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पड़ताल: वीडियो का छोटा हिस्सा काटकर सावरकर के बारे में फिर झूठ फैलाया जा रहा

वीडियो दिखाकर सोशल मीडिया यूज़र्स दावा कर रहे हैं कि सावरकर ने जेल में ऐसे कष्ट सहे थे.

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सोशल मीडिया पर दावा वायरल कि सावरकर के अंडमान जेल के दौरान की वीडियो फुटेज ब्रिटिश पत्रकार ने खींची है. जिसे बाद में BBC ने दिखाया भी था.
दावा सोशल मीडिया पर एक ब्लैक एंड वाइट वीडियो वायरल हो रहा है. फुटेज के साथ वायरल दावे में कहा जा रहा है कि ये वीडियो फुटेज वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) की है जब उन्हें अंडमान की जेल में कैद किया गया था और इसे ब्रिटिश पत्रकार ने फिल्माया था. हम दावे में बिना किसी भाषाई सुधार किए इसे ज्यों का त्यों लिख रहे हैं-
*एक ब्रिटिश पत्रकार ने अंडमान के जेल में जाकर सावरकर का वीडियो फुटेज लिया था, वह दुर्लभ फुटेज बीबीसी ने भी अपने चैनल पर दिखाया था, आप एक बार यह दुर्लभ फुटेज देखिए जिसमें एक छोटी-सी कोठरी में सावरकर कैद हैं.*
ट्विटर बायो में खुद को राष्ट्रवादी लेखक बताने वाले वेरिफाइड यूजर भारत ने वायरल दावे को ट्वीट किया. ( आर्काइव ) फेसबुक पर कई यूज़र्स ने ये दावा पोस्ट किया है. आप यहां और यहां क्लिक करके देख सकते हैं. फेसबुक के अलावा वॉट्सऐप पर भी ये दावा खूब वायरल हो रहा है. पड़ताल 'दी लल्लनटॉप' ने दावे की पड़ताल की. पड़ताल में ये दावा ग़लत पाया गया. ये वीडियो फुटेज किसी ब्रिटिश पत्रकार ने नहीं खींची है. ये भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की फिल्म डिवीज़न की बनाई एक बायोग्राफी का हिस्सा है. ये असली फुटेज नहीं है. दावे की पड़ताल के लिए हमने इंटरनेट पर सर्च किया- Veer Savarkar Andmaan Footage. यहां हमें यूट्यूब का एक लिंक मिला जिसमें पूरी 40 मिनट 58 सेकेंड की फ़िल्म थी. नाम था 'वीर सावरकर' इसे भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अपने यूट्यूब चैनल पर 14 अगस्त, 2014 को पब्लिश किया था.
"वीर सावरकर" फिल्म को फ़िल्म डिवीज़न ने साल 1983 में बनाया था. प्रेम वैद्य इसके निर्देशक थे. वायरल हो रहा एक मिनट 39 सेकेंड का वीडियो 1983 में बनी "वीर सावरकर" फिल्म का एक हिस्सा है. फिल्म डिवीज़न की वेबसाइट पर मौजूद फिल्म लाइब्रेरी कैटेलॉग में क्रमांक 4706 पर इस फिल्म के बारे में अधिक जानकारी दी गई है.
फिल्म के सिनेमैटोग्राफर एम. एस. गंगाधर और श्रीधर जोशी थे और असिस्टेंट सिनेमैटोग्राफर बी. खोसला और ई. किशन थे, न कि कोई ब्रिटिश पत्रकार. इस फिल्म के बारे में प्रेम वैद्य के अनुभव अमरेकी मैगज़ीन- "अमेरिकन सिनेमैटोग्राफर" में दर्ज हुए थे. नतीजा पडताल में ये दावा झूठ निकला. वायरल फुटेज किसी ब्रिटिश पत्रकार ने नहीं खींची है. ये 1983 में सूचना प्रसारण मंत्रालय की फिल्म डिवीज़न की बनाई फिल्म "वीर सावरकर" का हिस्सा है.
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