तस्वीरे हैं, किसी कार्यक्रम में लोग झगड़ रहे हैं. साथ ही कैप्शन है. "कोलकाता के बैरकपुर में भाजपा के समर्थक खुद में ही चौकीदार बनने का अभ्यास करते हुए आज पाए गए. मीडिया के जवाब में कहा गया कि हम सब भाई-भाई हैं, तो ये हमारा ज़िम्मेदारी बनता है कि अभ्यास भी अपनों में किया जाए."# क्या है दावा?

झमाझम शेयर कर रहे हैं लोग.
कुछ जगह पर तो ये भी कहा जा रहा है कि, मीडिया ने आपको ये जानबूझकर नहीं दिखाया -
लिखा है - मुकुल राय बनाम दिलीप घोष के लड़ाके#1- सबसे गूगल में बैरकपुर से लेकर बंगाल बीजेपी फाइट तक ख़बरें तलाशी. कुछ नहीं मिला.# हमने शुरू की दावे की पड़ताल.
#2- फिर हमने आजतक की संवाददाता मनोज्ञा लोइवाल से बात की. वो पश्चिम बंगाल ब्यूरो से जुड़ी हैं. मामलों की जानकारी रखती हैं. उन्होंने बताया कि जिस टना को कोलकाता के बैरकपुर का बताया जा रहा था, वो घटना बैरकपुर की नहीं, हावड़ा की है. और ये भी पता चला कि खबर अभी की नहीं 3 अप्रैल 2016 की है. यानी कि करीब तीन साल पहले.
#3- पता लगा कि तब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे थे. रूपा गांगुली बीजेपी के टिकट से हावड़ा सीट पर चुनाव लड़ रही थी. 3 अप्रैल 2016 के दिन वो चुनाव प्रचार के लिए उत्तर हावड़ा में थीं. उस वक्त हावड़ा में बीजेपी दो भागों में बंटी हुई थी. विवेक सोनकर और उमेश रॉय. इन दोनों गुटों के बीच अक्सर लड़ाई होती थी और समर्थक आपस में भिड़ जाते थे. क्योंकि लड़ाई वर्चस्व की थी. 3 तारीख के दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ. रूपी गांगुली चुनाव प्रचार के लिए नॉर्थ हावड़ा में थीं. चुनाव प्रचार के दौरान ही इन दोनों गुटों की आपस में भिड़ंत हो गई. इस घटना में कई लोग घायल हुए थे. और मीडिया में भी खबरें चली थीं.
#4- थोड़ी मेहनत की तो न्यूज़ एजेंसी ANI का ट्वीट भी मिल गया.
हमारी पड़ताल में सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे झूठे निकले. बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच लड़ाई आज-कल की नहीं बल्कि 3 अप्रैल 2016 की है. यानी ज़रूरी नहीं कि हर बार तस्वीरें झूठी ही हों, कई बार 'कैच' कहीं और होता है. और कहीं और मने, उस तस्वीर के साथ का कैप्शन.# क्या निकला नतीज़ा?
तो अब आपको भी कोई पोस्ट दिखे, चुनाव से रिलेटेड कोई भी वीडियो दिखे, जिसपर आपको शक हो. उसे सीधा भेजिए हमारे पास Padtaalmail@gmail.com पर. हम उसकी पड़ताल करेंगे और आपको उसकी हकीकत बताएंगे.










