आपने हेपेटाइटिस का नाम सुना है? लिवर की बीमारी है. हेपेटाइटिस होने पर लिवर में सूजन आ जाती है. जब लिवर की सूजन किसी खास वायरस की वजह से हो, तो इसे वायरल हेपेटाइटिस कहते हैं. हेपेटाइटिस A, B, C, D और E, इसी वायरल हेपेटाइटिस के प्रकार हैं. अगर सिर्फ़ वायरल हेपेटाइटिस B और C की बात करें, तो इसके सबसे ज़्यादा मामले चीन में आते हैं. दूसरे नंबर पर है भारत. ये सामने आया था वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO की ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट, 2024 में.
आपकी ही कुछ गलतियों से लिवर सूज रहा, हेपेटाइटिस से बचने के लिए डॉक्टर की ये बातें मानें
WHO की ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, साल 2022 में देश में हेपेटाइटिस B इंफेक्शंस के 2 करोड़ 98 लाख मामले सामने आए थे. हेपेटाइटिस C इंफेक्शंस की संख्या 55 लाख थी.

रिपोर्ट बताती है कि साल 2022 में देश में हेपेटाइटिस B इंफेक्शंस के 2 करोड़ 98 लाख मामले सामने आए थे. वहीं, हेपेटाइटिस C इंफेक्शंस की संख्या 55 लाख थी. ये हाल तब है, जब केंद्र सरकार ने 2018 में ‘नेशनल वायरल हेपेटाइटिस प्रोग्राम’ लॉन्च किया था. इसके तहत, पूरे देश में हेपेटाइटिस B और C की फ्री में जांच होती है. सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज भी मुफ्त है.
इसके बावजूद हेपेटाइटिस के मामले करोड़ों में हैं. इसकी बड़ी ज़िम्मेदार हैं हमारी ही कुछ गलतियां, जो हेपेटाइटिस का रिस्क बढ़ा देती हैं. आज हम डॉक्टर से जानेंगे कि हेपेटाइटिस क्यों होता है. इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. हेपेटाइटिस का शक होने पर कौन-से टेस्ट करा सकते हैं. हेपेटाइटिस से कैसे बचें और लिवर को हेल्दी रखने के लिए क्या करें.
ये हमें बताया डॉक्टर अजय कुमार ने.

हेपेटाइटिस यानी लिवर में सूजन के कई कारण हो सकते हैं. जैसे हेपेटाइटिस A, B, C और E वायरस. ज़्यादा शराब पीना. कुछ दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट से भी हेपेटाइटिस हो सकता है. फ़ैटी लिवर भी लिवर की सूजन का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है. फ़ैटी लिवर का ख़तरा मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी समस्याओं में बढ़ जाता है. जैसे डायबिटीज़ या हाई कोलेस्ट्रॉल होना. इन सबसे लिवर में फ़ैट जमा होने की संभावना बढ़ जाती है. जब लिवर में ज़्यादा फ़ैट जमा होता है, तो उसमें सूजन शुरू हो सकती है.
हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षणलिवर हमारे शरीर का बहुत ज़रूरी अंग है. लेकिन लिवर की कई बीमारियां लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रहती हैं. हालांकि, एक्यूट वायरल हेपेटाइटिस में कई बार साफ़ लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे बुखार आना. भूख कम लगना. उल्टी होना. पेट में दर्द होना. आंखें और स्किन पीली पड़ जाना. पेशाब का रंग गहरा पीला होना. ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. जांच से पता चलता है कि लिवर में सूजन है या नहीं, अगर सूजन है तो उसका कारण क्या है.
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हेपेटाइटिस से जुड़े टेस्टसबसे पहले खून की जांच की जाती है. इनमें सबसे आम जांच लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) है. इसमें बिलिरुबिन, SGOT और SGPT जैसे पैरामीटर देखे जाते हैं. अगर लिवर की हालत और अच्छे से समझनी हो, तो फाइब्रोस्कैन किया जा सकता है. इससे पता चलता है कि लिवर में कितना फ़ैट जमा है और उसमें कितनी सख्ती आ गई है. ये एक नॉन-इनवेसिव टेस्ट है यानी इसमें कोई चीरा या सुई नहीं लगती.
फ़ैटी लिवर में FIB-4 स्कोर भी निकाला जाता है. इसमें मरीज़ की उम्र, SGOT, SGPT और प्लेटलेट काउंट का पता किया जाता है. फिर चारों को कैलकुलेट करके FIB-4 स्कोर आता है. अगर इन जांचों से गंभीर बीमारी की आशंका हो. तब अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और दूसरी जांचें कराने की सलाह दी जाती है. लिवर की बीमारी ज़्यादा बढ़ने पर एंडोस्कोपी करके नसों की जांच भी की जा सकती है.

हेपेटाइटिस से बचने के लिए उसके कारणों को समझना ज़रूरी है. हेपेटाइटिस A और E के वायरस अक्सर दूषित पानी और संक्रमित खाने से फैलते हैं. इसलिए हमेशा साफ़ और सुरक्षित पानी पिएं. खासकर मॉनसून में पीने का पानी कई बार सीवेज का पानी मिलने से दूषित हो जाता है. इसलिए इस मौसम में उबला हुआ पानी पिएं. खाने की भी साफ़-सफ़ाई का पूरा ध्यान रखें. खाने से पहले और बाद में हाथों को अच्छे से धोएं.
हेपेटाइटिस B और C संक्रमित खून के ज़रिए फैल सकते हैं. इसलिए खून हमेशा लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद ब्लड बैंक में ही दें. इंजेक्शन और सिरिंज भी नई और एक बार इस्तेमाल होने वाली (डिस्पोजे़बल) होनी चाहिए. हेपेटाइटिस A और B की वैक्सीन मौजूद है, ज़रूरत पड़ने पर उसे लगवाएं. हेपेटाइटिस E की वैक्सीन आ गई है, उसे भी लगवाया जा सकता है.
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लिवर हेल्दी रखने के लिए क्या करें?लिवर हेल्दी रखने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें. खासकर फ़ैटी लिवर से बचने के लिए एक्सरसाइज़ करें और बैलेंस्ड डाइट लें. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फू़ड कम खाएं-पिएं. अपनी डाइट में बैलेंस्ड और साफ़-सुथरा खाना शामिल करें. बिना डॉक्टर की सलाह के अनावश्यक दवाइयां लेने से बचें. शराब न पिएं, अगर पीते हैं तो कम से कम पिएं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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