‘खतरों के खिलाड़ी सीज़न 15’ शुरू हो चुका है. डायरेक्टर और स्क्रीन राइटर, रोहित शेट्टी इसे होस्ट कर रहे हैं. जब से ये नया सीज़न शुरू हुआ है. तब से इसके कई स्टंट बहुत चर्चा में हैं. जैसे रबर बुलेट स्टंट. जिसमें कंटेस्टेंट्स की पीठ पर रबर की गोलियां चलाई गई थीं.
जैस्मिन भसीन की स्टंट के बाद चली गई याद्दाश्त, दिमाग की किस चोट ने किया ये हाल?
टीवी एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन और रुबीना दिलैक ने परफॉर्म किया था. पर स्टंट के दौरान जैस्मिन को पानी में जाते ही चोट लग गई. फिर जब वो बाहर आईं, तो उन्हें याद ही नहीं था कि आखिर अभी हुआ क्या है. वो कुछ वक्त पहले की चीज़ें भूल गई थीं. इसके बाद शो की मेडिकल टीम ने उन्हें संभाला और आराम करने की सलाह दी.

दूसरा हवा और पानी से जुड़ा एक स्टंट है. इसे टीवी एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन और रुबीना दिलैक ने परफॉर्म किया था. पर स्टंट के दौरान जैस्मिन को पानी में जाते ही चोट लग गई. फिर जब वो बाहर आईं, तो उन्हें याद ही नहीं था कि आखिर अभी हुआ क्या है. वो कुछ वक्त पहले की चीज़ें भूल गई थीं. इसके बाद शो की मेडिकल टीम ने उन्हें संभाला और आराम करने की सलाह दी.
हाल ही में एक इंटरव्यू में जैस्मिन ने बताया कि माइल्ड कंकशन की वजह से उन्हें मेमोरी लॉस हुआ था, और अभी तक उस दिन का उन्हें कुछ भी याद नहीं है.
कंकशन क्या है और इससे मेमोरी लॉस क्यों हो सकता है, ये हमने पूछा सी.के. बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर, डॉक्टर के.के.जिंदल से.

कंकशन क्या होता है?
डॉक्टर जिंदल बताते हैं कि कंकशन सिर में लगने वाली एक तरह की ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी है. ये तब होती है, जब सिर या शरीर पर कोई ज़ोरदार झटका या टक्कर लगती है. इससे दिमाग अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर स्कल यानी खोपड़ी के अंदर तेज़ी ये हिलता या टकराता है. अचानक हुई इस हलचल से दिमाग के सेल्स को नुकसान पहुंच सकता है. दिमाग में केमिकल चेंजेस हो सकते हैं, जिससे उसके सामान्य कामकाज में कुछ वक्त के लिए रुकावट आ सकती है. इसका असर याद्दाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता, शरीर के संतुलन, कॉर्डिनेशन और मूड पर पड़ सकता है. ज़्यादातर मामलों में ये बदलाव अस्थाई होते हैं. यानी कुछ समय के लिए ही होते हैं और व्यक्ति धीरे-धीरे ठीक हो जाता है.
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कंकशन से मेमोरी लॉस हो सकता है?
कंकशन से मेमोरी लॉस हो सकता है. मेडिकल भाषा में इसे ‘एमनेशिया’ कहते हैं. इसकी वजह दिमाग के उस हिस्से में चोट या केमिकल बदलाव हैं, जो हमारी यादों को बनाने और उन्हें सेफ रखने का काम करता है. इससे व्यक्ति चोट लगने और उसके आसपास की घटनाओं को भूल जाता है. कभी-कभी चोट के बाद कुछ टाइम तक नई बातें याद रखने में भी परेशानी हो सकती है. अगर ज़्यादा चोट नहीं लगी है, यानी हल्का कंकशन है, तो मेमोरी लॉस स्थायी नहीं होता. पर अगर चोट गंभीर है, तो लंबे समय तक याद्दाश्त पर असर पड़ सकता है.

कब डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी?
हर कंकशन सीरियस नहीं होता. लेकिन सिर पर चोट लगने के बाद कभी-कभार दिमाग में ब्लीडिंग या सूजन हो सकती है. इसलिए सीटी स्कैन, MRI और EEG जैसी जांचें करवाना ज़रूरी हैं. इन्हें आप डॉक्टर के कहने पर ही कराएं. और अगर कोई दिक्कत बढ़े. जैसे बहुत तेज़ सिरदर्द हो. बार-बार उल्टी आए. पुतलियों के आकार में अंतर हो. बोलने में परेशानी हो. व्यवहार में अचानक बदलाव आए. शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी लगे. बैलेंस बिगड़े. कुछ पहचानने या समझने में दिक्कत हो. कंफ्यूज़न हो. बहुत नींद आए. दौरे पड़ें या मरीज़ बेहोश हो जाए, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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