है. उन्होंने यह बताया कि पांचों जानवरों की सेहत स्थिर होने के बाद कुछ जरूरी टेस्ट किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि इन एप्स की देखभाल भारत में पाए जाने वाले बंदरों की तुलना में काफी अलग है. इसलिए इनके लिए एक स्पेशल डाइट चार्ट बनाया गया है. उसी के हिसाब से इन्हें खाना-पानी दिया जा रहा है.
इस डाइट चार्ट को मैसूर चिड़ियाघर के एक्सपर्ट्स की सलाह पर बनाया गया है. क्योंकि, मैसूर चिड़ियाघर में तीन ओरंगटान पहले से हैं. इसलिए वहां के एक्सपर्ट्स की सलाह पर ही इन जानवरों का खाना-पीना किया जा रहा है.
एक अधिकारी ने अखबार को बताया,
‘डाइट चार्ट के तहत ओरंगटान को हर 2 घंटे में खाना दिया जा रहा है. उन पांचों में से दो बहुत छोटे हैं. इसलिए एनिमल कीपर उन्हें मैश किए हुए आलू और सेब खिला रहे हैं. इसके अलावा बाकी सब केला और सेब खा रहे हैं. केला और सेब के अलावा उन्हें दूध भी पिलाया जा रहा है.’
चिड़ियाघर के अधिकारी ने बताया कि ओरंगटान और इंसानों के DNA में काफी समानता होती है. करीब-करीब 97% तक DNA मैच कर जाता है. इसलिए ये जानवर एनिमल कीपर की देखभाल पर बेहतर रिस्पांस दे रहे हैं. अधिकारी ने आगे बताया कि ओरंगटान को व्यस्त रखने की भी कोशिश की जा रही है. इसलिए उनके लिए झूलों और खिलौनों का भी इंतजाम किया गया है.
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