दावा
सोशल मीडिया पर पालघर में हुई मॉब लिंचिंग का वीडियो वायरल हो रहा है. दावाकिया जा रहा है कि इस घटना में लिंचिंग करने वाले मुस्लिम हैं. इसके बाद ट्विटर पर कुछ ब्लूटिकधारियों ने दावा किया कि 23 सेकंड के इस वीडियो के आखिर में शोएब नाम सुनाई दे रहा है. शोएब नाम से उनका इशारा मुस्लिम समुदाय के और है. दावे को हम हू-ब-हू लिख रहे हैं.(आर्काइव लिंक
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इस वीडियो के लास्ट में बहुत ध्यान से सुनें, साफ़ साफ़ एक लड़का बोल रहा है, “ मार शोएब मार “ Listen carefully man inciting another Shoaib fr lynching Hindu saint "maar maar Shoaib maar"
पर भी वायरल हो रहा है.
सुदर्शन न्यूज़ के ट्विटर हैंडल से ऐसा ही दावा
किया गया है. इनके ही दावों को कमोबेश कॉपी पेस्ट करके वॉट्सऐप और फेसबुक पर फैलाया जा रहा है.(आर्काइव लिंक
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और दिया जा रहा है. सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें दोनों साधुओं की लाश एक टेंपो में रखी हुई दिखती है. इस दावे में इसे ईसाई मिशनरियों की गुंडागर्दी बताया जा रहा है. (आर्काइव लिंक
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पड़ताल
23 सेकेंड के इस वीडियो के आखिर में शोएब है या नहीं, यह जानने के लिए हमें वीडियो को बार-बार सुना. आखिर में हम इसी नतीजे पर पहुंचे कि इस वीडियो के आखिर में शोएब शब्द नहीं बोला गया है. बोला जा रहा है-"बस ओए बस"आवाज की स्पष्टता में कमी और निरंतरता में बोले जाने की वजह से भ्रम पैदा किया जा रहा है. इसलिए वीडियो के इसी लूपहोल का इस्तेमाल ग़लत नैरेटिव गढ़ने में किया जा रहा है. ध्यान से सुनने पर स्पष्ट होता है कि उसमें शोएब नाम नहीं लिया गया है.
इसके अलावा इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे साफ कह चुके हैं कि कोई भी हिंदू-मुसलमान का एंगल नहीं है. यह अफवाह की वजह से हुई घटना है.
इसके अलावा महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बिल्कुल साफ किया है कि हमला करने वाले और जिनकी इस हमले में जान गई, दोनों का धर्म अलग नहीं हैं.
हमने आजतक से जुड़े स्थानीय पत्रकार हुसैन से भी संपर्क किया. हुसैन ने गांव में खुद जाकर पुष्टि की और हमें बताया,
गांव की तकरीबन आबादी अनुसूचित जानजाति की ही है. इस घटना में जिनकी साधुओं की मौत हुई, वो और लिंचिंग करने वाले एक ही धर्म से हैं. शोएब नाम का इस पूरी घटना से कोई नाता नहीं है.गडचिंचले जनजातीय इलाका है और शिक्षा का स्तर शेष राज्य के मुक़ाबले बेहद कम है. क़रीब 30 फीसदी लोग ही साक्षर हैं.

2011 की जनगणना के आंकड़े.
ये घटना जिस गडचिंचले गांव में हुई, वहां 2011 की जनगणना
के मुताबिक 1208 लोग रहते हैं, जिनमें से 99 फीसदी से ज़्यादा लोग अुनसूचित जनजाति के हैं. उस वक्त ये ठाणे जिले का हिस्सा था. 1 अगस्त, 2014 को पालघर नया जिला बना. तब इसे पालघर में मिला दिया गया.
नतीजा
हमारी पड़ताल में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा कि पालघर लिंचिंग के वीडियो में कोई शोएब नाम का शख़्स मौजूद था, या उसका नाम आखिर में सुनाई देता है, ऐसा दावा झूठ निकला. वीडियो के आखिर में कहा जा रहा है - बस-ओए-बस. शोएब नहीं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पालघर पुलिस, प्रशासन और पत्रकारों ने साफ किया है कि इस लिंचिंग के पीछे कोई भी धार्मिक कारण नहीं है.अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com
पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.











