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पेशाब में दिक्कत, सेक्स की इच्छा नहीं, प्रोस्टेट कैंसर की बारे में एक-एक बात जान लें

प्रोस्टेट कैंसर दुनियाभर में पुरुषों को होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है. साल 2024 में इसके 15 लाख 46,112 से ज़्यादा मामले सामने आए थे. वहीं, 4 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी.

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प्रोस्टेट कैंसर की वजह से देश में हर साल करीब 17 हज़ार पुरुषों की मौत होती है

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  • वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के ग्लोबोकैन डेटाबेस के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में प्रोस्टेट कैंसर के 15,46,112 से ज्यादा नए मामले और 4 लाख से अधिक मौतें हुईं।
  • प्रोस्टेट कैंसर मुख्यतः 60-65 वर्ष से ऊपर के बुजुर्ग पुरुषों में पाया जाता है और इसके जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में खानपान, सिगरेट, शराब और जीन परिवर्तन शामिल हैं।
  • प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी के बाद कुछ मरीजों में पेशाब पर नियंत्रण कम होना और सेक्शुअल हेल्थ में समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें दवाइयों और व्यायाम से प्रबंधित किया जाता है।

प्रोस्टेट. पुरुषों में पाई जाने वाली छोटी-सी ग्रंथि है. ये पेशाब की थैली यानी ब्लैडर के ठीक नीचे होती है. इस ग्रंथि का मुख्य काम है सीमन यानी वीर्य बनाना. कुछ लोगों की इस ग्रंथि में कैंसर हो जाता है. जिसे प्रोस्टेट कैंसर कहते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के ग्लोबोकैन डेटाबेस के मुताबिक, प्रोस्टेट कैंसर दुनियाभर में पुरुषों को होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है. साल 2024 में इसके 15 लाख 46,112 से ज़्यादा मामले सामने आए थे. वहीं, 4 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी. भारत की बात करें, तो हमारे यहां पुरुषों को होने वाला ये पांचवा सबसे आम कैंसर है. साल 2024 में देश में प्रोस्टेट कैंसर के 40 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए थे. 17 हज़ार पुरुषों की जान भी गई थी.

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इतना आम होने के बाद भी प्रोस्टेट कैंसर को लेकर लोगों को सही जानकारी नहीं है. इससे जुड़ी कई बातों को लोग सच मान लेते हैं. जैसे प्रोस्टेट कैंसर सिर्फ बुज़ुर्ग पुरुषों को होता है. इसके लक्षण जल्दी दिखाई देने लगते हैं. PSA बढ़ा है, तो कैंसर होना तय है. और प्रोस्टेट की सर्जरी के बाद सेक्शुअल हेल्थ और पेशाब पर कंट्रोल से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन इनमें से कितना सच है और कितना मिथ? ये जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण क्या हैं और PSA बढ़ने का क्या मतलब होता है. 

प्रोस्टेट कैंसर सिर्फ़ बुज़ुर्ग पुरुषों को होता है?

ये हमें बताया डॉ. (ब्रिग.) अनिल कुमार धर ने.

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डॉ. (ब्रिग.) अनिल कुमार धर, क्लीनिकल डायरेक्टर एंड हेड, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम

प्रोस्टेट कैंसर ज़्यादातर बुज़ुर्गों को ही होता है. आमतौर पर ये 60-65 साल की उम्र के बाद ज़्यादा देखा जाता है. इस उम्र में कुछ खास चीज़ें प्रोस्टेट कैंसर का रिस्क बढ़ाती हैं. इसमें शामिल है- खानपान, बहुत ज़्यादा रेड मीट खाना, सिगरेट और शराब पीना, जीन्स की वजह से भी प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है. खासकर BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में बदलाव.

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण जल्दी दिख जाते हैं?

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण 60 साल की उम्र के आसपास दिखाई देने लगते हैं. मरीज़ को पेशाब से जुड़ी कुछ परेशानियां होने लगती हैं. जैसे बार-बार या जल्दी-जल्दी पेशाब आना. पेशाब करने में दर्द या परेशानी होना. कभी-कभी पेशाब में खून आ सकता है. कुछ मरीज़ों में पेशाब रुक भी जाता है. अगर आपको पेशाब से जुड़ी ऐसी कोई परेशानी हो रही है. तब डॉक्टर की सलाह से सीरम PSA नाम का का ब्लड टेस्ट कराया जा सकता है.

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बढ़ा PSA यानी कैंसर होना तय है?

PSA यानी प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन. ये एक तरह का प्रोटीन है, जो प्रोस्टेट ग्रंथि बनाती है. PSA की थोड़ी मात्रा सामान्य तौर पर खून में पाई जाती है. जब प्रोस्टेट कैंसर होता है, तो PSA बढ़ना शुरू कर देता है. हालांकि, हर बार बढ़े PSA का मतलब ये नहीं कि मरीज़ को कैंसर है. इसलिए डॉक्टर मरीज़ की आगे जांच करते हैं. 

कैंसर की पुष्टि के लिए प्रोस्टेट बायोप्सी की जाती है. इससे पता लगाया जाता है कि प्रोस्टेट में कैंसर है या नहीं. PSA का एक और अहम इस्तेमाल इलाज के बाद मरीज़ की स्थिति पर नज़र रखने में होता है. डॉक्टर देखते हैं कि इलाज के बाद PSA का लेवल कम हो रहा है या नहीं. PSA कम होना इस बात का संकेत होता है कि इलाज का असर हो रहा है.

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प्रोस्टेट सर्जरी के बाद सेक्स और पेशाब से जुड़ी दिक्कतें?

प्रोस्टेट की सर्जरी चाहे कितनी ही बारीकी से की जाए. इसके बावजूद कुछ मरीज़ों में कुछ समस्याएं हो सकती हैं. जैसे पेशाब पर कंट्रोल कम हो जाना और पेशाब अपने आप निकल जाना. कुछ मरीज़ों में सेक्शुअल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती है. क्योंकि, सर्जरी के दौरान प्रोस्टेट के आसपास मौजूद नसों को नुकसान पहुंचता है. 

हालांकि ऐसा सबके साथ नहीं होता, पर कुछ मरीज़ों के साथ हो सकता है. इसकी वजह से इरेक्टाइल डिसफंक्शन या सेक्स की इच्छा कम हो सकती है. इसके लिए डॉक्टर दवाइयों और एक्सरसाइज़ की सलाह दे सकते हैं. अगर मरीज़ का पेशाब पर कंट्रोल नहीं रहा है. तब सबसे ज़रूरी इलाज पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ है. रोज़ पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी होता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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