
सुरेश ने उदयपुर में वर्कशॉप अटेंड की है और वो कुम्भलगढ़ किले में नमाज़ की इजाज़त देने के बारे में फैलाई जा रही जानकारी की सच्चाई जानना चाहते हैं.
वो एक वायरल मैसेज की सच्चाई जानना चाहते हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने कुंभलगढ़ किले में नमाज़ की इजाज़त दी है. सुरेश चाहते हैं कि 'दी लल्लनटॉप' इसकी ख़बर की पड़ताल करे और उन तक सच पहुंचाए. पहले दावा जान लेते हैं. इस बात को घुमा फिरा कर दो-तीन तरह से लिखा जा रहा है.
दावा
*महाराणा प्रताप के बलिदान पर फिरा पानी ...*कुम्भलगढ़ किले में नमाज पढ़ने का आदेश कांग्रेस ने जारी किया - *राजस्थान कांग्रेस मुख्यमंत्री ने कहा मुगलों को उनका हक दिया. सोते रहो और अपनी विरासत को इसी तरह खोते रहो...*हिंदुओ कांग्रेस का सपोर्ट करके😠🙏🏻*इसके अलावा लिखा जा रहा है
जो अकबर न कर सका वो अशोक गहलोत ने कर दिखाया. राजस्थान सरकार ने महाराणा प्रताप के कुम्भलगढ़ किले में इज्तेमा की इजाजत प्रदान की. जिस किले में हमेशा एकलिंगनाथ, हर-हर महादेव का जयघोष होता रहा, वहा पहली बार अल्ला हु अकबर गूंजेगा। This is @INCIndia for u. think before u vote.

ऐसे कई पोस्ट फेसबुक, ट्विटर और वॉटस्एप पर वायरल हुए हैं.
ज्यादातर मैसेज और पोस्ट मार्च में किए गए थे. इन कैप्शन के साथ फेसबुक पर भी खूब लोगों ने शेयर किया. हमने उस वक्त भी इसकी पड़ताल की थी. चूंकि, सुरेश को इस ख़बर पर शक है, इसलिए हम दोबारा आप तक सच पहुंचा रहे हैं.
पड़ताल इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ने इस मामले की पड़ताल की. पता चला कि कुंभलगढ़ का किला ASI के कंट्रोल में आता है. इसीलिए यहां होने वाले किसी भी आयोजन की इजाज़त राज्य सरकार नहीं दे सकती. यानी साफ है, गहलोत सरकार इस किले के अंदर किसी धार्मिक कार्यक्रम करने की इजाज़त दे सके, ऐसा मुमकिन ही नहीं है.
इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सुपरिटेंडेंट डी आर बडिगर से बात की गई. उन्होंने भी यही जानकारी दी कि
राज्य सरकार के पास किले के भीतर आयोजन करने की इजाज़त देने की अथॉरिटी ही नहीं है. ये अनुमति सिर्फ ASI ही दे सकता हैयानी ये तो साफ हो गया कि किले के भीतर इज़्तिमा की इजाज़त गहलोत सरकार नहीं दी. इसके बाद इज़्तिमा के आयोजन के बारे में जानकारी इक्टठी की गई. पड़ताल करने पर पता चला कि किले के बाहर 'जश्न-ए-गरीब नवाज' नाम का एक कार्यक्रम होना था. इस प्रोग्राम के शेड्यूल में आम बोल-चाल की हिंदी का इस्तेमाल किया था. इसलिए लगा कि ये प्रोग्राम किले के अंदर हो रहा है. विरोध के बाद इसे रद्द कर दिया गया. इस प्रोग्राम का आयोजन करने वाली कमिटी के अध्यक्ष अब्दुल शेख ने इंडिया टुडे को बताया कि ये कार्यक्रम उन्होंने अपनी मां नसीबन बेगम के हज यात्रा से लौटने की खुशी में रखा था. विरोध हुआ तो इसे रद्द कर दिया.
नतीजा 'दी लल्लनटॉप' की पड़ताल में ये खबर झूठ निकली. ऐसी किसी भी आयोजन की इजाज़त अशोक गहलोत सरकार दे ही नहीं सकती, ये उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. कुंभलगढ़ जैसे किले, विरासत केंद्र सरकार के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के तहत आते हैं.
अगर आपको चुनाव से जुड़ी या उसके अलावा भी किसी ख़बर पर शक हो तो हमें लिखें. हमारा पता है PADTAALMAIL@GMAIL.COM
वीडियो- धौरहरा: 'जितिन प्रसाद आते थे, 5 साल हो गए सांसद रेखा वर्मा कभी क्षेत्र में दिखाई नहीं दी'














